The Haunted Curse of a Village in Uttarakhand: Real Ghost Encounter
0m 0s
यह पॉडकास्ट एक डरावनी कहानी साझा करता है जो उत्तराखंड के एक सुनसान गाँव में घटित हुई। वक्ता के एक यात्री दोस्त ने उमरेठ गाँव में एक सप्ताह बिताया, जहाँ उसकी मुलाकात सुरेश नामक एक लड़के से हुई। सुरेश ने बताया कि वह एक आवाज के बुलावे पर घर छोड़कर यहाँ आया है। यात्री के लौटने पर पता चला कि वह गाँव वास्तव में खंडहर है और सुरेश की मृत्यु पाँच साल पहले एक दुर्घटना में हो चुकी है। सुरेश की आत्मा शायद उस गाँव में फँसी हुई है, और अब वह यात्री को भी वहाँ बुला रही है, जिससे एक श्राप जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस कहानी को सुनने वाला कोई भी व्यक्ति इस श्राप की चपेट में आ सकता है। इसके अलावा, एक दूसरी कहानी में दादी के समय की घटना सुनाई गई, जहाँ एक बरगद के पेड़ से मन्नत माँगने के कारण परिवार को भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिससे पता चलता है कि अलौकिक शक्तियों से जुड़ी मन्नतें खतरनाक हो सकती हैं।
वक्ता 1
हाँ तो ये स्वागत है एक नए हॉरर पोडकास्ट में आज हमारे मौजूद हैं दिलीप भाई और आज जो ये कहानी बताने वाले वो उत्तराखंड के कैसे गांव के जो बहुत खुफिया जो एकदम बंद पड़ा है और ये इनके बहुत ही एक क्लोज़ दोस्त के साथ वो घटी हुई घटना है और जब वो घटना इन्होंने हमें बताई तो भाई हमने कहा।
इसको तो हम जरूर कवर करने वाले अपने पोडकास्ट में और शुरू करते हैं।
ओह व्हाट यू दिलीप?
वक्ता 2
भाई थैंक यू भाई मेरे को दोबारा बुलवाने के लिए एक बार।
वक्ता 1
अरे भाई।
वक्ता 2
और भाई देखो ये घटना में सुनाने से पहले आपको ये बता दू की बहुत।
लोग शायद इस बात पर यकीन ना करें कि ऐसा नहीं हो सकता।
भाई वैसा नहीं हो सकता पर जीस पर बीतती है ना वही बंदा जानता है और मैं इसे बताना स्टार्ट करूँगा कि मेरा बहुत क्लोज़ फ्रेन्ड जो मेरे साथ रहता है, उसके साथ ये घटना हुई तो बात ये उस वक्त की है भाई जब ना काफी जिंदगी हमारी स्लो थी, मतलब इंटरनेट वगैरह इतना नहीं था।
रियो की बात है 2002 के करीब।
अभी जो मेरा दोस्त है वो है भाई ट्रैवलर, वो घूमता है सोलर ट्रैवलिंग करता है, काफी घूमता है पहाड़ों में इधर उधर पूरे इंडिया में काफी स्टेट नाप रखे हैं, घूमता फिरता है।
उसको सोलर ट्रैवलिंग का मन करता है।
जब भी पहुँच जाता है उसे कुछ शांति चाहिए होती है, वो जाके ऑफ बिट जाता है।
गांव में ऐसे किसी मेन सिटी में जाके नहीं गांव वगैरह में जाके एक दो हफ्ते रहके आता है अपनी शांति में जो भी उसे थोड़ा रैटर है वो लिखना विखना होता है तो भाई वो पहुँच गया 1 दिन उत्तराखंड के उमरेठ गांव में।
आप सर्च भी कर सकते हो गूगल पे इस गांव का नाम वहाँ पहुँच गया और वहाँ उसे भाई मिला।
एक जगह उसने अपनी ली वहाँ पे रहने के लिए उसने बुक किया।
एक आध हफ्ते तक वहाँ पे एक कैफे था।
छोटा सा वहाँ मिलता है उसे एक सुरेश नाम का लड़का उससे बातचीत होती है, उसकी उसका खूब ख्याल रखता है।
उसे क्योंकि एक आध हफ्ते का उसका ट्रिप था तो खूब ख्याल रखता है तो बातो बातो में बता उसे पूछता है भाई गांव के बारे में बता गांव कैसा है?
इस तरीके से थोड़ा गांव घूमा, मेरे को की कैसा है कहता ठीक है भैया गांव घूमा ले चलते हैं तो वो बातो में बता देता है कि मैं यहाँ का रहने वाला नहीं हूँ और मैं बारहवीं क्लास में ना घर से भाग के आ गया था।
यहाँ पर।
वो कहता है, अच्छा भाई ऐसा क्यों कह रहा नहीं मैं क्योंकि वहाँ का था ही नहीं और इस तरीके से मेरे को अच्छा नहीं लगता की मैं भाग के आ गया।
कह रहा ठीक है भाई जो होगा अपना उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा भाई कल ना सुबह मेरे को गांव दिखा दे, थोड़ा सा गांव कैसा है, कहता ठीक है, चलते है, गांव घुमाता है।
तो भाई हिल एरिया होता है, वो तो वहाँ के लोगों की तो आदत होती है।
हम जैसे लोग थोड़े थक जाते है तो वो जो मेरा दोस्त था वो थक गया, वो रुक गया।
कह रहा भाई मैं नहीं थक जा, मैं नहीं चल पाऊंगा तो वो लड़का मजाक में कह देता है की ऐसे दिल्ली वाले तो ऐसे ही होते है।
इनमे जान वान है नहीं, यहाँ आ जाते चलने तो वो भी थोड़ा।
गुस्से में आके कहता है भाई तू कौन सा यहाँ का है?
तू भी तो भाग के आ रखा है तो उस लड़के को बहुत बुरी लग जाती है वो तब तो वो कुछ नहीं बोलता है।
कह रहा भैया चलो कोई बात नहीं रात को जब खाना वाना उसे दे रहा होता है सर्वे करके तो वो रोता है।
लड़का थोड़ा रोते हुए बताता है कि ऐसा नहीं है कि मैं जान के भाग के आया हूँ।
आपने कहा ना मैं भाग के आया हूँ।
मैं वहाँ का कभी था ही नहीं।
दिल्ली का मैं यही से बिलौंग करता हूँ।
एक आवाज थी ना जो मेरे को बुलाती थी, वो मेरे को चेन नहीं लगने देती थी और मेरे साथ ऐसा ऐसा वो इन्स्टंट बताता है अपना कि मैं कैसी फैमिली से आता हूँ।
मैं बारहवीं पास करके और मैं जीस दिन बारहवीं पास करके आया था।
और मेरे को वो ये आवाज़ इतनी स्ट्रोंगली बुलाती थी ना अपनी तरफ कि मैं खींचा चला आया यहाँ पे।
वक्ता 3
अच्छा।
वक्ता 2
कह रहा मेरे को सारे इन्स्ट्रक्शन दिए गए कि कहाँ आना है, कैसे आना है इस तरीके से और मैं यहाँ आके मैं लगा।
वक्ता 4
तो वो आवाज सुनता, सुनता उस गांव में पहुँच गया उस गांव से आ रही थी बेसिक्ली उसको।
वक्ता 2
और वो फिर वो और भी कुछ पूछना चाहता है कि ऐसा क्यों होता है?
कौन है तुम्हारे पीछे?
वो मेरा दोस्त क्वेश्चन पूछता है पर वो बताते बताते रुक जाता है जैसे कि उस आवाज़ ने उसे मना कर दिया कि नहीं कुछ नहीं बताना वो बताना चाहता है पर रुक जाता है।
बोलते बोलते तो वही रुक जाता है कि उसे जैसे किसी आवाज़ ने मना कर दिया उसी आवाज़ ने कि भाई कुछ मत बता।
वो लड़का खूब रोता है कि मेरा भी मन करता है वापस जाने का, पर मैं यहाँ एक मजबूरी में अटका हुआ हूँ।
मेरा मन नहीं है यहाँ आने का, मेरे को किसी ने रोका हुआ है यहाँ पर इस तरीके से मैं वहाँ जाऊंगा तो मेरे को फिर वापस परेशान करेगी।
वो आवाज जो भी है इस चीज़ के पीछे वो बंदा उसमें आ जाता है।
भाई सुनके चाहिए भाई ये क्या चीज़ है, क्या सीन है?
अगले दिन उसका वो खत्म हो रहा होता है।
भाई लास्ट दिन होता है उसका, वो कहता है मैं जा रहा हूँ वहाँ से नीचे उतर के आता है।
1012 किलोमीटर नीचे आके गांव वो जो शहर है जहाँ से उसे बस वगैरह लेनी है या फिर जाना होता है अपने शहर की तरफ वहाँ आता है वहाँ बोलता है यार वो बोलता है कि आसपास के लोगों से पूछता हूँ कि ये क्या सीन है?
इस चीज़ इसका वो लोगों से बोलता है तो जो उसे सुनने में मिलती है आसपास के बोलता है कि भाई वहाँ गांव में तो लोग ही 1015 बचे हैं।
तुम किस्से मिला है वहाँ तो ऐसा कैफे वैफै भी कोई कुछ नहीं ऐसा और तुम किस्से मिलाये वहाँ पे तो वहाँ तो खंडहर पड़ा गांव वो कहता है यार तुम मेरा पागल बना रहे हो क्या भाई मैं तो उस ऊपर मिल के आया हूँ।
वहाँ के पुलिस वालों से बात करता है कि भाई मैं चलो इनसे बात करता हूँ, क्या पता ये झूठ बोल रहे हो।
पुलिस वाले के पास जाता।
पुलिस वाले भी यही कहते हैं कि भाई वो तो गांव में तो खंडहर पड़ा है।
1012 लोग रहते थे वहाँ पर अब वो भी नहीं है।
अच्छा जी उसे यकीन नहीं।
वक्ता 3
होता और जो आपका दोस्त था वो उस लड़के के अलावा और भी लोगों से मिला।
वक्ता 2
वहाँ।
वक्ता 3
कैफ़े में।
वक्ता 2
रहा कैफ़े में रहा।
वक्ता 3
खाना पीना।
वक्ता 2
खाया खूब वो उसको हो जाता है की टेंशन में को भाई ये क्या होगया मेरे साथ कहता है मैं यही रुकुंगा आज रात और सुबह लेके जाऊंगा लोगों को अपने साथ ऊपर दिखाके लाऊंगा मैं उसे मिलाके लाऊंगा उस लड़के से कौन है वो?
क्योंकि वो तो देखके आ रखा था उसने कहा भाई।
जाता है वो अगले दिन ऊपर लेके जाता दो तीन लोगो को और पुलिस वालो को अपने साथ लेके जाता है तो भाई अगले दिन देखता वहा पूरा खंडर गांव में जहा वो जगह रुका था, घूमा था पूरा गांव खंडर पड़ा एक आदमी नहीं वहा पे तो जो।
वक्ता 4
कैफे वैफे था वो।
वक्ता 2
भी कुछ भी नहीं था भाई सब खंडर पड़ा था घास, उग राखी थी और ये सब।
एक आध जो लोग होंगे वहाँ घूमते फिरते वो होंगे वरना वहाँ पर कुछ भी नहीं था।
वक्ता 3
यार ये कैसे हो सकता है यार?
वक्ता 2
भाई, ये चीज़ उसके।
वक्ता 4
दिमाग में आई।
वक्ता 2
भाई कोई भी नहीं वहाँ पे एक दो लोग घूम रहे थे जो लोकल थे बस और कुछ भी नहीं था।
जो उन्होंने देखा उसका दिमाग गया फिर?
कह रहा अब मेरे को कह रहा की यार मैं कैसे झूठा बन सकता हूँ?
लोग कहने लगे वह बेवकूफ है, पागल बना रहा है या फिर नशे कर रहा है।
इस तरीके से उसे बोलने लगे वहाँ पे उसके दिमाग में आई हाँ उसके दिमाग में आई की भाई नहीं यार अपने आप को गलत रूप नहीं होने देना।
अब उसने कहा कि वो जो लड़के ने मेरे को बताया था।
अपना एड्रेस दिल्ली में रहता है।
वहाँ जाऊंगा वहाँ पे तो करके आऊंगा की कितनी सच्चाई है, कितनी झूठ लाई है इसमें ठीक है वो बैठ लेता है भाई नीचे जाके बस में की दिल्ली चलते है अब दिल्ली में आया है सात 8 घंटे का सफर, उसे पता ही नहीं चला कब सफर निकल गया वो इसी सोच में है की भाई क्या है?
क्या नहीं है वहाँ पहुँच जाता है।
जो जैसे जैसे उसने पता बताया था उस लड़की ने वहाँ पहुंचता है।
गली के बाहर उसके उन्होंने बताया था पान की दुकान है एक एक पान की दुकान में पहुँचता है वहाँ पे हाँ पूछता है की यार एक बार पूछ लेता हूँ यहाँ पे की यार ऐसे करके सुरेश का कोई है क्या यहाँ पे जो ऐसे भाग गया हो कुछ टाइम पहले वो पनवाड़ी देखता है, बोलता है पुलिस वाले हो तुम कह रहा नहीं तो फिर पूछ क्यों रहा उसके बारे में?
कह रहा नहीं ऐसी दोस्त हूँ मैं उसका बताओ तो सही तो वो ऊँगली कर देता है भाई ये वाला कर रहा है, बहुत जाता है गेट खट खटाता है गेट में 4550 साल की औरत निकलती है उसकी वो छूटते क्या होता है की मैं आंटी सुरेश का ना दोस्त हूँ और कुछ पूछ नहीं आया हूँ आपसे तो पहले तो आंटी चौंक जाती है फिर उसे बुला लेती है।
चलो कोई बात नहीं धीमे आवाज में बोलती है की आ जाओ, बैठ जाओ।
क्योंकि उन्हें पता होती है वो लड़का झूठ बोल रहा है कि आगे चाय वाये पानी वाणी पर वो मना कर देता है।
कहता है आंटी मेरेको ना एक बात पूछनी आपसे मैं अभी ऐसे ऐसे करके उत्तराखंड के एक गांव में था।
वहाँ मैं एक हफ्ते रुका वहाँ मेरेको ना सुरेश मिला।
आपका जो लड़का है उसने मेरेको भेजा है।
वो आंटी एकदम गुस्से में बोलती है कि तुम पागल वागल हो गए हो और यहाँ मेरा मजाक बनाने आए हो मेरे लड़के का और मेरा वो कहता क्यों क्या हो गया कि हमारा लड़का तो 5 साल पहले ही मर गया और वो ऐसे कि उसने मेरे को भेजा आपसे मिलने के लिए क्यों कैसे साल पहले मर गया?
हाँ?
और वो वो बोलता है, वो बोलता है मेरा दोस्त बोलता है की भाई कैसे ऐसे कैसे हो गया वो दिखाती है फोटो उसकी ये था वो देख के की हाँ भाई यही था वहाँ तो यही था क्यों उसके साथ वो बोलता है फिर आंटी, अगर आप बुरा न मानो बता सकते हो की हुआ क्या था उसके साथ?
तो बताता है कि वो उसकी मम्मी बताती है कि यार हसता खेलता परिवार था।
हमारा काफी अच्छा इंटेलीजेंट लड़का था हमारा और बस हमारी गलती की वजह से चला गया।
वो बोलता गलती कैसी गलती कह रही बताता है कि जब उसके ट्वेल्फ्थ के एग्ज़ैम चल रहे थे ना तो उसने हमें कितनी बार बताया था कि उसके उसे न सपने में आवाज आती है कि यहाँ चला।
तू यहाँ से बिलौंग नहीं करता, तू मेरे पास आजा।
इस तरीके से हमने सोचा की कोई डरावना सपना होगा या कुछ इसका भयम होगा।
वो कहके हमने उस चीज़ को टाल दिया तो हमने जब उसे ये चीज़ टाल दी तो ट्वेल्फ्थ के एग्ज़ैम जीस दिन उसके खत्म हुए और उसका रिसाल्ट आने वाला था ना उस दिन अच्छा खासा रिसाल्ट आया।
हम सब खा पी खुश थे।
वो घर आया, मैंने कहा कि चल सोसाइटी में ना मिठाई बाँट देते है तो मिठाई ले आ तो जैसे ही वो मिठाई लेने के लिए अपने घर से निकला फिर वो वापस लौट के ही नहीं आया।
ट्रक से उसका अक्सीडेंट हो गया और हमने उसकी अंतिम क्रिया करी और वो तो इस तरह ही खत्म हो गया तुमको कैसे मिल गया?
तो उस सम वो लड़का समझ जाता है कि ये जो हुआ वो अंतिम अपने अंतिम मौत तक लड़का उत्तराखंड के उस गांव में जाना चाहता था क्योंकि उसको वो आवाज बुला रही थी और जीते जी तो वो जीते जी तो वो जा नहीं पाया।
वहाँ मरने के बाद शायद उसकी आत्मा थी जो उस गांव में बस गई थी जाकर।
और जैसे ही वो घर से उठता है मेरा दोस्त घर उठता है जाने के लिए कि अब मैं जाता हूँ और उसको थोड़ा वो शौक में चला जाता है कि इस चीज़ को कैसे डाइजेस्ट करूँ मैं जैसे ही वो घर से निकलता है ना तो आवाज आती है कि कि अब ये श्राप तुम्हें अभी लग चुका है।
तुम्हें मेरे बारे में पता है, मैं सुरेश बात कर रहा हूँ और अब वापस चले आओ इस गांव में मेरे साथ रहने।
वक्ता 1
मतलब जो तुम्हारा दोस्त है वो भी ये सुन पाता है की उसको भी वापस आजा यहाँ आजा की आवाज आती।
वक्ता 2
है हाँ, क्योंकि वो कहता है सुरेश की मैं अकेला हूँ।
वो एक तरह का श्राप दे रहा है।
लोगों को जीस जीस इंसान को ये चीज़ पता चलती जाएगी।
वो वो उस गांव में जाके उसके हाथ में उस गांव में जाके रहना स्टार्ट कर देंगे।
वक्ता 4
अरे तेरी मतलब?
उससे फिर उस गांव से आवाज आयेगी।
वक्ता 2
आपको कि आप इस गांव में चले आओ, आप यहाँ से बिलौंग करते हो?
वक्ता 3
तो आपका दोस्त अब क्या करता है?
वक्ता 2
अब तो भाई आखिरकार वो फिर।
इस चीज़ से कैसे निकला उन्होंने काफी अपना भाई वो कराया मंदिर मंत्र पूजा पाठ करा काफी कराया।
उसे आवाजे आना काफी बाद में बंद हुई।
उसे एक आध हफ्ते दो।
तीन हफ्ते वो इतना परेशान रहा, फ़ोन पे उसको आवाजे आती थी कि मेरे पास कॉल आती थी, वो उठाता था कि मेरे पास चले।
वक्ता 1
आओ नंबर।
वक्ता 2
नंबर भाई पता नहीं पर कॉल आती थी उसे।
ऐसा नंबर तो मेरे को ऐसा कुछ पता नहीं इस चीज़ का, पर उसे कॉल आती थी की मेरे पास चले जाओ, मेरे पास चले जाओ।
इस तरीके से दिन में आवाज़ें आना स्टार्ट हो गई।
पीछे से जैसे बेक हमारे दिमाग में से पीछे से कोई आवाज दे रहा है की मेरे पास चले जाओ, इस तरीके से और ये श्राप एक तरीके से जैसे मैंने आपको भी बता दिया तो आपको भी ट्रांसफर हो सकता है।
और जो ऑडिएंस है तो आप भी ट्रांसफर हो सकती।
वक्ता 4
है।
मतलब हमें भी सुनाई दे सकती।
वक्ता 2
है, इसमें रिस्क है।
हाँ।
वक्ता 4
अरे तेरी?
वक्ता 3
भाई साहब।
वक्ता 4
मतलब रात में लेटे हुए हमें ये आएगा कि भाई यहाँ।
वक्ता 2
ही आवाज आ सकती है आप?
वक्ता 3
भाई जाना मत यार, कहीं कोई भी यार।
और हमें तो आ ना जाए कॉल सही में वही।
वक्ता 4
पट जाएगी सही में यार हम तो भाई सो नहीं पाएंगे हमारा तो कल शूट है दोबारा।
वक्ता 2
इसी चक्कर में सोना सोना ही नहीं है।
रात भर।
वक्ता 3
आप नाम बदल देते यार सुरेश का मुकेश कर देते तो उसे लगता कि चलो कोई और नाम है, ठीक है।
वक्ता 2
बात ही नहीं पहुँचती भाई क्या पता गुस्सा हो जाता की नाम बदल।
वक्ता 4
दिया अच्छा, जो उनके पास भी हो सकता।
वक्ता 2
है भाई जीस को ये।
वक्ता 4
जीस।
वक्ता 2
जीस तक ये कहानी पहुंचेगी ना जीस, किसी भी माध्यम से किसी भी तरह।
वक्ता 3
भाई ये ये कैसे मतलब वेरीफाई हुआ की हाँ चलो ये श्राप ही है ऐसा।
कुछ और उसको कुछ पता चला।
कुछ और लोगों से वो मिला कि आपका दोस्त ने कैसे?
वक्ता 2
हाँ, उसने पता किया कि उस गांव पे वो श्राप लगा वो उस गांव में अगर आप उस गांव से किसी भी तरह पहुँच गए ना तो आप।
वक्ता 4
पर उस गांव की क्या हिस्टरी क्या है, उस गांव की क्या हुआ था उधर?
वक्ता 2
उस गांव की ये हिस्टरी है कि एक बार कुछ ऐसा हुआ था वहाँ पर कोई ऐसी बिमारी है, कुछ ऐसा फैल गया था कि वहाँ के न रातोरात काफी लोग काफी लोग मर गए थे।
वहाँ लासें ही बिस गई थी।
रात रातो रात कुछ ऐसी बिमारी फैल गई थी कि वहाँ कुछ सब कुछ बचा ही नहीं।
बस ये माना जाता है कि लास्ट में एक औरत बची थी जो 82 साल की है, जो सिर्फ पूरे गांव में वही बची थी।
एक अकेली और उसमें शराब लग चुका है वहाँ पर वहाँ पर जाने एकदम मना है।
अगर आप जाओगे क्योंकि पहाड़ी इलाकों में उत्तराखंड वगैरह में वैसे भी काफी देवभूमि और वहाँ पर काफी इस तरीके की जो परनोरमल अक्टिविटीज है, पाई जाती है भाई।
पर अगर ऐसे ही जाओ तो भाई ऐसी जगह तो बिलकुल मत जाओ शराब पीते।
वक्ता 4
भाई ये तो पता ही ना चले ना कि कौन सी शराब पीते है, क्या है वो तो गांव में समझ के चला गया।
आपका दोस्त नॉर्मल गांव है, कैफे है, उसे तो पता ही।
वक्ता 1
नहीं भाई पहाड़ों में होता भी ज्यादा है ये वो बता रहे सोलो ट्रैवेल में चले गए और चोटी पे ट्रैवेल करते करते तो भाई।
फेस कर लिया भाई ने।
वक्ता 4
अरे यार तेरे साथ हुआ ऐसा कुछ तो क्या करेगा कि गांव है ही नहीं, वापस चला गया तो अब गांव नहीं है।
वक्ता 1
लेकिन दोस्त की दांत देनी पड़ेगी, दोस्त को मानना पड़ेगा साला वेरीफाई करने के लिए गया है कि भाई किसी को लेकर चलो।
वक्ता 4
देखो भाई उसे तो ये था ना कि मैंने तो मैंने तो जिया है वो पल मैंने तो देखा है।
वक्ता 2
उसे क्यूरियोसिटी हो गयी ना कि ये मेरे साथ कैसे हो गया और मेरा।
को तो लड़का मिला है, मैं पता करके आऊंगा।
वक्ता 4
की।
इसलिए तो पूछ रहा हूँ तू क्या करेगा?
वक्ता 1
भाई देख वापस तो नहीं जाया जाएगा, वापस नहीं जाऊंगा मैं वेरीफाई करने के लिए।
वक्ता 4
तू वापस चला गया है, अब देख लो भाई खंडर है अब क्या।
वक्ता 1
करेगा अब वही थोड़ी।
वक्ता 2
जाऊंगा।
वक्ता 3
तू क्या करेगा वहाँ खंडर देख लिया तो।
वक्ता 4
मैं उस कैफ़े को ढूंढूंगा वो था।
वक्ता 3
कौन अब वो खंडर है, खंडर हो गया।
वक्ता 4
भाई, यही करूँगा भागूंगा वहाँ से और जो लोग है वो अगर वो ज्यादा वो नहीं हुए कि जैसे लोग भी तो वो जाते हैं कि हमारा पागल बना रहे बना रहे तो भाई भागूंगा ही उनसे भी बच के और गौ से बच के।
वक्ता 3
साले उन्हीं की टाटा सुमो में तो तू ऊपर तक आया?
वक्ता 4
पुलिस पुलिस के साथ अब क्या पागल भाग पहाड़ी।
वक्ता 3
से भालू पकड़ लेगा रास्ते में?
वक्ता 4
पहाड़ी के जरिए नीचे नीचे।
वक्ता 1
आऊंगा चलेगा बिचलेगा सूरज बिच बिच रहेगा तेरे।
वक्ता 3
बेटे सुरेश पकड़ ले और भालू भी पकड़ सके वहाँ।
वक्ता 4
तू तो बता तू क्या करेगा?
वक्ता 3
क्या करूँगा यार, एक ही तो?
वक्ता 4
कुछ तगड़ा बता।
वक्ता 3
बदतमीजी का ऑसर सुनना चाहता है मैं वहीं बस जाऊंगा टेंट वेंट गाड़ के की वापस आके तो।
वक्ता 4
यही होगा आवाज सुनाई देगी तो यही।
वक्ता 3
रहो क्या दिक्कत है अब तो शराप लग।
वक्ता 2
गया।
भाई एक रात और बिताओ उसी गांव में खंडहर में उस खंडहर में एक रात और बिता के आओ फिर?
वक्ता 5
हाँ अगला।
वक्ता 3
किस्सा बताओ क्या हुआ?
वक्ता 2
था तो भाई अगला किस्सा यह है कि यह भी पुरानी बातें काफी और मेरे दोस्त की दादी की बात है।
ये और काफी पुरानी बातें है।
ये लोग अभी सोचे कि भाई ऐसा नहीं होता वैसा नहीं होता।
तो दादी के टाइम की बात ये है कि उनके घर में क्या था कि होता है ना?
पुराने टाइम में ये होता है कि हमारे एक लड़का हो जाये, लड़की को भी एक लड़का हो जाये ताकि हमारा वंश आगे चल पाए।
पुराने टाइम में लोग सोचते।
वक्ता 3
थे।
अरे आज भी बहुत लोग सोचते।
वक्ता 2
हैं।
हाँ, आज भी सोचते हैं पर थोड़ा अब चेंज हो रहा है।
पर तो उस टाइम ये हुआ कि।
जो उनकी दादी थी, उनकी न काफी बहनें ही बहनें होती जा रही थी।
मैं लड़की लड़की पैदा होती जा रही थी।
उनकी पांच बहनें थी।
उनसे बड़ी और वो सबसे छोटी थी जिनके बारे में है ये तो उनके माँ बाप थोड़े परेशान रहते थे की यार लड़के के चक्कर में पांच लडकियां हो चुकी है।
लड़का हो नहीं रहा हमारा बंस कैसे चलेगा आगे?
घर परिवार काफी है और हमारा घर ये बंस कैसे बढ़ेगा?
आगे काफी परेशान रहते थे उनके माँ बाप तो वो सबसे छोटी लड़की थी।
उन्होंने सुन लिया अपने माँ को बात करते हुए की यार मेरे माँ बाप परेशान रहते है।
एक लड़का नहीं हो रहा।
इनके तो कहा जाता है की उनके गांव में बहुत पुराना बरगद का पेड़ था उसपे मान्यता उनकी ये थी।
उनका मानना ये था की इसके पास जाके।
एक आंख बंद करके अपनी एक मन्नत मांगो और 10-15 दिन भाई भूखे प्यास रहना पड़ेगा।
वक्ता 3
पानी भी नहीं।
वक्ता 2
पानी भी नहीं पी सकते और पूजा करनी पड़ेगी।
पेड़ की 10-15 दिन आपको निर्जला से निर्जला व्रत कहते हैं।
इसमें पानी भी नहीं पी सकते और आपकी कोई भी मन्नत हो वो पूरी हो जाएगी वो जाके?
अब उस पेड़ पर मैं ये नहीं कह सकता की प्रेत था या देवता था क्योंकि के पेड़ पर प्रेत भी रहते हैं और देवता भी रहते हैं।
मन्नत पूरी करता था ये चीज़ अभी नहीं पता मेरे को नहीं पता की कौन था जाके।
उन्होंने कहा 910 साल की रही होंगी, वो छोटी थी।
उन्होंने कहा की मेरे वहाँ परेशान है, जाके करके मन्नत मांगते हैं की मेरे माँ बाप की एक लड़का पैदा कर दो।
और उसका कुछ भी वो हो, मैं उसको मैं आपको उसको छूकाउंगी उसका जो भी आप बदले में लोगे और मैं आपका व्रत रखूंगी।
इस तरीके से मान्यता मांग लेती है और अगले दिन से व्रत रंगना स्टार्ट कर देती है।
बिना खाना पीना छोड़ देती है भाई धीरे धीरे उनकी तबियत खराब होने लगती है और उनके घर में भी काफी बीमारियां आने लगती है।
तीसरे दिन तक उनकी मरने वाली हालत हो जाती है।
भाई बिना कुछ खाये ना पिए, मरने वाली हालत तो हो ही जाएगी।
910 साल की लड़की है वो, अब घरवाले परेशान, डॉक्टर को दिखाया ऐसे बिमारी कोई नहीं पर वो छुप के ना खा रही थी, ना पानी पी रही थी कि मेरे माँ बाप का लड़का हो जाए और उससे काफी बच्चे को काफी बोला गया कि बता क्या हुआ, दिक्कत है तेरे को क्या दिक्कत है?
डॉक्टर ने कोई बिमारी नहीं बताई, तेरे को क्या हो रहा है?
हमें बता तो वो रो धो के फिर बता देती है कि ऐसे ऐसे उस पेड़ पर जाके ना आप लोग परेशान दे तो मैंने अपने भाई की मन्नत मांगी है।
अब वो लोग तो इस में आ गए की यार ये क्या करे?
क्योंकि वो उस पेड़ पर जो भी आपने बोल दिया एक बार वो फिर होके रहेगा।
किसी भी हालत में जाके पूजापाठ करी भाई वहाँ के पंडितों को बुलाया गया के हाथ जोड़े उस पेड़ के आगे जाके उनके माँ बाप ने की हमारी बेटी नादान है गलती कर दी नादानी में आपसे ये मन्नत मांग ली इसे आप माफ़ कर दीजिए और आगे से हम ऐसा ख्याल रखें कुछ ना हो।
भाई वो ठीक नहीं हुई।
उन्हें ना सपने में भी एक आदमी दिखने लग गया क्योंकि उन्होंने लड़के की मांग करी थी।
ना उनके सपने में एक जो जन्मा बच्चा होता है ना वो दिखने लगा उन्हें हर जगह जीते जागते भी उन्हें बच्चा दिखता था कि बच्चा मेरे आसपास घूम रहा है, सपने में बच्चा दिख रहा है इस तरीके से और वो परेशान हो गई।
धीरे धीरे उनकी जो पांच बड़ी बहनें थी, उनकी डेथ हो गई।
पहले पहले मरीज भाई एक महीने में उनके घर में दो मौतें हो गई थी दोनों बहने क्योंकि उन्होंने मांग लिया था एक अलग चीज़ जो उनके हाथ में भाई जो कुदरत के हाथ में आया।
लड़की लड़का तो।
उसका वो ये था कि जब तक ये सब मरेंगे तभी एक लड़का पैदा होगा।
वो एक मान्यता ये थी ना कुछ लेगा तभी कुछ मिलेगा इस तरीके से अच्छा।
वक्ता 4
ये मान्यता।
वक्ता 2
कुछ न कुछ आपको देना ही पड़ेगा।
आपके घर से कुछ न कुछ जाएगा ही, जब भी वो मान्यता पूरी होगी आपकी और फिर उनकी पांचों बहने मर चुकी थी, वो अकेली ही बची थी लास्ट में।
वक्ता 3
एक महीने।
वक्ता 2
में दो बहने मरी और फिर धीरे धीरे टाइम में उनकी पाँचों बहने।
वक्ता 3
खत्म हुआ।
जो पूजा पाठ करवाया उससे कुछ नहीं।
वक्ता 2
फिर भी जब लास्ट में आके उन्होंने खूब पूजा पाठ की बहुत मन्यत मांगी तब जाके फिर वो अपने माँ की अकेली बची है और फिर लड़का फिर भी पैदा नहीं हुआ।
उनके कोई भी उनके बाद भी जो बच्चे पैदा हुए ना।
वो एक महीने के अंदर दो महीने के अंदर तीन महीने के अंदर और लड़का फिर भी नहीं हुआ।
लड़की हुई।
वक्ता 4
तो भाई।
वक्ता 2
क्यों गलत हो गया ना भाई?
वक्ता 4
नहीं।
पर एक तरीके से तो वो भी लेर जो बरगद का पेड़ है, जो भी कह रहे हो आप उसको वो तो अपनी इच्छा पूरी कर ली ना।
उसने बदला तो ले लिया।
वक्ता 2
ना भाई नहीं नहीं वो चीज़ गलत हो गई ना?
मान्यता ये थी ना कि आप व्रत रहोगे।
1215 दिन बिना खाये, बिना पूसे प्यासे तीसरे दिन जब उसकी हालत खराब हुई उनकी तो उन्होंने फिर वो चीज़ छोड़ दी पर आप एक बार मने तो मांग चूके थे, वो चीज़ तुम्हे पूरी करनी चाहिए थी, वो चीज़ वहाँ खराब हो गई।
अगर वो चीज़ पूरी करते तो शायद कुछ हो जाता, अच्छा मिल जाता।
पर उन्होंने वो चीज़ छोड़ दी जब तीसरे दिन हेल्त खराब हुई।
इस तरीके से।
वक्ता 3
अरे बाप रे ये भी खतरनाक चीज़ है भाई देख के मन्नत मांगो।
वक्ता 2
जब भी मन्नत मांगो ध्यान से मांगो की हम किस जगह मांग रहे है और कुछ देना ना पड़ जाये वापस क्योंकि अगर जब देवता होता है तो वो तो देता है बदले में आप से कुछ नहीं मांगता अगर उस पेड़ पर कोई प्रेत वगैरह है।
वही?
वक्ता 1
उधर, प्रेत या पिशाच इन्हीं का निवास होगा।
जब इतना नेगेटिव होके वहाँ तो कोई देवता नहीं तो प्रूफ।
वक्ता 4
हो गया पर बरगद के पेड़ यही कहते है वैसे भी की बुरी एनर्जी ही होती है ज्यादातर।
वक्ता 2
नहीं अच्छे भी रहते है हमारे पितृ वगेरा का भी निवास होता है कभी कभी जो अच्छा बरगद होता है उसपे पितृ वगैरा का निवास भी रहता है।
जैसे लोग कभी के नीचे अपने जो खाना पीना होता है ना रात के टाइम में वो के पीछे सर्वे करते हैं।
वक्ता 1
क्रेजी रियल हॉरर स्टोरीज़ लेकर आते हैं हमारे।
वक्ता 5
दिलीप भाई।
वक्ता 1
हर बार और हमको दिलाते मज़ा।
वक्ता 4
मेरे को तो गांव वाला गांव वाला।
वक्ता 1
भाई वो तो बहुत क्रेजी है भाई।
वो क्या है यार?
वक्ता 4
उत्तराखंड में माना भी जा सकता है कि ऐसा हो सकता है भाई।
वक्ता 3
होता होगा।
वक्ता 2
भाई लोगों को लगेगा, झूठ बोल रहा हूँ पर मेरे को मेरा हैंडल डाल देना, मैं बता दूंगा।
वक्ता 3
लोकेशन भेज देना।
वक्ता 2
उनको हाँ लोकेशन भेज दूंगा।
वक्ता 3
और उन्हें पर्सनली स्टोरी बता देना ताकि।
वक्ता 1
लेकिन ये बात अपने दोस्त से पूछ लेना कि ये सब बातें कर सकते हैं, बिल्कुल।
वक्ता 2
कर सकते हैं भाई मैं जब मैं ये चीज़।
बता रहा हूँ तो वो मेरे को एक दम पर्सनली।
वक्ता 1
नहीं, इंस्टाग्राम है उनका।
वक्ता 2
नहीं, मेरा मेरा डाल दो, अब मैं बता दूंगा सारी चीजें जीसको भी जानने से क्यूरियोसिटी हो की भाई पूरी चीज़ क्या है पर?
वक्ता 4
उत्तराखंड के लोगों को तो पता ही।
वक्ता 2
होगी भाई उन्हें पता है।
वक्ता 4
थोड़ा आप भी कैन्फर्म करना, कमेंट सेक्शन वैसा।
वक्ता 3
है।
कमेंट सेक्शन में भाई ने जो गांव का नाम ओमरेड गांव के उत्तराखंड से जो हमें देख रहा है।
एक बार ज़रा वेरीफाई करो की गांव वो श्रापित है या नहीं।
वक्ता 1
है ना, चलो जी इसी के साथ?
वक्ता 5
पोडकास्ट को खत्म करते हैं।
अगर आपको मज़ा आया तो लाइक कर दो कमेंट कर दो शेयर कर।
वक्ता 1
दो और भाई जो।
वक्ता 5
बच्चे ये पोडकास्ट देख रहे हैं।
उन लोग को बता दो मैं जब हम लोग बाहर निकलते हैं ना, हमें काफी पेरेंट्स मिलते हैं आप लोग के।
वो ये कहते हैं आपके पोडकास्ट हमारे बच्चे देख रहे हैं, लेकिन उनको ना ये सलाह जरूर दो।
यूट्यूब देखने के साथ साथ न पढ़ाई पे भी ध्यान दो।
वक्ता 3
पढ़ाई पे भी ध्यान दो।
वक्ता 5
तो भाई पढ़ाई लिखाई भी अपनी जारी रखो।
हमारे पॉडकास्ट में मदद आपको आ ही रहा है, ठीक है, बढ़िया चीज़ है हम को हम को तो ज्यादा मज़ा आ रहा है।
आप हमारे पॉडकास्ट देख रहे हो, लेकिन पढ़ाई लिखाई भी बहुत ज्यादा जरूरी।
वक्ता 4
है दोनों काम?
वक्ता 5
करो दोनों काम करो।
वक्ता 4
मिलते हैं अगले पॉडकास्ट में।
भाई को फॉलो कर लेना इंस्टाग्राम पे और।
वक्ता 5
भाई से बातचीत।
वक्ता 4
कर लेना।
वक्ता 1
भाई भाई कर देंगे।
वक्ता 5
वेरीफाई ये कहानी पूरी।
वक्ता 4
और ऐसे ही नए नए हॉरर रिपोर्ट का हम आपके लिए लाते रहेंगे तो?
वक्ता 5
लाल बटन को दबा दो, सब्सक्राइब ठोक लाइव।
वक्ता 4
शेयर कमेंट।
वक्ता 3
बाई बाई जय श्री राम जय बजरंग बली, अपना ध्यान रखो भैया।
Podcast Summary
Key Points:
एक यात्री दोस्त की उत्तराखंड के एक सुनसान गाँव में अलौकिक घटना का अनुभव।
गाँव में एक रहस्यमय लड़के सुरेश से मुलाकात, जो एक आवाज के बुलावे पर वहाँ आया था।
बाद में पता चला कि सुरेश की मृत्यु पाँच साल पहले हो चुकी थी और वह गाँव वास्तव में खंडहर है।
इस घटना का एक श्राप के रूप में प्रसारण, जो इस कहानी को सुनने वालों तक पहुँच सकता है।
दादी के समय की एक दूसरी कहानी जहाँ एक बरगद के पेड़ से मन्नत माँगने के गंभीर दुष्परिणाम हुए।
Summary:
यह पॉडकास्ट एक डरावनी कहानी साझा करता है जो उत्तराखंड के एक सुनसान गाँव में घटित हुई। वक्ता के एक यात्री दोस्त ने उमरेठ गाँव में एक सप्ताह बिताया, जहाँ उसकी मुलाकात सुरेश नामक एक लड़के से हुई। सुरेश ने बताया कि वह एक आवाज के बुलावे पर घर छोड़कर यहाँ आया है। यात्री के लौटने पर पता चला कि वह गाँव वास्तव में खंडहर है और सुरेश की मृत्यु पाँच साल पहले एक दुर्घटना में हो चुकी है। सुरेश की आत्मा शायद उस गाँव में फँसी हुई है, और अब वह यात्री को भी वहाँ बुला रही है, जिससे एक श्राप जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस कहानी को सुनने वाला कोई भी व्यक्ति इस श्राप की चपेट में आ सकता है। इसके अलावा, एक दूसरी कहानी में दादी के समय की घटना सुनाई गई, जहाँ एक बरगद के पेड़ से मन्नत माँगने के कारण परिवार को भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिससे पता चलता है कि अलौकिक शक्तियों से जुड़ी मन्नतें खतरनाक हो सकती हैं।
FAQs
उमरेठ गांव एक रहस्यमयी और सुनसान गांव है जहाँ एक अजीब श्राप के बारे में कहा जाता है। यह गांव खंडहर में तब्दील हो चुका है और यहाँ कुछ अलौकिक घटनाएँ होने की कहानियाँ प्रचलित हैं।
सुरेश एक ऐसा व्यक्ति था जिसकी आत्मा उमरेठ गांव में फँसी हुई है। वह जीवित रहते हुए एक आवाज से आकर्षित होकर गांव आया और मृत्यु के बाद भी वहीं बस गया, दूसरों को भी वहाँ बुलाने लगा।
श्राप यह है कि जो भी इस गांव के रहस्य के बारे में जान जाता है, उसे एक आवाज उस गांव में वापस आने के लिए बुलाने लगती है। यह आवाज फोन कॉल या मानसिक रूप से सुनाई दे सकती है।
वास्तव में, उमरेठ गांव पूरी तरह से खंडहर है और वहाँ कोई नहीं रहता। हालाँकि, श्राप के कारण कुछ लोगों को वहाँ जीवित लोग और सुविधाएँ दिखाई देती हैं, जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं।
बरगद के पेड़ पर कभी-कभी नकारात्मक शक्तियाँ या प्रेत निवास करते हैं, जो मन्नत पूरी करने के बदले में कुछ न कुछ माँगते हैं। गलत तरीके से मन्नत माँगने पर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सुरेश की माँ ने बताया कि सुरेश की मृत्यु एक दुर्घटना में हो गई थी और वह पाँच साल पहले ही मर चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरेश को जीवित रहते हुए भी एक आवाज उमरेठ गांव बुलाती थी।
Chat with AI
Loading...
Pro features
Go deeper with this episode
Unlock creator-grade tools that turn any transcript into show notes and subtitle files.