Stop overthinking and calm your mind by Sandeep maheswari - Sandeep Maheswari
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यह संवाद ओवरथिंकिंग और व्यवसायिक निर्णय लेने में आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। वक्ता बताते हैं कि भविष्य को लेकर बार-बार एक ही नकारात्मक विचार को दोहराना चिंता और तनाव पैदा करता है। व्यवसाय के संदर्भ में, जल्दी परिणाम न मिलने पर बार-बार रणनीति बदलना एक समस्या है, जिसका मूल कारण खराब योजना या लक्ष्यों की अस्पष्टता है। सफलता के लिए एक स्पष्ट, मापने योग्य और समयबद्ध योजना आवश्यक है। साथ ही, अनुभवी लोगों से सलाह लेने और उचित शोध करने पर जोर दिया गया है। अंत में, जुनून और पेशेवर कार्यों के बीच स्पष्ट अंतर करना महत्वपूर्ण बताया गया है—जहाँ जुनून व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए है, वहीं पेशेवर कार्य बाजार की मांग के अनुरूप होना चाहिए। दोनों को अलग रखकर ही दीर्घकालिक सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
वक्ता 1
ओवर थिंकिंग चलती रहती है।
दिमाग में फ्यूचर से रिलेटेड सोच करके की अगर ये हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा?
दट।
लीडस् टु एन्क्साइटी एंड डिप्रेशन क्योंकि अगर एक ही थॉट को हम बार बार रिपीट करते रहेंगे अपने मैएंड में और वो थॉट कन्क्लूड नहीं होगा एंड नहीं होगा तो वो लूप बन जाएगा और उस लूप को ही स्ट्रेस बोलते हैं।
वक्ता 2
इफ आई ऍम टॉकिंग अबाउट बिज़नेस।
मतलब मैं एक एग्ज़ैम्पल हूँ तो की हम वो बिज़नेस कर तो रहे है, बट इतना डिस्ट्रक्शन हो रहा है या फिर आप ये कह लीजिए की प्रॉफिट नहीं आ रहा है?
मार्केट में कॉम्पिटिशन है, इतना ज्यादा सेम चीज़ पे तो होता क्या है?
फिर डिस्ट्रक्शन हो जाता है।
फिर ऐसा लगता है की चेंज करते है।
आज हमने ये स्ट्रेटेजी बनाई की हम ऐसे काम करेंगे क्योंकि उसमें प्रॉफिट नहीं आ रहा और जस्ट उसको वॅन वीक ही हुआ है।
उस स्ट्रेटेजी को नेक्स्ट वीक हमने एक और स्ट्रेटेजी बना ली।
ओवर थिंक कर करके बार बार अपनी प्लानिंग चेंज कर रहे है।
डिस्ट्रिक्ट हो रहे है अपने।
पास से डिस्ट्रैक्ट हो रहे हैं तो स्टिक नहीं रह पा रहे हैं।
वक्ता 1
व्हाई अरे यू कालिंग इट ए डिस्ट्रक्शन?
क्योंकि अगर आप कुछ कर रहे हैं बिज़नेस में या कोई भी काम कर रहे हैं और वहाँ पर रिसाल्ट नहीं मिल रहा है तो आप अपनी स्ट्रेटेजी चेंज कर रहे हैं, इसको पेमेंट करना बोलते हैं, आप कुछ अलग कर रहे हैं?
व्हाई अरे यू कालिंग इट ए डिस्ट्रक्शन।
वक्ता 2
बिकॉज़ मुझे ऐसा लगता है कि अगर हमने कुछ प्लानिंग कर रही है तो हमें उसको टाइम देना चाहिए, ना उसको टाइम देंगे तब वो शायद रिज़ल्ट देगा।
बट हम लोगों में इतने पेशेंस ही नहीं है कि उसको मैं टाइम दूं तो?
पेशेंट्स की कमी कह सकती हूँ मैं इसको।
वक्ता 1
जो आप क्वेश्चन पूछ रहे हो ना, उसी क्वेश्चन में आप खुद उसका ऑसर भी दे रहे हो और यही पे गड़बड़ हो रही है व्हाट?
यू अरे सयिंग इस के इस तरह से मैं डिस्ट्रैक्ट हो जाती हूँ यानी की मैं जब कोई काम करती हूँ वहाँ पर रिसाल्ट नहीं आता है तो मैं कुछ और करती हूँ लेकिन अगर मैं ये ना करूँ मैं उसी स्ट्रेटेजी पे टिके रहूं यानी मेरे अंदर पेशेंस हो।
अब मेरा अगला क्वेश्चन आपसे ये होगा पेशेंस कितना होना चाहिए अभी आप कह रहे हो एक हफ्ते में मैं चेंज करती हूँ अपनी स्ट्रेटेजी को।
तो क्या आप ये कह रहे हो कि अगर एक हफ्ते में ना करूँ एक महीने में करूँ, 1 साल में करूँ, 10 साल में करूँ तो रिसाल्ट मिल जाएगा।
वक्ता 2
राइट?
वक्ता 1
सो यहाँ पे समझने वाली बात ये है कि जो आप गोल सेट्टिंग कर रहे हैं उसमें साथ में टाइम भी होना चाहिए।
अभी प्रॉब्लम ये है।
कि आपने एक स्ट्रेटेजी बनाई?
बट आपने ये उसके साथ में नहीं अटैच किया कि कितने टाइम में ये डिसैड होगा कि स्ट्रेटेजी काम कर रही है या नहीं कर रही है या फिर उसका मेजरमेंट क्या है कि किस बेस पे आप कहोगे कि स्ट्रेटेजी सक्सेसफुल है या फेल्यूर है?
फॉर एग्ज़ैम्पल अपने एक स्ट्रेटेजी बनाई और वहाँ पे 10 ऑर्डर आ गए और आप परेशान हो रहे हो क्यों?
क्योंकि आपने पहले से ये नहीं सोचा था।
या तो आपने पहले से ही सोच लिया होगा कि ये करके 100 ऑर्डर आएँगे तो इसका मतलब प्लानिंग में गलती हो गई।
या फिर आपने ये टाइमलाइन सेट नहीं करी कि कितने टाइम में वो होगा तो हम उसको सक्सेस कहेंगे या फेल्यूर कहेंगे तो?
इट इस नॉट ए प्रॉब्लम ऑफ़ डिस्ट्रक्शन इट इस ए प्रॉब्लम ऑफ़ प्लानिंग की प्लानिंग कैसे करें लाइफ में?
वक्ता 2
बट ओवर थिंग ऐट दी सेम टाइम मेरे को ओवर थिंक कोई लग जाता है कि नहीं हो पा रहा है, इससे मैं कैसे ओवरकम करूँ?
मतलब मैं ओवर थिंक इतना कर लेती हूँ कि फिर मैं उस प्लानिंग को चेंज कर देती हूँ।
वक्ता 1
तू प्लानिंग को चेंज करना बुरा थोड़ी ना होता है।
जो भी लोग सक्सेसफुल हुए हैं किसी भी बिज़नेस में आपको क्या लगता है कि उन्होंने अपने मैएंड में एक प्लान बनाया और उसपे स्टिक हो गए और उनको सक्सेस मिल गई?
ऐसा होता है जैसा हम प्लान बनाते हैं।
लाइफ में वैसा कभी भी नहीं होता है।
आप में से कितनो की शादी हो गई है।
दो की हुई है।
तो जैसा सोचा था शादी के बारे में वैसा कुछ होता है, उससे बिल्कुल अलग ही कुछ हो रहा होता है ना?
वो बात शादी के बाद में समझ आती है।
ये तो कुछ और ही हो रहा है।
जैसे सोचा वैसा नहीं हो।
ऐसे बिज़नेस में होता है, ऐसी जॉब में होता है, ऐसी हर काम में होता है।
हम सोचते कुछ है होता कुछ और है तो जब उससे अलग हो रहा होता है।
जैसा हमने सोचा होता है तो अपने प्लान को चेंज करना होता है तो इसमें गलत क्या है?
कुछ भी गलत नहीं है।
नाउ यू अरे सयिंग ओवर थिंकिंग जो भी आपको यहाँ पर दिख रहा है यह दुनिया में कुछ भी ऐसा दिख रहा है जो कि मैन मेड है इस इट नॉट ए रिसाल्ट ऑफ़ ओवर थिंकिंग।
किसी ने वन प्वाइंटेड थिंकिंग करी जिसने करी पता नहीं उसके सर में कितना दर्द हुआ होगा, कितने उसने अपने दिन खराब करे होंगे, जिंदगी के या शायद पूरी जिंदगी खराब करी होगी तब जा करके वो चीज़ पॉसिबल हो पाई जैसे यहाँ पे कैमरा लगाए जो की अभी हमको रिकॉर्ड कर रहा है हमारी कॉन्वर्सेशन को सोचो जिसने कैमरा बनाया क्या वो बिना थिंकिंग के बन गया?
वक्ता 2
दट।
वास् ओवर थिंकिंग है ना गलत नहीं।
वक्ता 1
है।
ओवर थिंकिंग करना बिल्कुल भी गलत नहीं है।
सबसे पहले तो ये हमको समझना पड़ेगा।
प्लस ये समझना पड़ेगा कि जो प्रॉब्लम आप कह रहे हो, क्या आप ओपन भी हो उस प्रॉब्लम की सलूशन के लिए?
या फिर जो आप क्वेश्चन पूछ रहे हो उसी में आपके पास में ऑसर भी है?
फिर भी आप पूछ रहे हो जैसे आपने क्वेश्चन ये पूछा की ये मेरी प्रॉब्लम है की मैं कुछ टाइम में अपना बिज़नेस प्लान चेंज कर देती हूँ जिसकी वजह से मुझे ओवर थिंकिंग होती है लेकिन अगर मैं ये ना करूँ मेरे अंदर पेशेंस हो और मैं डिस्ट्रैक्ट ना हो तो मेरे को रिसाल्ट मिल जाएगा।
अब मेरा अगला क्वेश्चन आपसे ये होगा की जो भी आपकी स्ट्रेटेजी है पहले तो आपको ये कैसे पता कि वो स्ट्रेटेजी सही है या नहीं है क्योंकि अगर वो सही नहीं है तो एक हफ्ता क्या 1 साल में भी रिसाल्ट नहीं मिलेगा?
100 साल में भी नहीं मिलेगा तो इस पेशेंस के ऑसर
वक्ता 2
सो दट्स व्हाट आई ऍम आस्किंग की मेरे को एग्ज़ैक्ट्ली ऐडिया ही नहीं है की जो मैं प्लानिंग कर रही हूँ वो ठीक भी है की नहीं?
वक्ता 1
है दट इस ए प्रॉब्लम।
वक्ता 2
येस, एग्ज़ैक्ट्ली?
वक्ता 1
प्रॉब्लम ये है की हमें क्लैरिटी नहीं है की जो हम कर रहे है वो सही भी है या नहीं है या उसकी वजह से रिसाल्ट आएगा भी या नहीं आएगा?
राइट इसलिए ओवर थिंकिंग हो रही है इसलिए डर लग रहा है।
इसलिए मैएंड बार बार चेंज होता रहता है।
जब ये करूँ या वो करूँ जो आप करूँ या बिज़नेस करूँ या बिज़नेस में यह चेंज कर दूँ या बिज़नेस ही चेंज कर दूँ?
यह सब क्यों हो रहा है?
क्योंकि क्लैरिटी नहीं है तो क्वेश्चन यह होना चाहिए कि कैसे हमारा जो प्लान है हमारी जो स्ट्रेटेजी है?
वो स्ट्रांग बने, उसमें सक्सेस होने के चान्सेस बहुत ज्यादा होने चाहिए।
फेल्यूर के बहुत कम होने चाहिए और अंदर से आपको ये पता होना चाहिए नॉट बेस्ड अपॉन की।
मुझे ऐसा लगता है की मेरी गुड फील ऐसा कहती है।
तो व्हाट आई ऍम सयिंग?
इस के पहले प्रॉब्लम को अच्छे से डायग्नोज़ करो तो प्रॉब्लम जो मुझे समझ आ रही है, जो प्लान है, जो स्ट्रेटेजी है उसमें इतना दम नहीं है।
अब वो क्यों नहीं है क्योंकि आपको उसमें एक्सपीरियंस नहीं है?
कोई प्लान जो आप बना रहे हो अगर वो प्लान मैं बनाता हूँ या कोई और इंसान है जिसने उस तरह का बिज़नेस किया हुआ है वो बनाता है।
और वो आपको बताता है की इसको इस तरीके से कर लो।
अब कोई डिस्ट्रक्शन आएगा आपके मैएंड में और वो आपको एग्ज़ैक्ट बता देंगी।
देखो ये करने से इतना टाइम लगेगा और आपको कॉन्फिडेंस होगी।
वो इंसान जो गाइड कर रहा है वो अपने फायदे के लिए आपको अवाइड नहीं कर रहा है।
की जो मैं प्लान दे रहा हूँ ना इस पे चल करके तुम 10,00,000 20,00,000 ₹50,00,000 महीने का कमाओगी बस मुझे ₹1,00,000 दे दो।
तो इसका मतलब क्या हुआ की वो इंसान अपने फायदे के लिए आपके प्लान को मैनिपुलेट कर रहा है?
बट मान लो आपको कोई वेल विशर है फैम्ली में, फ्रेन्ड सर्किल में या कहीं कोई कनेक्शन में?
कहीं ना कहीं कोई ना कोई तो होता है, ना जो वैसा कुछ कर रहा होता है जैसा कि आप कर रहे हो।
तो अगर उनको आप एप्रोच करो, उनके साथ टाइम स्पेंड करो।
वक्ता 2
पर मुझे ऐसा लगता है सर कोई भी सही अडवाइस नहीं करता।
हर कोई जो भी पर्सन या अडवाइस करता है, वो अपने एंड पर अडवाइस करता है।
मुझे ऐसा लगता है अगर इंजीनियर से इंजीनियर वाले क्वेश्चन करे जाए तो ही बेटर है, उससे मेडिकल के क्वेश्चन करेंगे तो वो क्या ऑसर करेगा?
तो मुझे ऐसा लगता है, एडवाइस भी किस्से ले मतलब कोई एडवाइस सही करता नहीं है।
या तो अगर कोई एडवाइस करा तो वो अपने एंड पे सिर्फ अपने फायदे की बात करता है की जैसा आपने बताया की मुझे 1,00,000 दे दो और तुम्हे 50,00,000 आ जाएगी।
सेम अडवाइस समझ नहीं आता।
वक्ता 1
अगर उस फील्ड की आपको ना नॉलेज है, ना एक्सपीरियंस है और आप ये अस्यूम कर रहे हो की अडवाइस कोई सही नहीं देता है तो आपने अपने लिए सक्सेस के दरवाजे ही बंद कर दिए है।
अब चाहे ओवर थिंकिंग हो या ना हो, कोई फर्क नहीं पड़ता है, चाहे उस प्लान पे आप 1 साल काम करो, चाहे 10 साल काम करो, कोई फर्क नहीं पड़ता है।
तो सबसे पहले तो अपने जो प्री कंसीव नोशन है उसको चैलेंज करो।
ये कहना कि अडवाइस कोई सही नहीं देता है, ये आप अपने लिए ही सारे रास्ते बंद कर रहे हो।
कोई तो अडवाइस सही देता है।
ऐसे मत कहो आपके सामने एक इंसान बैठा है।
राइट अगर आप बिज़नेस से रिलेटेड कुछ करना चाहते हो तो मैंने बहुत सारे सेशन्स बनाए हैं, तो क्या मैंने गलत अडवाइस दी?
वक्ता 2
है तो।
वक्ता 1
इसका मतलब कहीं तो कोई है ना जो सही अडवाइस देता है और मैं अकेला तो हूँ नहीं।
बहुत सारी बुक्स हैं जो बहुत अच्छे ऐसे एंटरप्रेन्योर ने लिखी है जिन्होंने अक्चवल में बिज़नेस किया है, तो वो भी अडवाइस सही दे रहे हैं।
बहुत सारे आन्ट्रप्रनर हैं, उनकी बायोग्राफी हैं, बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो आप कर रहे हो।
उससे रिलेटेड वो कुछ कर रहे हैं।
जैसे फॉर एग्ज़ैम्पल आप क्या काम कर रहे हो आप?
वक्ता 2
एजुकेशन कॅसल्टेंसी है मेरा।
वक्ता 1
एजुकेशन कॅसल्टेंसी व्हिच इस ए सर्विस ओरिएंटेड बिज़नेस राइट।
इसको पहले हमने ब्रॉड किया क्योंकि अगर हम बोलते है एजुकेशन कॅसल्टेंसी वाला ही कोई इंसान आ करके आपको गाइड करेगा तो वो क्यों करेगा?
क्योंकि उसके तो आप कॉम्पिटिटर हो गए?
बट अगर हम बोलते हैं एक सर्विस रिलेटेड बिज़नेस जो कोई सक्सेसफुल्ली कर रहा हो और एग्ज़ैक्ट्ली एजुकेशनल कॅसल्टेंसी में ना हो लेकिन कोई और सर्विस ऑफर कर रहा हो या सक्सेसफुल्ली किसी बिज़नेस को रन कर रहा हो या कर रही हो वो आपके फैम्ली में फ्रेन्ड सर्किल में आई ऍम शुर ऐसे लोग होंगे ऐसा हो ही नहीं सकता की ना हो।
अगर उन लोगों को आप बोलोगे कि मैं कुछ करना चाह रही हूँ और मैं आपसे डिस्कॅस करना चाहती हूँ तो क्या वो मना करेंगे?
मिलने के लिए नो मिलेंगे, आपकी बात को समझेंगे।
फिर अगर आप ध्यान से उनकी बातों को सुनोगे तो कुछ बातें आपको ठीक लगेंगी, कुछ नहीं लगेंगी और कुछ नहीं तो उनके साथ बैठ करके जब डिस्कॅशन करोगे तो हो सकता है जो आप कर रहे हो उसमें बहुत सारे फ्लॉस आपको नजर आ जाएंगे।
कुछ नए आइडियास मिलेंगे।
उनके एक्सपीरियंस से कुछ ना कुछ सीखने को मिलेगा।
वक्ता 2
बट वहाँ पे ये लगता है की वो बिज़नेस मेरे लिए ठीक है।
मुझे मुझे ये समझ नहीं आता सर की बिज़नेस जिसमें प्रॉफिट हो वो करना चाहिए काम या फिर जो हमारा शौक है या पैशन है उसको फॉलो करना चाहिए।
वक्ता 1
आइडल सिनेरियो है वो।
आपका शौक और पैशन भी होना चाहिए और उसमें पैसा भी होना चाहिए।
ये आइडल सिनेरियो है।
बट अगर ये नहीं भी है तो सेकंड बेस्ट सिनेरियो है की उसमें पैसा होना चाहिए।
अगर आप बिज़नेस वर्ड की बात कर रहे हो तो।
वक्ता 2
दट।
मीन्स मनी मैटर्स?
वक्ता 1
मनी ऑब्वियस्ली मैटर्स नहीं तो काम कर क्यों रहे?
हो?
मतलब इफ यू अरे सयिंग मनी डोएसन्त मैटर तो जो भी आप कर रहे हो दट, इस जस्ट ए वेस्ट ऑफ़ टाइम बिकॉज़ यू अरे कालिंग ऐट ए बिज़नेस या तो कहो के ये मेरा बिज़नेस नहीं है, इट्स मैं पैशन लाइक वाकिंग डान्सिंग।
प्लेइंग प्लेइंग विथ फ्रेन्डस।
वक्ता 2
वॅन ऑफ़ मैं फ्रेन्ड इस सयिंग की मेरे को एनिमल्स बहुत पसंद है तो वो कहता है कि ना कुछ एनिमल्स के लिए करो क्योंकि तुम बहुत डेडिकेटेड हो, उनके लिए तुम एजुकेशन कॅसल्टेंसी में गलत हो, तुम कुछ एनिमल्स के लिए करो, लाइक कुछ शेल्टर चलाओ या ऐसा रेस्क्यू करो, एनजीओ टाइप चलाओ।
यू अरे नॉट फॉर एजुकेशन कॅसल्टेंसी बिज़नेस यू अरे फॉर एनिमल्स ओनली
वक्ता 1
कोई घूमा फिरा करके नहीं अभी जो आप कर रहे हो एजुकेशनल कॅसल्टेंसी वाला जो भी काम कर रहे हो वहाँ से पैसा कमा रहे हो या गवा रहे हो?
वक्ता 2
नहीं कमा रहे हो।
वक्ता 1
कमा रहे हो ना तो करते रहो साथ साथ में अपना जो कर रहे हो वो करते रहो अगर आप पैसा नहीं कमा रहे होते तो फिर ये सवाल उठता की हाँ ठीक है कुछ ऐसा करते हैं एनिमल्स से रिलेटेड जो बहुत कुछ किया जा सकता है अगेन दट्स ए बिग इंडस्ट्री वो कुछ छोटी इंडस्ट्री नहीं है और उसको करने के भी बहुत तरीके हैं और फ्यूचर में आप चाहो तो वो कर भी सकते हो।
यहाँ से पैसा कमाने के बाद में आप अपना वो भी कर सकते हो।
एस बिज़नेस भी कर सकते हो।
एस सोशल एंटरप्रेन्योरशिप भी कर सकते हो, फ्री में भी कर सकते हो, डिपेंड करता है।
आपके पास में कैसे रीसोर्सेस है, पीछे से बेक अप कैसा है?
बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके पास में बहुत पैसा है।
उन्होंने शेल्टर होम खोल लिया है स्ट्रीट डॉग्स के लिए और ऐसे जो भी एनिमल्स होते हैं उन लोगों के लिए और वो किसी से पैसा भी नहीं लेते हैं।
खुद ही सारा मैनेज कर रहे हैं तो आप भी करो कौन रोक रहा है, पैसा होना चाहिए।
अब डिपेंड करता है।
आपके ऊपर कितना पैसा है?
करेक्ट?
और आपको ये भी समझना है हर एक चीज़ का अपना प्लस माइनस है क्योंकि जैसी एक चीज़ को आप एस प्रोफेशनल करते हो तो वहाँ पे आपकी एप्रोच बदल जाती है।
फॉर एग्ज़ैम्पल ये जो मैं भी कर रहा हूँ, अगर मान लो मैंने आप लोगों से पैसे ले लिए तो जीस तरह से मैं कर रहा हूँ क्या मैं उस तरह से कर पाऊंगा?
फिर बेसिक्ली एक एक्स्चेंज ऑफ़ सर्विस होगी।
वहाँ पर की आप आकर के मुझे ये कहोगे की मैंने पैसे दिए ये मेरी एक्स्पेक्टेशन है चलो सर मेरी एक्स्पेक्टेशन पूरी करो, मैंने आपको पैसे दिए थे, मोटिवेशनल टॉक के लिए तो हमें मोटिवेट करो।
सर हमें तो एनर्जी चाहिए, ये बातें नहीं चाहिए लेकिन क्योंकि मैंने आपसे पैसे नहीं लिए, तब मैं क्या करूँगा?
जो मुझे सही लगेगा वो करूँगा ना?
अगर आपको नहीं सही लग रहा है तो आप उठ करके जा सकते हो या अगर वीडियो देख रहे हो तो वीडियो बंद कर दो सब्सक्राइब किया हुआ है।
अनसबस्क्राइब कर दो तो मुझे फर्क ही नहीं पड़ रहा।
इन सब चीजों से समझ गए तो ये मेरी अपनी कॉल है।
मुझे देखना है किस काम को पैशन के लिए करना है और किस काम को एस ए प्रोफेशनल करना है।
अब वो मैंने किस बेस पे कॉल लिया।
देखो ऐसा नहीं है की पैसा जरूरी नहीं है।
मनी इस वेरी इम्पोर्टेन्ट इन लाइफ बट कुछ ऐसे काम होते हैं जिंदगी में जहाँ पर अगर पैसा इन्वॉल्व हो जाता है, तो उस काम का जो एसेंस है वो खत्म हो जाता है।
अभी ये जो मैं कर रहा हूँ क्योंकि इसमें पैसे इन्वॉल्व नहीं है, तो जो जैसा है, मैं वैसा बोल सकता हूँ बिना ये सोचे कि आपको कैसा लग रहा है।
अच्छा लग रहा है, बुरा लग रहा है सच जितना मर्जी कड़वा हो, मैं बोल सकता हूँ कुछ भी कर सकता हूँ।
मतलब कोई लिमिटेशन नहीं है की यही करना है।
ऐसा ही करना है, वैसा ही करना है।
नहीं तो आप लोगों का क्या होता है?
ऑडिएंस का क्या होता है?
वो एक टैग दे देती है जैसे फॉर एग्ज़ैम्पल आप कह रहे हो एनिमल्स के लिए कुछ करना है तो एनिमल्स के लिए जब आप कुछ करोगे तो उनकी एक्स्पेक्टेशन होगी।
आपसे फॉर एग्ज़ैम्पल कोई अनिमल केयर सेंटर आपने खोल दिया तो वो कहेंगे अच्छा वहाँ पर तो ये होता है आप ये क्यों नहीं कर रहे?
वहाँ पर ये नहीं है कि आप अपने हिसाब से कुछ करने लग जाओगे।
आपको उनको सटिसफाई करना होगा।
इसको बिज़नेस बोलते हैं।
इन ऑदर वर्ड्स जो बिज़नेस होता है, प्रोफेशनल होता है, उसका जो सेंटर पॉइंट होता है वो आप नहीं होते हो।
इन फॅक्ट आप वहाँ पर बिल्कुल भी इम्पोर्टेन्ट नहीं होते हो वहाँ पर जो आपको पैसे दे रहा है।
वो इम्पोर्टेन्ट है उसको क्या चाहिए?
अगर आप उसको वो दे पाओगे जो उसको चाहिए तो बिज़नेस में रहोगे नहीं तो बाहर हो।
आप कहोगे मुझे तो ये पसंद है, वो कहेगा मुझे ये पसंद नहीं है तो बिज़नेस कहाँ हुआ?
फॅशन में ऐसा नहीं होता है।
पैशन में दी सेंटर इस यू जो आपको पसंद है वो करो किसी के बाप का कर्जा नहीं देना वो।
आप किसके लिए कर रहे हो अपने लिए?
हाँ उससे किसी का बेनिफिट हो रहा है नहीं हो रहा है डोएसन्त मैटर।
बट यू अरे डूइंग इट बिकॉज़ आपको अच्छा लगता है वो करना?
और ये जो फर्क है इसको समझना बहुत जरूरी है क्योंकि बहुत लोग नहीं समझते इस फर को।
सर आई ऍम पैशनते अबाउट थिस।
इससे मैं पैसा कैसे कमाऊं इट डोएसन्त मैटर भाई की तू कितना पेशेंट है, कितना नहीं है?
जो पैसा दे रहा है उसको समझ के जो तू काम कर रहा है उसके लिए वो कितना पैसा देने को तैयार है।
वो सामने वाला बंदा कहे की मैं तो तेरे को ₹50 दूंगा, तो हाँ तेरी ₹50 ही है, वैल्यू तो अपने मैएंड में कुछ भी सोचता रहा है।
दट।
इस कॉल्ड मार्केट वैल्यू उस इंसान की वैल्यू।
मार्केट डिसैड करेगी।
बट पैशन में ऐसा नहीं होता है तो इसलिए इन दोनों को इडली हर इंसान को अलग अलग रखना चाहिए।
पैसे को पैशन को, रिलेशनशिप को ये अलग अलग चीजें हैं।
बट हमारे केस में क्या होता है?
बहुत सारे लोगों के केस में सब कुछ मिक्स अप हो जाता है।
रिलेशन में पैसा घुसा पड़ा है।
पैसे में रिलेशनशिप आया पड़ा है, पैसा कमा रहे है, ब्रेक अप हो गया अरे दो अलग अलग चीज़े है, उसको उससे क्या कनेक्शन है?
काम पे ध्यान दो ब्रेक अप हो गया तो गुस्सा आ रहा है अंदर से और एनर्जी लगाओ काम के अंदर काम को और अच्छे से करो और पैशन में हम कॅफ्यूज होते रहते है।
अगर आपको ये गलतफहमी है कि अगर अपना पैशन फॉलो करोगे तो उसके बाद में सब कुछ बहुत अच्छा अच्छा हो जाएगा या आपको बहुत मज़ा आएगा।
ऐसा नहीं होता है।
अपना पैशन फॉलो करने में भी बहुत सारे ऐसे काम करते होते हैं जो आपको करना पसंद नहीं है।
बहुत सारे सैक्रिफ़ाइस देने होते हैं, अपने आप को चेंज करना होता है।
जहाँ प्रश्न प्रोफेशनल बनता है, आपके ऊपर ओब्लिगेशन आनी ही आनी है, नो मैटर व्हाट मान लो जॉब कर रहे हो कहीं पे?
तब आपके प्रोब्लिकेशन आ गई ना?
जो आपको सैलरी दे रहा है, उसकी टर्म्स एंड कंडीशन्स है, उसको आपको फॉलो करना पड़ेगा।
पसंद है नहीं है डोएसन्त मैटर नहीं कर सकते तो जाओ जी बाहर जाओ कोई और आ जाएगा एस सिंपल एस दट बिज़नेस कर रहे हो, अपने स्टाइल से करना चाहते हो, मान लो आप ज्वेलरी का बिज़नेस कर रहे हो, कपड़ों का कर रहे हो, अब वैसे कपड़े बेचना चाहते हो जो आपको अच्छे लगते हैं।
लोगों ने अच्छे लगते हैं।
कहेंगे ये नहीं चाहिए हमें और अगर चाहिए अभी तो इस प्राइस पॉइंट पे नहीं चाहिए हो गया बिज़नेस खत्म शुरू होने से पहले ही।
तो वहाँ पे तो सिंपल ये समझना होता है कि सामने वाले को क्या चाहिए और उसके अकॉर्डिंग उसको पूरा करना होता है।
अब कुछ रेयर केसेस में ऐसा होता है कि वो आपकी पैशन से कनेक्ट हो रहा होता है।
बट उसमें भी ट्वीकिंग करनी होती है।
एग्ज़ैम्पल दूं जैसे मेरा पैशन क्या था?
एक टाइम पे दट वास् फोटोग्राफी तो एस फोटोग्राफर मैं या जो मेरी टीम है हम एक पर्टिकुलर तरह का शूट करना चाहते हैं जो हमको अच्छा लगता है करता बट मार्केट को वो खरीदना अच्छा नहीं लगता है।
देखते हैं वही शॉट्स हैं जो पिछले बहुत सालों से बिकते आ रहे हैं।
मतलब की एक पैटर्न है जहाँ पे क्रियेटिव शॉट्स लोग देख करके बोलते तो हैं कि ये बहुत अच्छा है।
बट खरीदता कोई नहीं है।
खरीदते क्या है वो ही जो बेसिक से शार्ट जो हर आठ में देखते हो एक फैम्ली है मदर फादर दो बच्चे चारों ने एक दूसरे को हक किए हुए स्माइल करके कैमरा में देख रहे हैं।
हो गया शॉट बेस्ट सेल्लिंग शॉट।
तो पैशन के बाद भी करना तो वही पड़ रहा है जो क्लाइंट कह रहा है चाहे उसमें आपका इन्ट्रेस्ट है या नहीं है और कोई भी पैशन हो कैसा भी हो एक पॉइंट के बाद में जा करके बोरिंग हो जाता है ये भी समझ ना होता है।
तो अब क्या होता है कि अगर तू आपका प्रोफेशनल है?
तो चाहे वो बोरिंग है या नहीं है, करना है तो करना है क्योंकि पैसा वही से आना है बट अगर उसको आपने अपना प्रोफेशनल नहीं बनाया है।
इन दोनों को स्मार्ट्ली अलग अलग रख दिया है अपने पैशन को प्रोफेशनल को तो फिर क्या होता है की जहाँ आपको बोरिंग लगने लग जाता है आप उस काम को बंद कर सकते हो या ट्रैक को चेंज कर सकते हो?
कुछ और करो।
वक्ता 3
आपने अभी बताया की ओवर थिंकिंग इस गुड नाउ, इफ आई आस्क यू की ओवर थिंकिंग लीडस् टु डिप्रेशन।
एंड वो इतनी मतलब कुछ चीजें जो हुई नहीं हैं, हम उसके बारे में सोचते रहते हैं, फुल डे एंड वही सोच सोचना आई गेस थिस इस कॉड ओवर थिंकिंग फॉर मी इन मैं केस एंड हम उसी चीज़ को सोच सोच के सोचते हैं कि बस ऐसा होगा तो क्या होगा?
तो मेरा रिएक्शन इस बेसिस पे कैसा होगा?
मैं वो चीज़ कभी स्टॉप नहीं कर पाती हूँ।
वक्ता 1
आपने कहा कि।
ओवर थिंकिंग चलती रहती है।
दिमाग में फ्यूचर से रिलेटेड सोच करके की अगर ये हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा?
दट।
लीडस् टु एन्क्साइटी एंड डिप्रेशन क्योंकि अगर एक ही थॉट को हम बार बार रिपीट करते रहेंगे अपने मैएंड में और वो थॉट कन्क्लूड नहीं होगा एंड नहीं होगा तो वो लूप बन जाएगा और उस लूप को ही स्ट्रेस बोलते हैं।
फिर हमारी बॉडी के लेवल पे भी स्ट्रेस क्रियेट होगा।
जैसे ब्रेन के लेवल पे आप बहुत ज्यादा सोचोगे और अगर आपकी जो अवेयरनेस है वो एक पर्टिकुलर लेवल की है।
यानी की आप अवेयर हो अपनी बॉडी को ले करके, तो आप देखोगे स्टमक में कॉंट्रॅक्षन्स हो रही है।
मतलब सोच रहे हो दिमाग में लेकिन स्टमक में कुछ सेंसेशन हो रही है।
स्टमक के लेवल पे प्रॉब्लम होनी शुरू हो गई है।
डाइजेशन के लेवल पे प्रॉब्लम होनी शुरू हो गई है।
अब इसका सलूशन क्या है?
जो स्पेसिफिकल्ली आपने पूछा के फ्यूचर से रिलेटेड मेरे मैएंड में बहुत सारे सिनेरियो क्रियेट हो जाते हैं, जीसको लेकर के ओवर थिंकिंग चलती रहती है।
तो जो भी वो सिनेरियोस हैं।
वो बहुत ज्यादा नहीं होंगे, कुछ गिने चुने होंगे, वो मैं बता देता हूँ क्या होंगे एक रिलेशनशिप से रिलेटेड होगा।
तो उसका केस भी देख लो।
बेस्ट केस भी देख लो मिड केस भी देख लो वर्क से रिलेटेड होगा काम से रिलेटेड बेस्ट केस देख लो मिडकसेज़ देख लो बस केस देख लो तीनों की प्लानिंग कर लो।
यही तरीका है और कोई तरीका नहीं है।
मतलब की अगर आप बैठे बैठे सोचते रहे तो क्या उससे ये प्रॉब्लम कभी भी सॉल्व होने वाली है?
क्योंकि आप जो सोच रहे हो फ्यूचर में की ऐसा हो सकता है अक्चवल में हो सकता है वो ही सोच रहे हो कभी क्या आप ये सोच करके परेशान होते हो के कल मेरे घर के बाहर एलियंस आ जाएंगे, वो कब्जा कर लेंगे?
ऐसा सोचते हो नहीं यहाँ तक की आप अर्थक्वेक के बारे में भी नहीं सोचते, जिसकी होने की पॉसिबिलिटी हो सकता है, उससे बहुत ज्यादा हो, जिसके बारे में आप सोच।
वक्ता 2
रहे हो?
वक्ता 1
ज़ोन फोर में रह रहे हो?
देर इस ए पॉसिबिलिटी की जो आप सोच रहे हो ना की ऐसा होगा 10 साल बाद उससे पहले आप मर ही जाओगे करेक्ट मलबे में दब करके, लेकिन हम उसके बारे में नहीं सोच रहे तो आप किसके बारे में सोच रहे हो?
वो जो हो सकता है तभी तो प्रॉब्लम हो रही है।
अब आप ये समझो की आप सोच क्या रहे हो?
फिर आप ये सोच रहे हो की मेरी ये रिलेशनशिप है इसमें कल को ये हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा?
ये जॉब है, कल कोई जॉब चली गई तो क्या होगा?
यही सब तू सोच रही हो?
तो हर एक चीज़ का एक बेक अप प्लान बना।
वक्ता 3
लो फिर इसमें प्लस और है।
मेरी तरफ से जो मेरा पर्सनल होता है कि ये हुआ तो क्या होगा?
और इसपे मेरे को गुस्सा आया तो मैं क्या करूँगी?
सो आई हॅव ए एंगर इश्यूस ऑन दट सम्टाइम्ज़ तो वो मुझे ऐसा लगता है मैं वो कैसे काम डाउन करूँ।
अगर ऐसा हुआ तो मुझे इस बेसिस पे बहुत गुस्सा आएगा हौ विल आई रियेक्ट?
वक्ता 1
इसी आर्गुमेंट को थोड़ा और आगे कंटिन्यू करते हैं।
आपने कहा कि मैं ये सोच करके परेशान होती हूँ कि अगर ऐसा हो गया तो मुझे बहुत गुस्सा आएगा।
फॉर एग्ज़ैम्पल जस्ट एन इमैजिनरी सिचुएशन आपसे रिलेटेड नहीं है, जनरल है कि कोई इंसान मैरिड है।
अब वो ये सोच रही है बैठ करके की मेरा पति है उसका अफेयर कही हो, मुझे ना पता हो दट्स ओके?
बट अगर मुझे पता लग गया।
तो मुझे बहुत गुस्सा आएगा तो इस आर्गुमेंट को थोड़ा सा और आगे बढ़ाते हैं।
गुस्सा आ गया तो क्या हो जाएगा, दुनिया खत्म हो जाएगी।
भूचा ला जाएगा, क्या हो जाएगा, सामने वाला भी गुस्सा करेगा ठीक है उसको भी आ गया क्या हो जाएगा एक्सप्लेन इट टु मी?
वक्ता 2
रिलेशनशिप खराब हो जाती।
वक्ता 1
है नहीं क्यों रिलेशनशिप खराब हो जाएगी?
व्हाई अरे यू सयिंग दट?
अच्छा एक बात बताओ आपने कहा रिलेशनशिप खराब हो जाएगी आपके माँ बाप के बीच में कभी लड़ाइयां हुई है, नहीं हुई है, कितनी हुई है और कितनी बड़ी बड़ी हुई है?
हो गई रिलेशनशिप खराब ये अभी भी साथ में रह रहे हैं।
जब भी हमारी लाइफ में कोई बहुत बड़ी गड़बड़ होती है तो गुस्सा आना नेचुरल है।
गुस्सा सिर्फ इंसानों को नहीं आता, जानवरों को भी आता है, जानवरों को भी छेड़ करके देखो तो कोई भी किसी को छेड़ता है तो गुस्सा आना नेचुरल है।
अब आप क्या कर रहे हो?
आप कह रहे हो की मेरे को कोई तंग तो करे लेकिन मुझे गुस्सा ना आये।
पूरी जिंदगी जीते रहोगे इस कॉन्सेप्ट ऑफ़ नॉन एंकर में जो कभी सच होना ही नहीं वाला है।
और इसकी वजह से और ज्यादा गुस्सा आएगा, क्योंकि अननेसेसरी एक रेसिस्टेंस क्रियेट हो रहा है।
अगर ध्यान से मेरे साथ साथ में देखोगे तो एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम आपकी लाइफ की सॉल्व होगी।
अंदर से हम सबके अंदर गुस्सा है।
बट हम अपने इस सबसे डर रहे हैं।
झूठ से डरो तो फिर भी एक बार को समझ आता है भूत से डर रहे हो।
हाँ ठीक है, समझ आ रहा है बेवकूफ हो लेकिन सबसे कौन डरता है?
मतलब ये सच है कि हम सबके अंदर गुस्सा है।
क्या ये सच है?
ये झूठ है, ये मेरी अपनी कोई इमेजिनेशन है।
कोई उसको किसी तरीके से एक्सप्रेस करता है, कोई किसी तरीके से, कोई किसी तरीके से एक्सप्रेशन का तरीका अलग अलग है।
गुस्सा तो सब में है।
गुस्सा मतलब क्या?
जैसा हम चाहते हैं वैसा नहीं होता है तो गुस्सा होता है।
अब कोई आ करके आपको कह रहा है की आप अपने गुस्से को कंट्रोल कर सकते हो।
उसको बोलो तू बेवकूफ है, अगर उसको गुस्सा ना आए तो मेरा नाम बदल देना।
क्या हो गया भाई साहब अभी तो आप कह रहे थे गुस्से को कंट्रोल करो क्या हो गया आपको इतना गुस्सा क्यों आ गया?
वक्ता 2
पर गुस्सा में इतना कुछ निकल जाता है, मुँह से इतना कुछ निकल जाता है।
वक्ता 1
तो सामने वाले के भी निकलता है प्रॉब्लम क्या है?
इतनी टेंशन क्यों?
वक्ता 2
ले रही है सर की ये सब नहीं बोलना चाहिए था।
वक्ता 1
यार तो हो गए ना रियललाइजेशन अच्छा है ना कईयों को नहीं होती है।
वक्ता 3
ऐसा होता है की आप खुद भी उतनी कुछ बोल सकते है एंड सम्टाइम्ज़ बात आपको रियलाइज होता है की ये नहीं बोलना चाहिए था या ये सामने वाले को भी नहीं बोलना चाहिए था।
वक्ता 1
आपको मेरे से क्या जवाब चाहिए?
वो जो आप सुनना चाहते हो या वो जो सच है?
तो सच ये है की मेच्युरिटी इसे कहते है की गुस्से में कही हुई बात कोई मैटर नहीं करती है।
अगर रिलेशन अच्छा होता है तो तो गुस्से में आपने क्या कहा?
उसने क्या कहा ये आज नहीं तो कल एक पति पत्नी को समझ आ जाती है।
जिनको समझ नहीं आती है वो अलग हो जाती है।
जिनको समझ आ जाती है वो साथ रहते है।
ये अक्चवल सलूशन है जो आप सलूशन चाह रहे हो वो सलूशन नहीं है।
आप क्या चाह रहे हो?
खुद को बदलना चाह रहे हो?
अच्छा खुद को बदला जा सकता है।
हाँ बताता हूँ कैसे अपना जो भी काम धंधा कर रहे हो सब छोड़ दो तीन महीने के लिए या छह महीने के लिए कुछ जगह बताऊँगा वहाँ पर जाकर के बैठ जाओ सुबह से रात तक सिर्फ बैठना है, अपने थॉट्स को देखना है और जब वो गुस्सा ट्रिग्गर होता है उस पॉइंट पे देखना है कि एक अंदर सेन्सिएशन उठती है, वो सेंसेशन उठेगी।
बट आपको रियेक्ट नहीं करना है तो एक ऐसा पॉइंट आ जाएगा जहाँ पर जा करके आप उस पर्टिकुलर जगह पे अपने गुस्से को कंट्रोल कर पाओगे, बशर्ते आप उसी जगह पे रहो सब कुछ छोड़ छाड़ के वहाँ पे चले जाओ क्योंकि जैसे ही आप वापस आओगे वही हो जाएगा जैसे आप हो अंदर से अक्चवल में पिछले 30 साल से कुछ नहीं बदलेगा।
वक्ता 3
ह्यूमन मेडिटेशन डोएसन्त हेल्प सम टाइम्स।
वक्ता 1
मेडिटेशन हेल्थ अप टु ए सर्टेन एक्सटेंट बट शर्ते की आपको पता होगी मेडिटेशन होती क्या है?
वी यूज़्ड दीज़ वर्ड्स मेडिटेशन डू वी नो व्हाट मेडिटेशन इस क्या होती है मेडिटेशन?
ध्यान क्या होता है?
ध्यान करना होता है या ध्यान देना होता है।
दोनों ध्यान करते कैसे है, करने की चीज़ है ध्यान नहीं जैसे वक करो, समझ आता है खाना खाओ, समझ आता है ध्यान करो मतलब क्या करें ध्यान में।
ध्यान करने की चीज़ नहीं है।
अच्छे से समझ लो मेरी इस बात को ध्यान देने की चीज़ है।
ध्यान दो मेरी इन बातों पर या लाइफ के ऊपर दट इस मेडिटेशन।
ध्यान दोगे लाइफ पे तो लाइफ की बड़ी से बड़ी प्रॉब्लम का सलूशन निकाल लोगे?
नहीं दोगे तो फालतू के क्वेश्चन्स पूछोगे फालतू के क्वेश्चन्स क्या होते हैं जो आप इधर उधर जा करके पूछते हो या मेरे से भी बहुत लोग पूछते हैं की सर ऐसा कैसे हो कि हमारी ओवर थिंकिंग बंद हो जाए?
आप मुझे बताओ आपको क्या बनना है?
सड़कों पे जाओ आपको बहुत सारे ऐसे जानवर बैठे हुए दिखेंगे।
शॉक के बीच में बैठे हैं आप?
हॉर्न बजाओ, आप कुछ भी करो।
वो हिलेंगे ही नहीं अपनी जगह से उन्हें फरक ही नहीं पड़ता।
ऐसे बनना चाहते हो क्या?
ओवर थिंकिंग छोड़ो थिंकिंग भी नहीं है तो वापिस से जानवर बनना चाहते हो।
या ऐसा इंसान बनना चाहते हो कि लाइफ में कोई भी प्रॉब्लम आए, कैसी भी आए, किसी भी लेवल की आए, उसका ऐसे सलूशन निकाल दो?
तो ऐसे कैसे बनते है ये पूछो इट इस नॉट वेरी डिफिकल्ट जो मैएंड को समझता है इंसान वो इंसान आपको बड़ी आसानी से ले जा सकता है।
कुछ सेकण्ड्स के अंदर अंदर आई कैन टेक यू इन ए थॉटलेस स्टेट इन सेकण्ड्स अभी देखना है डेमो देखना है।
अपने आप से एक सवाल पूछो सिंपल सा आँखे बंद नहीं करनी है, ध्यान देना है ध्यान करना नहीं है।
ध्यान से अपने आप से क्वेश्चन पूछो, देखता हूँ मैं अभी इस वक्त अपने अंदर अपने आप को क्या बोल रहा हूँ या क्या बोल रही हूँ।
नथ्थिंग मिस्टेकल अबाउट इट जैसे हम बोलते हैं अभी मैं बोल रहा हूँ आप भी बोलते हो बोलते रहते हो ना सुबह से रात तक ऐसे ही हम अपने अंदर भी तो बोलते हैं ना?
देखो क्या बोल रहे हो अपने अंदर अभी इस वक्त?
जैसे बाहर हल्की से आवाज हुई उसके बारे में बोला ना।
तो कैसे नहीं हो रहा की बीच बीच में कुछ बोल रहे हो?
यानी की सोच रहे हो और बीच बीच में कुछ नहीं बोल रहे हो।
येस?
इसको थॉट लेस्सते बोलते है।
इसमें क्या मिस्टेकन्ल है और कितने सालों की प्रैक्टिस लगी यहाँ तक पहुंचने में?
देर इस नो थॉट विथाउट ए वर्ड।
वर्ड इस थॉट वर्ड गिवेन टु ए पर्सन ऑर ए थिंग इस कॉल्ड थॉट बट ए प्रॉब्लम क्या है कि इस स्टेट में आप कितनी देर रह सकते हो?
1 मिनट 2 मिनट 10 मिनट चलो मान लो 24 घंटे पे रह लिए बट ये सब कुछ देर के लिए ठीक है, कुछ दिनों के लिए ठीक है?
वो भी तब जब आप अपनी लाइफ की जो बेसिक प्रोब्लम्स है, उसकी सोलूशन्स थॉट्स से निकाल चूके हो और अब आपको उस थॉट की जरूरत नहीं है, तब इसकी जरूरत पड़ेगी।
जब आप इतने इंटेलीजेंट हो जाओ इंटेलीजेंट का मतलब क्या की लाइफ में जो भी करने लायक है वो सब कर सको तो एक ऐसा पॉइंट आएगा जब जा करके जो इंटेलीजेंस है ये आपके लिए किसी काम की नहीं है क्योंकि आपको अपने सर्वाइवल की टेंशन नहीं है।
आपको पैसे की टेंशन नहीं है, आपके पास में कंफर्टब्ल लाइफ है, एक अच्छा रिलेशन है, सब कुछ सही है, अपनी हेल्त को भी आपने मेंटेन कर लिया है।
एक पर्टिकुलर लेवल तक क्या करोगे थॉट किस लिए चाहिए होता है कुछ करने के लिए।
थॉट दो तरीके का होता है एक होता है यूज़लेस थिंकिंग, जो लूप में गोल गोल गोल गोल घूमती है, जिसका कोई मतलब नहीं है, कोई एंड नहीं है।
इतना आपको पता होना चाहिए की वो थॉट जो भी आपके मैएंड में चल रहा है, वो सोचने से कुछ होगा या नहीं होगा।
उसको सोचने का कोई फायदा है या नहीं है?
अगर फायदा नहीं है फिर भी आप सोच रहे हो तो आपको मेडिटेशन की जरूरत नहीं है।
आप बेवकूफ हो पहले अपनी समझदारी पे काम करो, इतनी सी बात को मेरी समझो की जो फालतू की चीजें सोचते हो वो सोचना बंद करो और जो काम की चीजें हैं वो सोचना शुरू कर दो।
इसको दूसरे तरीके से बोलूं तो जब काम की चीजें सोचना शुरू कर दोगे तो फालतू की चीजें सोचने के लिए टाइम ही नहीं बचेगा।
इतना पता है कि क्या काम का है क्या फालतू का है।
तो अगर आप बिज़नेस कर रहे हो तो बिज़नेस में काम का क्या है और फालतू का क्या है?
फालतू का है कि एक प्रॉब्लम को डाइरेक्टली ना देखना इनडरेक्टली देखना के उसमें बहुत सारे कॉन्सेप्टस घुसा देना की मेरा ये बिज़नेस है उसमें ये वो वो ये वो ये पूरा एक खिचड़ी बना देना अपने मैएंड में और उसमें गोल गोल गोल गोल घूमते रहना उससे क्या होगा?
उननेसेसरी जो काम होना चाहिए यानी की बिज़नेस में प्रॉफिट आना चाहिए, वो नहीं आएगा।
बाकी सब कुछ हो जाएगा।
थियरोटिकल्ली इंटेलेक्चुअल स्टिमुलेशन हो जाएगा।
बैठ करके कुछ भी कॉन्सेप्टस बनाते रहो और वर्ड्स में ही खोए रहो।
दोज़ वर्ड्स कुड बी डिस्ट्रक्शन दोज़ वर्ड्स कुड बी पेशेंट्स ये सबका प्रॉफिट से क्या करेक्शन है?
सीधा पॉइंट पे आओ ना प्रॉफिट।
बिज़नेस का दूसरा मतलब क्या है?
प्रॉफिट प्रॉफिट कैसे होगा?
उसमें आ जाओ और वहाँ पे ओवर थिंकिंग करो, दिमाग लगाओ कैसे होगा?
तो वॅन्स वी अरे क्लियर विथ दट कि इन दोनों में से कौन सा काम का थॉट है और कौन सा काम का नहीं है।
काम का मतलब क्या एक प्रॉब्लम है उसका सलूशन निकाल लो फ्यूचर से रिलेटेड कोई एन्क्साइटी हो रही है मैएंड में तो थिंक अबाउट इट क्यों हो रही है?
क्या हो रही है?
मान लो आपकी शादी हो गई है, बच्चे हैं।
अब आपको ये टेंशन हो रही है कि कल को मुझे कुछ हो गया या मेरे हज़्बंड को कुछ हो गया तो बच्चों का क्या होगा?
तो अपनी इन्षुरेन्स करालो मर तो सकते ही हो अब मेरे से क्या एक्सपेक्ट करते हो मैं यहाँ पे आ करके आपको ये बोलूं कि नहीं नहीं ये सब मत सोचो क्यों सोचते हो चुप चुप बोलो ना?
अरे क्यों मरोगे?
अभी तो तुम्हारी उम्र ही क्या है?
तुमसे छोटी छोटी उम्र के बहुत लोग मर रहे हैं।
तो कोई भी मर सकता है, कभी भी मर सकता है तो उसका सलूशन निकाल लो।
आपको पता होना चाहिए की अच्छा क्या होगा, कैसे होगा?
उसकी प्लानिंग कर लो बेसिक सी।
अब इसमें क्या होगा?
जब शुरू शुरू में इस तरीके की एप्रोच आप पकड़ोगे तो आपके आसपास वाले लोग थोड़ा सा अनकम्फ़र्टेबल होंगे।
धीरे धीरे उनको आदत हो जाएगी कि ये तो थोड़ा अलग है इंसान।
हम लोगों से यार जो भी नॉर्मल सो कॉल्ड लोग होते हैं उनसे।
वक्ता 2
सर इस सेन्टेन्स में कितनी सच्चाई है और या फिर इसके साथ रहना चाहिए?
जस्ट गो विथ दी फ्लो लो कहते हैं कि जैसा हो रहा है ना होने दो जस्ट गो विथ दी फ्लो।
वक्ता 1
बिल्कुल बकवास बात है बहुत बकवास हाँ, इससे बकवास कोई बात हो ही नहीं सकती।
गो विथ दी फ्लो इस वक्त जो यंग जेनरेशन है यानी स्कूल कॉलेज के बच्चे हैं।
दे अरे ऑल गोइंग विथ दी फ्लो एंड व्हाट इस दी फ्लो सोशल मीडिया इस दी फ्लो।
येस।
इंस्टाग्राम इस दी फ्लो रील्स इस दी फ्लो कंपॅरिज़न इस दी फ्लो फ्लो कहाँ पर है इमिटेशन कंपॅरिज़न जीलसी टाइम पास करना, टाइम को किल करना इन्स्टंट ग्रेटिफिकेशन ये है फ्लो एक बच्चे को छोड़ दिया जाए उसके हालात पर और बच्चे को बोला जाए गो विथ दी फ्लो तो बच्चा कहाँ जाएगा जहाँ उसको मज़ा आता है।
उस मज़े की वजह से क्या होगा?
वो फंस जाएगा जहाँ से भी उसको मज़ा मिल रहा है।
चाहे वो कोई चीज़ हो, चाहे कोई इंसान हो, उसके ऊपर वो डिपेंड हो जाएगा।
जहाँ से भी थोड़ा सा भी पेइन मिल रहा है उन सब से वो कट जाएगा और जो भी उसके अपने होंगे वो उसको सही रास्ते पे लाना चाहेंगे तो वहाँ से पेइन मिलेगा।
इन ऑदर वर्ड्स क्या हुआ?
उस बच्चे के साथ में पेरेंट्स से कट गया और फालतू के जो लोग हैं, उनसे जुड़ गया तो क्या हुआ?
गो विथ दी फ्लो व्हाट इस गो विथ दी फ्लो समझे।
इसका एक दूसरा एक्स्ट्रीम भी है।
वो क्या है?
चेंज ऑफ़ फ्लो मतलब क्या पूरी दुनिया को बदल के रख देंगे?
आज के बाद ना मैं ये मोबाइल को स्विच ऑफ करके अंदर रख दूंगा या अंदर रख दूंगी।
मैंने ये वीडियो देख लिया।
अब मैं मोटीवेट हो गया हूँ, आज के बाद इसको हाथ भी नहीं लगाऊंगा।
मैं ये क्या हुआ?
एक एक्स्ट्रीम से जहाँ आपको ऐडिक्शन है मोबाइल से 6 घंटे तक टाइम पास कर रहे हो।
अब कह रहे हो मैं 1 मिनट भी हाथ नहीं लगाऊंगा।
उसके बाद में उस थॉट पे टिके एक घंटा दो घंटा।
ये भी मैंने ज्यादा बोल दिया।
उसके बाद में फाड़ फलाए और जा करके मोबाइल निकाल करके ले आए तो क्या हुआ?
आपको ना तो फ्लो के साथ जाना है ना फ्लो को बदलना है।
यू कैन नॉट चेंज दी फ्लो यू कैन जस्ट वर्क ऑन यूरसेल्फ़ और खुद की लाइफ में देखना है।
प्रॉब्लम की जड़ क्या है?
जड़ ये है की आपके पास में ढंग का कुछ करने के लिए है नहीं, ये अगर है भी तो आपको पता नहीं है की वो काम करेगा या नहीं करेगा।
दो स्टेजेस आ गए।
अगर ध्यान से देखोगे तो इन दो केटगॉरीज़ में आप मेजोरिटी ऑफ़ पापुलेशन को डिवाइड कर सकते हो या यहाँ पर भी जो लोग बैठे हैं उनको भी हम इन दो केटगॉरीज़ में डिवाइड कर सकते हैं?
एक कैटेगरी है जिनको पता ही नहीं है कि उनको लाइफ में करना क्या है तो व्हेन दे विल गो विथ दी फ्लो तो वो क्या करेंगे वो मुझे बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि उनके पास में कोई गोली नहीं है तो वो कहीं ऐसी किसी जगह पे जा करके फंस जाएंगे।
जो उन्हें खुद भी नहीं पता है की वहाँ से निकलना कैसे है।
धीरे धीरे वो आलसी होते चले जाएंगे।
धीरे धीरे वो ऐसे हो जाएंगे कि वो खुद को कभी बदल ही नहीं पाएंगे।
क्यों?
क्योंकि उनको पता ही नहीं है की उनको करना क्या है?
दूसरे है जिनको पता है की उनको क्या करना है, ये उनसे भी ज्यादा खतरनाक है।
क्यों?
क्योंकि मुझे पता है मुझे क्या करना है।
मुझे कोई कुछ नहीं बताएगा तुम कौन होते हो, मुझे बताने वाले दिमाग बंद पड़ा है।
करना क्या चाहिए?
आपको पता होना चाहिए आपको क्या करना है लेकिन उसके लिए जो भी करना पड़ेगा वो सीखने के लिए हमेशा अपने दिमाग को खुला रखना है।
अब अगर तो वो जो कर रहा है वो सक्सेस के लिए जो करना पड़ेगा उससे अलाइनेड है उसके ऐक्शन्स तब तो ये बहुत अच्छा है रास्ता बट अगर वो अलाइन नहीं है, उसके पास में कोई गाइड नहीं है और फिर भी वो वॅन पॉइंटेड फोकस के साथ में गोल की तरफ अक्ट करता चला जा रहा है या करती चली जा रही है।
देर इस ए स्ट्रांग पॉसिबिलिटी 19 9.99% चांस कि उसको सक्सेस नहीं मिलेंगे और जब वो फैल होगा तो उसका सब कुछ ही खो जाएगा जब वो फैल होगा।
तो इंसान पूरी तरह से अंदर से टूट जाएगा।
ये नहीं टूटेगा।
जिसने कुछ किया ही नहीं, वो तो विल्ला है, वो तो बोझ है अपने माँ बाप के ऊपर 30 साल का हो गया है लेकिन उसके माँ बाप आज भी उसको सुबह से रात तक यही बोल रहे है की जा बेटा कुछ कर ले।
30 साल का आदमी कुछ नहीं कर रहा है तो टूटेगा भी नहीं, क्योंकि इसको आदत हो गई है।
एक कान से सुनने की दूसरे कान से निकालने की खाने पीने की टेंशन है नहीं, घर की टेंशन है नहीं।
पिताजी की पेंशन आ रही है, बढ़िया लाइफ चल रही है तो अब ये क्लियर हुआ आपको ये जो दो केटगॉरीज़ है।
वक्ता 4
जो आपने अभी दो कैटेगरी बताई ना तो मैं इस वाली कैटेगरी का हूँ जो खतरनाक कैटेगरी है जिसमे लोग मतलब मुझे पता है की मुझे क्या करना है।
ठीक है, दट।
मैंने 4 साल जॉब की कॉर्पोरेट छोड़ दिया अभी लास्ट मंथ डे और इसी के मतलब जॉब का जो मेरा लास्ट ईयर था तभी मैंने सोच लिया था की मुझे अपना खुद का बिज़नेस डालना है।
ठीक है तो मैं अभी इन्षुरेन्स बैकग्राउंड से हूँ तो मैंने अपना खुद कई लोन इन्षुरेन्स इंडस्ट्री का स्टार्ट कर दिया है तो हर कोई बोलते है की आप अगर इसको एक्सपैंड करना है तो आप बिज़नेस लोन ले लो या फिर फंडिंग उठाओ, ये कर लो वो कर लो ठीक है इनीशियली अब ये तो इधर से आ रहा है।
इसके अलावा अगर हम घर पे जा रहे है तो घर पे अपने फैम्ली के होते है की शादी कर ले तू 26 साल का हो गया है ठीक है फिर उसके बाद आई ऍम इंट्रीब्यूटर मतलब फैम्ली में मैं ही कंट्रिब्यूट करता हूँ ज्यादा ठीक है तो अब वहाँ से वो इ एम आई के इश्यूस भी होते है की हम वहाँ घर पे जाके उसपे फोकस करे इधर से क्या आ रहा है की आप बिज़नेस पे फोकस करो वहाँ से लोन लो ये वो तो बहुत स्पोर्ट्स क्रियेट हो जाती है, की ज्यादा अडवाइस भी ना हमारे लिए थोड़ी सी हार्मफुल है, तो वो भी एक क्लैरिटी मिलना ना वो भी थोड़ा डिफिकल्ट है।
वक्ता 1
अभी आपने जो बोला उसमें बहुत सारे अलग अलग पॉइंट्स आपने टॅच कर दिए है।
जैसे एक आपने बात करी इ एम आई की तो अगर आपने जॉब छोड़ दी है अभी अपना बिज़नेस करने के बारे में सोच रहे हो तो बिज़नेस से एकदम से तो पैसा आएगा नहीं।
वक्ता 4
नहीं, मैंने ऑलरेडी स्टार्ट कर दिया है, मुझे आ रहा है वहाँ पे अच्छा इन्कम।
वक्ता 1
आ रहा है रेवइन्यू आ रही होगी।
प्रॉफिट थोड़ी ना आ रहा हो।
प्रॉफिट कितना आ रहा है?
महीने का जितना जॉब से आ रहा था उससे ज्यादा आ रहा है उससे कम आ रहा।
वक्ता 4
है।
इक्वल इक्वल ही आ रहा है इसलिए मैंने ये डिसीजन।
वक्ता 1
किया।
इक्वल आ रहा है तो फिर इ एम आई का पॉइंट कहाँ से आया?
वक्ता 4
मतलब अब क्या है की अब मेरे पास दो सोर्स नहीं है।
मेरे पास सिर्फ एक ही सोर्स है।
वक्ता 1
पहले दो सोर्स थे।
वक्ता 4
एक जॉब, एक बिज़नेस ठीक है?
अब मेरे पास ये नहीं है।
मेरे पास सिर्फ ये है।
वक्ता 1
इन्कम कम हो गई, पहले से ओवरआल कम।
वक्ता 4
कम हो गई है राइट।
तो अब मुझे इसको अगर आगे एक्सपैंड करना है तो उसके लिए अब लोग बोलते हैं कि ये ले लो।
अब फिर मैं एक और इ एम आई ले लूँगा उसके चक्कर में कि मेरे को ये बिज़नेस स्टार्ट करना है और इसको एक्सपैंड करना है।
फिर इसके अलावा आप जब घर
वक्ता 1
जाओगे, ऐसा कौन बोलता है कि आप लोन ले लो इस बिज़नेस को बढ़ाने के लिए?
क्योंकि जहाँ तक मैं इस बिज़नेस को समझता हूँ, जो आप टर्म इन्षुरेन्स वाले बिज़नेस की बात कर रहे हो, आपने क्या करा होगा?
आपने किसी ना किसी इन्षुरेन्स कंपनी?
की एजेंसी ली होगी।
यानी मतलब यू मस्ट बी एन इंडिपेंडेंट एजेंट वर्किंग फॉर एन इन्षुरेन्स कंपनी राइट इंडिपेंडेंटली आप काम कर रहे हो राइट तो इसमें लोन क्यों लेना है और पैसा क्यों लगाना है इस काम में?
वक्ता 4
अभी क्या है ना अभी ये सिर्फ स्केल करने के लिए अभी जब मैं मेरा जो भी इन्कम आ रहा है वो एक्वाली आ रहा है।
मतलब हर महीने 4050 थाउज़न्ड रूपीस जब मेरे बिज़नेस से आ रहा है मेरे को, लेकिन इसको स्केल करने के लिए आगे बढ़ाने के लिए।
वक्ता 1
नहीं नहीं नहीं अभी प्रॉब्लम कुछ और है।
मैं बताता हूँ प्रॉब्लम क्या है।
प्रॉब्लम ये है की आपने कुछ ऐसे लोगो की वीडियो देखली है, पॉडकास्ट देख लिया है, शार्क टैंक ज्यादा देख लिया है तो वो सब देखने की वजह से आपके दिमाग में कुछ ऐसे कॉन्सेप्टस बैठ गए है।
बिज़नेस से रिलेटेड की अगर बिज़नेस को बढ़ाना है तो हमें पैसा चाहिए, फंडिंग चाहिए, लोन चाहिए, ये चाहिए वो चाहिए।
ये सब बकवास है।
अक्चवल जो बिज़नेस होता है उसके लिए ये सब नहीं चाहिए होता है।
अननेसेस अंटिल यू अरे क्रियेटिंग ए वेरी बिग स्टार्ट अप जहाँ पे की इनीशियली 245 साल तक पैसा बर्न होने वाला है और उसके बाद में 5 साल बाद जाके रेवइन्यू आएगी फिर प्रॉफिट आएगा।
अभी आप क्या कह रहे हो?
आप एक ऐसा बिज़नेस कर रहे हो, जो आज की डेट में भी प्रॉफिटेबल है तो आपको लोन नहीं चाहिए, आपको फंडिंग नहीं चाहिए, उसको क्या करोगे?
अगर आपको बिज़नेस को एक्सपैंड करना है तो आपको बेसिक्ली ये क्रॅक करना है की जीस भी तरीके से आप मार्केटिंग कर रहे हो।
उसमें अपनी जो रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट है, उसको कैसे बढ़ाया जाए?
यानी की अगर आप एक एक्स अमाउंट खर्च कर रहे हो कैग पे यानी कस्टमर अक्कूज़ीशन कॉस्ट पे आप एक पर्टिकुलर अमाउंट स्पेंड कर रहे हो वो आपको कैलकुलेट करना होगा।
अभी कितना स्पेंड कर रहे हो और मान लो वो अभी आप स्पेंड कर रहे हो ₹1000 जहा पे जा करके एक कस्टमर आपके पास में आता है।
जो अभी इमीडियेट बिज़नेस देता है मान लो ₹5000 का, जिसमे से 20% आपको मिल जाता है 1000 लगाया 1000 मिला तो अब दिमाग ये लगाना है क्या?
1000 लगा करके या 500 लगाकर के 20,000 आ सकता है।
अगर ये क्रॅक कर लेते हो तो रेवइन्यू तो फाइव एक्स हो गई ना?
वक्ता 4
एग्ज़ैक्ट्ली।
वक्ता 1
तो अगर अभी आप महीने का ₹50,000 कमा रहे हो तो 2,50,000 पे पहुँच गए अब 2,50,000 खर्च होके कैसे ये?
क्योंकि खर्चा तो आपने कम कर लिया आप समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हूँ तो बिज़नेस में वैसा नहीं चाहिए होता है जैसा इधर उधर दिख रहा होता है।
अक्चवल जो बिज़नेस होता है उसमें आपको ये क्रॅक करना होता है।
कि किस तरीके से कम से कम कॉस्ट में आपके पास में ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स आ पाए।
जैसे बिज़नेस की जो मेरी अंडरस्टैंडिंग है अगर उसको मेरे को आपको शार्ट में बताना हो कि इसमें आपको क्या चाहिए, कैसे करोगे?
इसको क्रॅक?
तो जो आपके एग्ज़िस्टिंग कस्टमर्स है अभी कितने है एग्ज़िस्टिंग कस्टमर्स आपके क्योंकि अगर आप कह रहे हो मैं बहुत कमा रहा हूँ तो बहुत कस्टमर्स भी होंगे।
वक्ता 4
अभी महीने के 4050 हो जाते है।
वक्ता 1
और ये काम कब से कर रहे हो आप?
वक्ता 4
लास्ट वॅन ईयर से जॉब के साथ साथ।
वक्ता 1
अब तक टोटल कितने कस्टमर्स है?
वक्ता 4
100 प्लस।
वक्ता 1
एक महीने के 4050 और 100 प्लस ये।
वक्ता 4
कैसे हुआ है?
अभी स्केल हुआ है अब ये स्केल।
वक्ता 1
हुआ है।
अभी 4050 हो रहे है पहले।
वक्ता 4
पहले तो बहुत कम था, जब स्टार्ट किया था तो 1015 या फिर जीरो भी था।
वक्ता 1
तो अगर अभी आपके पास में 100 कस्टमर्स है, ये 100 वो कस्टमर्स है जिन्होंने आपसे कोई ना कोई टर्म इन्षुरेन्स कराई है।
वक्ता 4
हाँ कुछ ना कुछ करते रहते है जैसे हेल्त ले लिया लाइफ सब कुछ है।
वक्ता 1
एवरेज टिकेट साइज क्या है?
वक्ता 4
1015 थाउज़न्ड।
वक्ता 1
1015 थाउज़न्ड तो 100 कस्टमर इनटू 10 थाउज़न्ड।
यानी आप अब तक 10,00,000 का बिज़नेस जेनेरेट कर चूके हो।
वक्ता 4
इसका कमिशन आता है ना?
बिज़नेस में से ज्यादा दे दिया है लेकिन हमें तो 15% ही मिलता है ना।
एस एन एजेंट 1525% ही मिलता है तो प्रॉफिट एबिलिटी इसके साथ साथ मेरा लोन का भी है।
ठीक है।
तो हम लोन में भी हैं तो सब कुछ अपनी वेबसाइट की कॉस्टिंग हटाके उन लोगों की सैलरी हटा के तब आपको मैं बता रहा।
वक्ता 1
हूँ तो जो आप ₹10,000 कह रहे हो वो ₹10,000।
आपका कमिशन है या उतने की, उन्होंने इन्षुरेन्स आपसे कराई है?
वक्ता 4
एवरेस्ट टिकेट साइज है वो कमिशन तो 5000 हुआ ना।
वक्ता 1
कमिशन इस ₹1500 1500 इनटू 100?
तो अब तक इस बिज़नेस से आपने डेढ़ लाख रुपए कमाया है।
उसमें तीन बन्दों की सैलरी भी आप निकाल पा रहे हो।
वक्ता 4
हाँ, निकाल लेता हूँ अभी क्या है ना की स्केल हो रहा है तो कभी कभी कम भी होता है, कभी ज्यादा भी होता है तो बिल्कुल ये नहीं है की कंसिस्टेंटली आ रहा है।
इसी महीने लोन का बिज़नेस ज्यादा होता है।
किसी महीने इन्सुरेंस का ज्यादा होता है।
वक्ता 1
तो आपको पहले जो आपका बिज़नेस मॉडल है उसको।
अच्छे से क्रॅक करना होगा।
इन दी सेंस के आपको ज्यादा कस्टमर्स नहीं चाहिए।
ये जो पर्टिकुलर बिज़नेस है, आपका उसमें आपको ये चाहिए की जो एग्ज़िस्टिंग कस्टमर्स है उन्हीं को आप क्रॉस सेल्लिंग कैसे कर सके?
वो तब होगा जब उनको आपके ऊपर ट्रस्ट होगा।
तो अब उस रिलेशनशिप को बिल्ड करने के लिए ऐसा क्या कर सकते हो जहाँ पे खर्चा जीरो है लेकिन रिटर्न बहुत ज्यादा है।
अब इसमें फंडिंग कहाँ से आई, इसमें लोन कहाँ से आया, इसमें इ एम आई कहाँ से आई या इ एम आई बीच में आ रही है तो जीस भी चीज़ की इ एम आई है आई ऍम अस्यूमिंग गाड़ी की होगी।
वक्ता 4
गाड़ी की है।
वक्ता 1
तो अगर वो प्रॉब्लम कर रही है और एक तरफ से आपको बिज़नेस भी बिल्ड करना है।
तो गाड़ी को बीच में से हटाना होगा ताकि वो प्रेशर हटे।
वक्ता 4
समझ गया।
वक्ता 1
थिस इस पार्ट ऑफ़ प्लानिंग।
इम्पोर्टेन्ट क्या है कि आज आपके पास में गाड़ी रहे लेकिन बिज़नेस लॉन्ग टर्म में ना चल पाए या फिर गाड़ी हट जाए?
लेकिन बिज़नेस लॉन्ग टर्म में इतना ग्रो कर जाए कि एक क्या 100 गाड़ियां आ जाए?
100 तो ज्यादा हो गया, चार गाड़ियां आ जाए।
तो वही मैंने कहा ना की आप इस कैटेगरी में हो यानी की आप ये दूसरी कैटेगरी में हो जहाँ पर आपको पता तो है।
मुझे क्या करना है, बट अभी तक ये नहीं पता है की उसको किस तरीके से करना है लेकिन गड़बड़ क्या हो रही है की आपको ये लग रहा है की मुझे पता है की इसको आगे एक्सपैंड करने के लिए क्या करना पड़ेगा और वो जो आपको लग रहा है वो अक्चवल में सच नहीं है।
वो किसी भी ऐसे इंसान के साथ बैठोगे जो अक्चवल में बिज़नेस को समझता है।
थोड़ी देर के अंदर अंदर पेपर पेन ले करके ऐसे ऐसे फैक्स उठा करके आपके सामने रख देगा आपके बिज़नेस के क्या आपके जो सारे प्रीकन्सिवेशन है वो टूट जाएंगे?
मतलब हवाई बातें सारी हट जाएँगी, एकदम ज़मीन पे आ जाओगे, उसको रियल बिज़नेस बोलते हैं।
बिज़नेस है गॉट नथ्थिंग टु डू विथ?
जैसा आपको लग रहा है ग्राउंड रियलिटी को समझ के उसके हिसाब से अक्ट करना होता है।
जैसे आपको क्या करना है की इस बिज़नेस में वो लोग जो सक्सेसफुल है और इस बिज़नेस में तो मज़े की बात क्या है की जीस भी इन्षुरेन्स कंपनी के साथ में आप जुड़े हुए हो उनकी बहुत सारी कॉन्फरेन्सस होती रहती है।
मीटिंग्स होती रहती है।
तो वहाँ पर आप जाते रहते होंगे, औरों से भी मिलते होंगे तो आप तो सबसे कनेक्टेड हो जहाँ पर सब एक दूसरे के साथ में इन्ट्राक्ट कर रहे हैं, सब एक दूसरे से सीख रहे हैं।
सीखने वाला होना चाहिए तो वहाँ पर तो आपको जा जा करके ऐसे जो लोग जो सक्सेसफुल हो रहे हैं वहाँ पर उनके साथ में जाना है, उनके पास में जाकर टाइम स्पेंड करना है।
किसी भी बहाने से थोड़ा बेशर्म बनना होगा।
मतलब मान लो किसी पर्टिकुलर सिटी में कोई रहता है तो आप अक्चवल में नहीं जा रहे वहाँ पे लेकिन उनको आपने फ़ोन किया कि अगले हफ्ते मैं वहाँ पर आ रहा हूँ।
आप हो ना तो क्या कहेगा?
नहीं हूँ मैं वो कहेगा आ जाओ घर आ जाओ।
लंच करते हैं तो वहाँ से हो सकता है आप कुछ ऐसा सीख जाओ जो वो एक चीज़ सीखोगे।
वो एक तरफ जो भी अपने मैएंड में बैठ करके सोच रहे हो वो सब एक तरफ बट ये सब काम अपने आप नहीं होता है, ओवर थिंकिंग से नहीं होता है, गोइंग विथ दी फ्लो से नहीं होता है।
करना पड़ता है।
तो हॅव ए सलूशन ओरिएंटेड मैएंड विथ वॅन पॉइंटेड फोकस।
इन ऑदर वर्ड्स जब भी आपके मैएंड में कोई भी कॅन्फ़्यूज़न होता है किसी भी तरह का कोई भी कॉन्फ़्लिक्ट होता है तो यू अरे नॉट इन फ्लो मतलब कोई कॅन्फ़्यूज़न नहीं होता है।
बिल्कुल क्लियर होता है कि अभी क्या करना है, कैसे करना है?
तो यू अरे इन ए स्टेट ऑफ़ नो उसको अचीव करना है।
वक्ता 2
सर पास से कैसे निकले अपने लाइक ओवर थिंकिंग में फ्यूचर तो बोल दिया पर पास्ट की कुछ चीजें हैं जिसका मैं ओवर थिंक करते हैं कि ये ग़लत हो गया या इसका क्लोज़र नहीं मिला तो उसे प्रेसेंट पे बहुत फर्क पड़ता है।
वक्ता 1
पहले आपको ये समझना होगा आप पास्ट में अक्चवल में हो भी या नहीं हो, क्योंकि आपका जो क्वेश्चन है।
उसमें क्या एम्प्लॉयड है की अभी आप पास्ट में हो और आपको पास्ट से निकलना है तो मेरा अगला क्वेश्चन आपसे ये होगा की क्या आप अक्चवल में पास्ट में हो?
फॉर एग्ज़ैम्पल आप किसी के साथ रिलेशनशिप में थे, शादी हुई, डिवोर्स हो गया।
अब अगर आप ये क्वेश्चन पूछ रहे हो की पास में से कैसे निकले?
तो मैं आपको जवाब दूंगा, डिवोर्स हो गया ना?
तो पास से तो आप निकल चूके हो हाँ अगर डिवोर्स नहीं हुआ होता तो ये क्वेश्चन उठता के वो जो पास्ट है जो अभी भी प्रेसेंट में हमारे साथ में है, उससे कैसे पीछे छुड़ाए?
पास्ट में आपके साथ में बचपन में कुछ गलत हुआ क्या भी हो रहा है?
नहीं तो अपा से निकल चूके हो।
बस इतना सा समझना है।
इफ यू अरे सयिंग पास से रिलेटेड ओवर थिंकिंग कैसे खत्म हो?
तो पहले आपको देखना होगा की क्या वो पास्ट?
जीसको हिंदी में भूत भी बोलते हैं।
क्या वो एक भूत है?
अगर भूत है तो उससे छुटकारा पाने का कोई तरीका नहीं है क्योंकि भूत है ही नहीं और कुछ भी करने की कोई जरूरत नहीं है।
बस ये सच को देख लेना है कि वो भूत है और छूट गए।
और अगर मेरी इतनी सी बात समझ आ गई तो अभी छूट गए, कल नहीं, परसों नहीं, 2 साल की मेहनत के बाद नहीं, कुछ टेकनिक नहीं दे रहा।
मैं आपको टेकनिक तब देता जब भूत होता कोई रास्ता नहीं बता रहा, मैं क्या कह रहा हूँ मेरी बात को ध्यान से सुनो, वही मैंने कहा ना ध्यान करना नहीं है, ध्यान करते रहो बैठे बैठे 10 साल तक की पास से फ्री होना है।
होके दिखा दो कोई इंसान जिसके ऊपर भूत चढ़ गया है उसको बोलो ध्यान कर बैठ करके कभी वो फ्री हो पाएगा या जब वो ध्यान करने बैठेगा तो वो भूत और ज्यादा उसके ऊपर चढ़ जाएगा।
कभी मेडिटेशन करी होगी तो मेरी बात समझ आ जाएगी।
मैं क्या कह रहा हूँ एक ऐसा इंसान जीसको गलतफहमी है की भूत है और उसको बिठा दो।
एक अंधेरे कमरे में ध्यान करने के लिए वो भूत और पावरफुल हो जाएगा उसके ऊपर।
इसको बोलते हैं मेडिटेशन के साइड इफेक्ट्स उसको करना क्या है?
कोई ध्यान नहीं करना है उसको ध्यान देना है किसी ऐसे इंसान की बातों पे जो आ करके उसको कह रहा है इधर बैठो, आराम से बात करते हैं, कहाँ है भूत दिखाओ?
कहाँ है वो पास दिखाओ वो है ही नहीं तब क्या करें यू गॉट दी ऑसर आई होप ये जो हमने डिस्कॅस किया आज ओवर थिंकिंग रिलेटेड टु फ्यूचर रिलेटेड टु पास्ट रिलेटेड टु वर्क बिज़नेस सारा कुछ कवर हो गया इसके अंदर विश यू ऑल दी बेस्ट।
Podcast Summary
Key Points:
ओवरथिंकिंग भविष्य की चिंताओं को लेकर एक ही विचार को बार-बार दोहराने से उत्पन्न होती है, जो चिंता और अवसाद का कारण बन सकती है।
व्यवसाय या किसी कार्य में जल्दी परिणाम न मिलने पर बार-बार रणनीति बदलना एक समस्या है, जिसकी जड़ योजना की कमी या अस्पष्टता है।
सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और मापदंडों के साथ मजबूत योजना आवश्यक है, न कि केवल धैर्य या जिद्दीपन।
सही मार्गदर्शन के लिए अनुभवी लोगों से सलाह लेना और उचित शोध करना जरूरी है, यह मान लेना कि कोई सही सलाह नहीं देता, गलत है।
जुनून (पैशन) और पेशेवर कार्य (प्रोफेशन) के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है; दोनों को अलग रखकर ही दीर्घकालिक संतुष्टि और सफलता मिल सकती है।
Summary:
यह संवाद ओवरथिंकिंग और व्यवसायिक निर्णय लेने में आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। वक्ता बताते हैं कि भविष्य को लेकर बार-बार एक ही नकारात्मक विचार को दोहराना चिंता और तनाव पैदा करता है। व्यवसाय के संदर्भ में, जल्दी परिणाम न मिलने पर बार-बार रणनीति बदलना एक समस्या है, जिसका मूल कारण खराब योजना या लक्ष्यों की अस्पष्टता है। सफलता के लिए एक स्पष्ट, मापने योग्य और समयबद्ध योजना आवश्यक है। साथ ही, अनुभवी लोगों से सलाह लेने और उचित शोध करने पर जोर दिया गया है। अंत में, जुनून और पेशेवर कार्यों के बीच स्पष्ट अंतर करना महत्वपूर्ण बताया गया है—जहाँ जुनून व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए है, वहीं पेशेवर कार्य बाजार की मांग के अनुरूप होना चाहिए। दोनों को अलग रखकर ही दीर्घकालिक सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
FAQs
ओवरथिंकिंग तब होती है जब हम एक ही विचार को बार-बार दोहराते हैं, खासकर भविष्य से जुड़ी चिंताओं को लेकर। यह विचारों का एक लूप बना देती है जो तनाव, चिंता और अवसाद का कारण बन सकता है।
बार-बार रणनीति बदलने से ध्यान भटकता है और आप किसी एक योजना पर टिक नहीं पाते। सफलता के लिए धैर्य रखकर योजना को पर्याप्त समय देना और उसका मूल्यांकन करना ज़रूरी है।
योजना बनाते समय स्पष्ट समयसीमा और मापदंड तय करें। यह निर्धारित करें कि कितने समय में क्या परिणाम मिलने चाहिए, तभी आप सही मूल्यांकन कर पाएंगे कि योजना सफल है या नहीं।
भविष्य की चिंताओं से निपटने के लिए, संभावित परिदृश्यों (सबसे अच्छा, मध्यम और सबसे खराब) के बारे में सोचें और उनकी योजना बना लें। इससे आपका मन स्पष्ट होगा और अनावश्यक सोच कम होगी।
उस क्षेत्र के अनुभवी लोगों से सलाह लें, जिन पर आप भरोसा कर सकें। किताबें पढ़ें और सफल लोगों के अनुभवों से सीखें। पूर्वाग्रह के बिना सलाह स्वीकार करने के लिए तैयार रहें।
पैशन वह है जो आपको पसंद है और आप अपने लिए करते हैं, जबकि प्रोफेशन में आपको ग्राहक की ज़रूरतों के अनुसार काम करना होता है। इन दोनों को अलग-अलग रखना सफलता के लिए ज़रूरी है।
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