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Girls School Hostel - Horror Stories in Hindi | Horror Stories in Hindi | Khooni Monday | E146

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Girls School Hostel - Horror Stories in Hindi | Horror Stories in Hindi | Khooni Monday | E146

यह कहानी निमिषा और मनीषा नामक दो छात्राओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल में रहती हैं। इस हॉस्टल की पाँचवीं मंजिल पर पाँच साल पहले एक लड़की की रहस्यमय मौत हुई थी, जिसके बाद से वहाँ उसके भूत के होने की अफवाहें फैल गईं और उस मंजिल को बंद कर दिया गया। एक रात, देर से पढ़ते हुए निमिषा को प्यास लगती है और वह कॉफी बनाने जाती है, जहाँ उसे एक अजीब और भयावह रूप में मनीषा दिखाई देती है। वह निमिषा को जबरदस्ती पाँचवीं मंजिल पर ले जाती है, जहाँ दीवार पर "10 दिसंबर" लिखा हुआ दिखता है। मनीषा, जिसकी आँखें सफेद हो चुकी हैं, निमिषा को बालकनी से कूदने के लिए मजबूर करने लगती है। एक आवाज से होश में आकर निमिषा भागने में सफल हो जाती है और कमरे में लौटकर देखती है कि मनीषा सो रही है। बाद में, जब निमिषा सब कुछ बताती है, तो मनीषा को एहसास होता है कि उस लड़की की मौत भी 10 दिसंबर को हुई थी, जिससे पुष्टि होती है कि भूत की कहानियाँ सच थीं। इस घटना के बाद दोनों ने उस मंजिल के बारे में बात करना बंद कर दिया, लेकिन वह भयानक रात आज भी उनके दिमाग में ताजा है।

Transcription

1333 Words, 6006 Characters

Hindi
गर्ल्स हॉस्टल निमिषा की सासे चढ़ी हुई थी और वो बुरी तरह हाफ रही थी। उसके बाल बिगड़ चूके थे। वो शीशे के सामने खड़ी खुद को देखकर अपने बाल वापस बाँधने की कोशिश कर रही थी। पर घबराहट के मारे वो कुछ नहीं कर पा रही थी उस रात। निमिषा ने पहली बार अपनी देर रात तक जगने की आदत का पछतावा किया। निमिषा को डर था कि कोई अभी भी उसका पीछा कर रहा है। इस बात की शुरुआत तब हुई जब मनीषा और निमिषा दोनों क्लास एयठत में एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे और हॉस्टल में रहते थे। जीस बोर्डिंग स्कूल में वो लोग पढ़ रहे थे। वो पढ़ाई लिखाई के लिए एक बहुत ही अच्छा स्कूल माना जाता था पर उस बोर्डिंग स्कूल के गर्ल्स हॉस्टल की कुछ अलग ही कहानी थी। 5 साल पहले नाइन्थ क्लास की एक सीधी साधी। और पढ़ाई में होनहार लड़की की उस बोर्डिंग स्कूल के गर्ल्स हॉस्टल के फिफ्थ फ्लोर में मौत हो गई थी। किसी को नहीं समझ आया था की वो लड़की मरी तो तुम्हारी कैसे टीचर्स और पेरेंट्स बताते थे की उस लड़की को ना तो डिप्रेशन था और ना ही कोई पढ़ाई का ब्रेशर पहले सबको लगा ये मर्डर है। लेकिन पुलिस को कभी कोई सबूत नहीं मिला, जिसकी वजह से ये केस बंद हो गया। पर साल दर साल धीरे धीरे एक अफवाह फैलने लगी कि अब उस फिफ्थ फ्लोर पर उस लड़की का भूत रहता है। इसलिए फिफ्थ फ्लोर को स्कूल अथॉरिटीज ने बंद कर दिया क्नॉइस जिसे हफ्ते में सिर्फ एक बार खुला जाता था ताकि उसकी सफाई हो सके। उस इंसिडेंट के करीब 5 साल बाद निमिषा और मनीषा उस हॉस्टल के एक रूम में शेयरिंग में रहने लगे। दोनों का रूटीन एक दम फिक्स्ड था। निमिषा पूरी रात जग कर पढ़ाई करती थी। और सुबह 7:00 बजे मनीषा को उठाकर सो जाती थी। फिर मनीषा ब्रेकफास्ट के टाइम तक पढ़ती रहती थी। मनीषा चश्मा लगाती थी और उसके हाथ में उसकी माँ का दिया हुआ एक काला धागा हमेशा बंधा रहता था। फिफ्थ फ्लोर की कहानियों को बाकी स्टूडेंट्स की तरह वो लोग भी ज्यादा नहीं मानते थे। क्नॉइस पर फिर भी वहाँ कोई नहीं जाता था। पर 10 डिसेंबर को कुछ ऐसा हुआ जिसकी मनीषा को कोई खबर भी नहीं थी। निमिषा रोज़ की तरह रात के साढ़े 12:00 बजे रूम में बैठकर पढ़ाई कर रही थी और मनीषा दूसरी तरफ करवट लिए सो रही थी। क्नॉइस? निमिषा का गला अचानक से सूखने लगा। वोडकर हॉल में कॉफी बनाने चली गई। पूरे हॉल में एकदम शांति थी। सब लोग या तो अपने कमरे में थे या सो चूके थे। उस हॉल में कोई नहीं था। बस कॉफी मशीन के गड़गड़ाने की आवाज आ रही थी। पर मशीन को स्विच ऑफ करने के बाद फिर से सन्नाटा छा गया। निमिषा कॉफी का मग लेकर पीछे मुड़ी और उसको अचानक झटका लगा, जिससे उसकी कॉफी छलक गई। उसने देखा कि मनीषा उसके पीछे ही खड़ी है अंधेरा ज्यादा होने की वजह से। उसकी आंधी ही शक्ल निमिषा को देख पा रही थी। उस रात मनीषा कुछ अलग सी दिख रही थी। उसने ना तो अपना चश्मा पहना था और ना ही उसके हाथ में वो काला धागा था। निमिषा ने मनीषा से पूछा कि वो इतनी जल्दी क्यों जाग गई जिसके जवाब में मनीषा ने बोला, जब ना हम दोनों फिफ्थ फ्लोर की बालकनी पर चले। ये सुनकर निमिषा की आँखें चौड़ी हो गई और मुँह पर हल्की सी शरारत भरी मुस्कराहट आ गई। इससे पहले की वो कुछ बोलती मनीषा उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ ऊपर सीढ़ियों पर ले जाने लगी। जब दोनों सीढ़ियों चढ़ रही थीं तो बस निमिषा की ही चप्पल की आवाज़ आ रही थी। उसने नोटिस किया कि मनीषा ने चप्पल भी नहीं पहनी थी। कुछ तो बहुत अजीब था। उस रात उस हॉस्टल के फिफ्थ फ्लोर का दरवाजा खुला हुआ था और वो दोनों फिफ्थ फ्लोर पर चले गए। वो पहले इधर उधर देखने लगे, फिर कुछ मिनट बाद दोनों ने। खुद को एक रूम में पाया। ये उसी लड़की का रूम था जो 5 साल पहले मर चुकी थी और जिसके बारे में लोग कहते थे कि उसकी आत्मा फिफ्थ फ्लोर पर भटकती है। लेकिन उस रूम के बारे में निमिषा या मनीषा दोनों ही नहीं जानते थे। उस रात मौसम बहुत ठंडा था। फिफ्थ फ्लोर के हलवे पर भरी खिड़कियों से ठंडी हवाएं आ रही थी और रात के अंधेरे में कोहरा जल रहा था। उसी बीच निमिषा की नजरें दीवार पर पड़ी। जीस पर किसी ने अपने नाखून से बड़ा बड़ा टेंथ दिसंबर लिखा हुआ था। क्नॉइस। दोनों बालकनी पर खड़े होकर नीचे देखने लगे। मनीषा बहुत देर से चुपचाप हो रही थी। निमिषा को बहुत जोरों से ठंड लग रही थी तो उसने मनीषा को नीचे चलने को कहा, लेकिन मनीषा ने निमिषा की बात पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। उसने फिर से मनीषा को पुकारने की कोशिश की। और तब पहली बार मनीषा ने उसकी आँखों में आंखें डालकर देखा। निमिषा के तो जैसे होश ही उड़ गए थे। मनीषा की आंखें पूरी सफेद हो चुकी थी। वो बड़ी धीमी आवाज में बोली यानी कूदो। निमिषा को कुछ समझ नहीं आया कि मनीषा। उसे नीचे कूदने को क्यों कह रही है? उसके चेहरे के सारे रंग उड़ गए। जैसे जैसे एक एक सेकंड बीत रहा था वैसे वैसे मनीषा की आवाज और भारी हो रही थी। वो निमिषा की आँखों में देखकर बार बार बोलने लगी। जाम, जाम, निमिषा का चेहरा। पीला पड़ गया और उसके हाथ पैर एक ही पोज़ीशन में अटक चूके थे मानो जैसे वो हिप्नोटाइज़ हो रही थी और ऐसा लग रहा था की जैसे अगर वो जम्प नहीं करती तो मिनिषा उसे धक्का देकर नीचे गिरा देगी। निमिषा की आँखें बंद होने लगी थी और वो खुद अपने बाल खोलने लगी क्नॉइस उसके बिखरे बाल हवा में पानी की तरह बहने लगे। निमिषा धीरे धीरे मनीषा के पक्ष में आने लगी थी, लेकिन तभी अचानक नीचे वाले फ्लोर पर कुछ दम से आवाज हुई और निमिषा होश में आई। उसने किसी तरह हिम्मत उठाई और मनीषा को पीछे धक्का देकर नीचे भागी क्नॉइस भागते भागते उसको अपने पीछे बहुत भयानक दहाड़ सुनाई दी और उसने पीछे भूलकर भी मुड़कर नहीं देखा। वो जल्दी से अपने रूम के अंदर घुसी और दरवाजा कसके से बंद कर लिया। उसने तफ्जू देखा वो देखकर? वो और चौंक उठी। उसने देखा कि मनीषा उसी करवट में बिस्तर पर आराम से सो रही थी जिसमें वो उसे छोड़कर गई थी। अपनी निशा का रंग और पीला पड़ गया। उसने मनीषा को घबराते हुए उठाया। मनीषा ने उसका पीला मुँह और लाल आंख देखकर डरी हुई निमिषा को गले लगा लिया। पर उसके पूछने पर निमिषा ने उसे कुछ भी नहीं बताया। वो कुछ बताने की हालत में थी नहीं। उस रात निमिषा ने अपने बाथरूम के शीशे के सामने अपना मुँह धोया और बाल बांधकर सो गई। मनीषा कुछ समझ नहीं पा रही थी। उस दिन से निमिषा रात में सोने लगी और अपने रूम मेट को इग्नोर करने लगे। जब भी मनीषा रूम में बैठकर पढ़ाई स्टार्ट करती उसे एहसास होता कि जैसे कोई उसे घूर रहा है और वो अक्सर निमिषा ही होती। परेशान होकर मनीषा ने उससे दोबारा पूछ लिया कि उस रात क्या हुआ था? आखिरकार निमिषा ने मनीषा को उस रात के बारे में सब कुछ सच सच बता दिया। सब कुछ सुनने के बाद मनीषा का दिमाग ज़ोर से चलने लगा और उसे निमिषा की कहानी पर पूरा भरोसा हो गया क्योंकि मनीषा को ये बात पता थी कि 5 साल पहले। एक लड़की की सेम डेट पर मौत हुई थी। 10 दिसंबर मतलब जो भी किस्से, कहानी और अफवाह मनीषा और निमिषा सुनते आ रहे थे वो सब सच थी। वाकई में फिफ्थ फ्लोर पर उस लड़की का बूथ था। उन दोनों ने उस दिन के बाद से फिफ्थ फ्लोर के बारे में बात करना ही छोड़ दिया, लेकिन वो आज तक उस दिल दहला देने वाले किस्से को नहीं भूल पाए हैं।

Podcast Summary

Key Points:

  1. निमिषा और मनीषा एक बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल में रहती हैं, जहाँ पाँच साल पहले एक लड़की की रहस्यमय मौत हुई थी, जिससे भूत की अफवाहें फैलती हैं।
  2. एक रात, निमिषा को एक अजीब तरह की मनीषा मिलती है, जो उसे बंद पाँचवीं मंजिल पर ले जाती है और उसे कूदने के लिए मजबूर करने की कोशिश करती है।
  3. निमिषा बचकर भाग आती है और पाती है कि मनीषा सो रही है, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह घटना सच थी और उस लड़की की मौत की तारीख 10 दिसंबर थी।

Summary:

यह कहानी निमिषा और मनीषा नामक दो छात्राओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल में रहती हैं। इस हॉस्टल की पाँचवीं मंजिल पर पाँच साल पहले एक लड़की की रहस्यमय मौत हुई थी, जिसके बाद से वहाँ उसके भूत के होने की अफवाहें फैल गईं और उस मंजिल को बंद कर दिया गया। एक रात, देर से पढ़ते हुए निमिषा को प्यास लगती है और वह कॉफी बनाने जाती है, जहाँ उसे एक अजीब और भयावह रूप में मनीषा दिखाई देती है। वह निमिषा को जबरदस्ती पाँचवीं मंजिल पर ले जाती है, जहाँ दीवार पर "10 दिसंबर" लिखा हुआ दिखता है। मनीषा, जिसकी आँखें सफेद हो चुकी हैं, निमिषा को बालकनी से कूदने के लिए मजबूर करने लगती है। एक आवाज से होश में आकर निमिषा भागने में सफल हो जाती है और कमरे में लौटकर देखती है कि मनीषा सो रही है। बाद में, जब निमिषा सब कुछ बताती है, तो मनीषा को एहसास होता है कि उस लड़की की मौत भी 10 दिसंबर को हुई थी, जिससे पुष्टि होती है कि भूत की कहानियाँ सच थीं। इस घटना के बाद दोनों ने उस मंजिल के बारे में बात करना बंद कर दिया, लेकिन वह भयानक रात आज भी उनके दिमाग में ताजा है।

FAQs

वे दोनों एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे और उसी के गर्ल्स हॉस्टल में रहते थे।

पाँच साल पहले नौवीं कक्षा की एक लड़की की वहाँ रहस्यमय मौत हो गई थी, जिसके बाद भूत की अफवाह फैल गई और अधिकारियों ने इसे बंद कर दिया।

मनीषा के रूप में एक अजीब शक्ति ने निमिषा को फिफ्थ फ्लोर पर ले जाकर उसे कूदने के लिए मजबूर करने की कोशिश की, लेकिन एक आवाज से वह बच गई।

मनीषा चश्मा पहनती थी और उसके हाथ में हमेशा उसकी माँ का दिया हुआ एक काला धागा बंधा रहता था।

उसने दीवार पर किसी के नाखून से '10 दिसंबर' लिखा हुआ देखा, जो उस लड़की की मौत की तारीख थी।

वह रात में पढ़ने के बजाय सोने लगी और मनीषा को अनदेखा करने लगी, साथ ही अक्सर उसे घूरती रहती थी।

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