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Ghatotkachh - Part 2 - Bharat Ke Aslee Superheroes (Hindi Mythology Podcast)

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Ghatotkachh - Part 2 - Bharat Ke Aslee Superheroes (Hindi Mythology Podcast)

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2148 Words, 10083 Characters

English
जिन्हें राजपाट चलाने के लिए युधिष्ठिर से शिक्षा मिली हो और भीम ने जिन्हें युद्ध कला सिखाई हो, उनका बुद्धिमान होना और शक्तिशाली होना तो तय है। जिनके मार्गदर्शक यानी की गाइड खुद श्रीकृष्ण, जिन्होंने अपनी बुद्धि और शक्ति के बल पर ना सिर्फ युद्ध जीते बल्कि दिल भी जीते। ये कहानी हैं एक ऐसे ही असली सुपर हीरो घर की भारत ओरिजिनल प्रोड्यूस बीएनके प्रोडक्शन्स। घटोत्कच की कहानी में अब तक आपने सुना की कैसे? लाक्षागृह की घटना के बाद पांडव अपनी माँ कुंती के साथ जंगलों के रास्ते हस्तिनापुर से दूर जा रहे थे। कैसे भीम की मुलाकात हिडिंबा से हुई और फिर कैसे? कुन्ती के समझाने पर वो हिडिंबा से शादी करने के लिए तैयार हो गए। हिडिम्बा ने एक बहुत शक्तिशाली बेटे को जन्म दिया जिसका नाम घटोत्कच रखा गया। साथ ही आपने सुना कि क्यों पांडव हिडिंबा और घटोत्कच को छोड़कर अपने आगे के सफर पर निकल गए और कैसे घटोत्कच की माँ ने उन्हें जंगलों में बड़ा किया? अब आगे घटोत्कच जब बड़े हुए तो जंगलों में उनका राज्य भी बढ़ने लगा। भले ही वो धर्म के रास्ते पर चलते थे लेकिन जंगलों के रीती रिवाज भी उन्हें मान्य होते थे। ऐसे में 1 दिन हिडिम्बा ने माँ काली की पूजा की। ऐसा नियम था कि इस पूजा के बाद नरबलि दी जाती थी यानी ह्यूमन सैक्रिफ़ाइस दिया जाता था। इसीलिए हिडिम्बा ने अपने बेटे घटोत्कच से कहा कि वह इसके लिए किसी इंसान को लेकर आए। घटोत्कच अपनी माँ की बात सुनकर जंगल में किसी इंसान को ढूंढने निकल पड़े। रास्ते मेँ उन्हें एक परिवार दिखा जिसमें पति, पत्नी और उनके तीन लड़के थे। घटोत्कच ने उनसे कहा कि उन्हें नरबलि के लिए इस परिवार में से कोई एक सदस्य चाहिए तभी उनकी माँ की पूजा पूरी होगी। उनकी ऐसी बातें सुनकर वो परिवार घबरा गया। लेकिन वह जानते थे कि अगर उन्होंने घटोत्कच की बात नहीं मानी तो शायद पूरे परिवार की बलि दे दी जाएगी। इसीलिए उस परिवार में से पिता आगे आए और घटोत्कच से बोले की आप मुझे अपने साथ ले चलिए लेकिन तभी उनकी पत्नी ने आगे आकर कहा कि वो अपने पति को नहीं जाने देंगे। ये देख उस परिवार का बड़ा लड़का घटोत्कच के साथ जाने को तैयार हो गया। लेकिन उसके पिता ने कहा कि बड़े लड़के से उन्हें सबसे ज्यादा प्यार। इसलिए उसे ना ले जाया जाए। फिर जब छोटा लड़का आगे आया तो उसकी माँ ने कहा कि सबसे छोटे बेटे को मैं कैसे जाने दो? ये देख उनके मंझले बेटे यानी बीच वाले बेटे ने घटोत्कच से कहा कि वह उसे साथ ले जाएं क्योंकि बड़ा भाई पिता का प्यारा है और छोटा माँ का लाडला है। इस तरह वो ही बचता है जिसके पास ना तो पिता के प्यार की धूप है और ना ही माँ की ममता की छाव। इससे पहले कि उसके माता पिता कुछ बोल पाते तभी भीम उस जंगल से गुजर। उन्होंने जब उस दुखी परिवार और घटोत्कच को देखा तो वो समझ गए कि कुछ गडबड है। और जब उन्हें पूरी बात पता चली तो उन्होंने उस परिवार से कहा कि वह उनकी मदद करेंगे। वैसे घटोत्कच के जन्म के बाद से भीम उन्हें पहली बार देख रहे थे। इसीलिए ना तो वो उन्हें पहचान सकें और ना ही घटोत्कच। भीम को पहचान पाए भीम ने घटोत्कच से कहा कि तुम इस हंसते खेलते परिवार को छोड़कर मुझे अपने साथ ले चलो और फिर भी मैं उस परिवार के मझले बेटे को समझाया कि माता पिता के प्यार पर शक करना बहुत गलत बात है क्योंकि वो कभी बच्चों में भेदभाव नहीं करते। इसके बाद भीम ने खुद का उदाहरण यानी एग्जाम्पल भी दिया की वो भी अपने परिवार में मजले। और इसीलिए उन्हें पता है की माँ बाप अपने सब बच्चों को एक ही तरह प्यार करते। ये सब कहे कर भीम घटोत्कच के साथ चल पड़े। हिडिंबा का काली माँ का यज्ञ भी पूरा हो चुका था पर जब उन्होंने घटोत्कच के साथ भीम को देखा तो हिडिंबा की आँखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। घटोत्कच ये सब देखकर समझ नहीं पा रहे थे कि इस अजनबी के आने से माँ इतनी खुश क्यों? आखिर वो हैं कौन? थोड़ी देर बाद हिडिम्बा ने घटोत्कच को भीम के बारे में सबकुछ बताया। तो वो अपने पिता को देखकर बहुत खुश हुए। लेकिन भीम खुश नहीं थे। उन्होंने कहा कि वो किसी के पिता या पति नहीं। वो सिर्फ वहाँ बलि के लिए आए। हिडिंबा समझ गयी थी कि भीम गुस्से में हैं। उन्होंने भीम से माफी मांगते हुए कहा कि बलि की परंपरा तो सदियों से चली आ रही है। इतना सुनकर भीम ने उनसे पूछा कि क्या कभी माँ काली नहीं, किसी से बलि मांगी? धर्म तो हमारी जिंदगी को खुशहाल और अच्छा बनाने के लिए और किसी भी जीव को मारना और उसको इस तरह धर्म से जोड़ना कहाँ तक सही है? हिडिंबा को भी इनकी बात समझ आ गई और उन्होंने भीम से अपनी गलती के लिए माफी मांगी। भी इनकी ये बात घटोत्कच को भी समझ में आ गई और उन्होंने कहा कि अब से वो जंगल में कभी किसी की बलि नहीं देंगे। इतना सुनकर भीम ने उन्हें खुशी से अपने गले लगा लिया। इतने दिनों बाद भीम अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश थे। उन्हें इस बात की भी खुशी थी कि उनका बेटा बहुत शक्तिशाली है और उसका शरीर देखकर लगता है मानो वो लोहे से बना। घटोत्कच से कहा कि उनका शरीर उनकी माँ हिडिंबा के आशीर्वाद से बना है इसीलिए वो इतना मजबूत है। और फिर भीम कुछ दिनों तक अपने परिवार के साथ ही रहे। इस मुलाकात के बाद घटोत्कच भी इंद्रप्रस्थ आने जाने लगे और जंगल में घटोत्कच ने अप नाराज बहुत आगे तक बढ़ा लिया था, जिसका मतलब था कि उन्होंने अपनी एक बहुत बड़ी सेना भी तैयार कर ली थी। घटोत्कच इंद्रप्रस्थ जाकर अपने पिता भीम से तो मिलते ही थे साथ ही युधिष्ठिर से भी मिलते थे। युधिष्ठिर उन्हें बहुत पसंद करते थे और इसके बाद घटोत्कच को राजनीति की शिक्षा युधिष्ठिर से और युद्धनीति समझने में भी मदद करते थे। एक बार जब घटोत्कच इंद्रप्रस्थ पहुंचे तो श्रीकृष्ण भी वही थे। घटोत्कच का मज़ाकिया स्वभाव श्रीकृष्ण को बहुत पसंद आया। धीरे धीरे वो सभी पांडवों और श्रीकृष्ण के भी करीबी बन गए। एक बार युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि वो चाहते है की अब घटोत्कच की शादी की जाए। और इसके लिए कोई एक अच्छी लड़की ढूंढनी होगी। यह सुनकर श्रीकृष्ण ने कुछ देर सोचा और फिर उन्हें बताया कि वो एक ऐसी लड़की को जानते हैं जो घटोत्कच के लिए सही रहेगा। कुछ सालो पहले उन्होंने प्रागज्योतिषपुर के राजा नरकासुर और उसके भाई मोरा कुमारा था। मुरा को मारने के बाद से ही श्रीकृष्ण का एक नाम मुरारी भी पड़ गया था। जब श्रीकृष्ण ने मुरा को मार दिया तो उसकी बेटी मोरवी ने उन पर हमला कर दिया और वो उनसे बहुत बहादुरी से लड़ी। यहाँ तक की उसमें युद्ध में श्रीकृष्ण का धनुष भी तोड़ दिया था और उनके वाहन गरुड़ को भी चोट पहुंचाई थी। उनका युद्ध करीब तीन दिनों तक चला और आखिर में श्रीकृष्ण को मोरवी को मारने के लिए सुदर्शन चक्र निकालना पड़ा। तभी देवी कामाख्या वहाँ आयी और उन्होंने श्रीकृष्ण को बताया कि मोर भी उनकी सुरक्षा में है और इसीलिए श्रीकृष्ण उन्हें माफ़ कर दे, उसकी जान ना ले। और इसके बाद माँ कामाख्या ने मोरवी को समझाते हुए कहा कि उनके पिता लोगों को परेशान कर रहे थे और इसीलिए उनकी मौत तो होनी ही थी। मोरवी को उनकी यह बात समझ में आ गई और फिर उन्होंने श्रीकृष्ण से माफी मांगी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने पांडवों को बताया कि मोरवी को कामकंटकटा और अहिल्या वती के नाम से भी जाना जाता है और वो अपने चचेरे भाई राजा भगदत्त के यहाँ रहती और श्रीकृष्ण चाहते हैं कि घटोत्कच की शादी मोरवी से करवा दी जाए। वहाँ मौजूद सब लोग इसके बारे में सोचने लगे। लेकिन ये शादी इतनी आसान नहीं थी क्योंकि मोरवी ने अपनी शादी के लिए कुछ शर्तें रखी थीं। वो सिर्फ उसी से शादी करना चाहती थी जो उनको अक्ल और ताकत दोनों में हरा सके। मोरवी से हजारों राक्षसों देवताओं और इंसानों ने शादी करने की कोशिश की और वो उनको ना तो दिमाग में और ना ही लड़ाई में हरा पाए। यहाँ तक कि उनमें से बहुतों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। यह सुनकर युधिष्ठिर थोड़ा सा हिचकिचाये लेकिन भीम ने कहा कि घटोत्कच को मोरवी की शर्तों को पूरा करके उनसे शादी करनी चाहिए और श्रीकृष्ण को भी विश्वास था कि घटोत्कच बुद्धि और बल दोनों में मुर्गी को हरा सकते हैं। घटोत्कच ने सबका आशीर्वाद लिया और अब वो प्रागज्योतिषपुर जाने के लिए तैयार थे। जब घटोत्कच वहाँ राजमहल में पहुंचे तो बगीचे में बहुत से लोग काम कर रहे थे। वहाँ उन्होंने कर्ण प्रवरना नाम की स्त्री से मोरवी के बारे में पूछा। वो समझ गई कि घटोत्कच भी मोरवी से शादी करने आये हैं। वो घटोत्कच को समझाने लगी और बोली की मोरवी से शादी करने की कोशिश हजारों लोग कर चूके हैं और उनमें से कईयों ने अपनी जान भी गंवाई है। इसीलिए उन्हें मोरवी से शादी करने का ख्याल अपने मन से निकाल देना चाहिए। यह सुनकर घटोत्कच ने कहा कि वो अपने पिता के आदेश के हिसाब से चल रहे हैं इसीलिए या तो वो मोरवी से शादी करके वापस लौटेंगे या फिर मोरवी के हाथों मारे जाएंगे। करण प्रवण घटोत्कच को मोरवी के पास ले गयी। मोरवी की सुंदरता देखकर घटोत्कच को उनसे प्यार हो गया और मोरवी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। लेकिन फिर मोरवी ने खुद को सम्भालते हुए को चेतावनी यानी वॉर्निंग दी कि अगर वो जीना चाहते हैं तो उन्हें वापस चले जाना चाहिए। जब घटोत्कच जाने को तैयार नहीं हुए तो मोरबी ने कहा कि वो शादी की शर्तों को पूरा करें। घटोत्कच ने मोरवी से शादी की शर्तें पूछी? मोरवी बोली की पहली शर्त दिमाग वाली। उन्होंने कहा कि घटोत्कच उन्हें कोई एक ऐसी कहानी या घटना सुनाई जिसे सुनकर मोर उलझन में पड़ जाए यानी की कन्फ्यूज़ हो जाए। साथ ही वो बोली की अगर घटोत्कच उन्हें ऐसी कहानी नहीं सुना पाए तो मोरवी उन्हें खत्म कर देंगी। घटोत्कच ने श्रीकृष्ण को याद किया और कहानी सुनाना शुरू की। कहानी कुछ ऐसी थी कि एक बार एक देश में एक पति पत्नी रहते थे। उनकी एक सुंदर बेटी थी, लेकिन कुछ ही सालों में पत्नी की मौत हो गई और पति ने बेटी को पाल कर बड़ा की। जब बेटी बड़ी हो गयी तो उसके पिता ने अपनी बेटी से कहा की वो उसकी असली बेटी नहीं और उसने तो बस उस लड़की को पाला। इस तरह झूठ बोलकर उस आदमी ने अपनी ही बेटी से शादी कर ली। कुछ समय बाद उसकी बेटी को भी एक बेटी होगी। इतना कहकर घटोत्कच्छ चुप हो गए और उन्होंने मोरवी से पूछा की पैदा हुई लड़की उस आदमी की बेटी हुई या नातिन यानी ग्रैंडडॉटर? मोरवी को जवाब समझ नहीं आया और वो जवाब ढूंढने में उलझ गई। इस तरह घटोत्कच ने पहली शर्त तो पूरी कर दी थी। अब बारी थी दूसरी शर्त की यानी शक्ति दिखाने की। घटोत्कच ने मोरवी के बहुत से सैनिकों का सामना किया और उन सब को हरा दिया और फिर खुद भी तलवार लेकर घटोत्कच का सामना करने आये। दोनों में बहुत देर तक युद्ध होता रहा और आखिर में जीत घटोत्कच की है। इस सब के बाद इंद्रप्रस्थ में घटोत्कच और मोरवी की शादी बड़ी धूमधाम से हो। सभी पांडव, कुंती और श्रीकृष्ण इसमें शामिल हुए। लेकिन घटोत्कच की माँ हिडिंबा इस शादी का हिस्सा नहीं बन पाई क्योंकि उन्होंने कुन्ती के सामने प्रतिज्ञा ली थी कि वो कभी भी पांडवों की राजधानी में कदम नहीं रखेंगे। फिर चाहे वो हस्तिनापुर हो या इंद्रप्रस्थ। शादी के बाद घटोत्कच और मोरवी ने सभी से आशीर्वाद लिया और साथ ही श्रीकृष्ण को उन्हें मिलवाने के लिए धन्यवाद दिया। श्रीकृष्ण उनसे बोले की रिश्ते तो जन्म के साथ ही लिखे जाते हैं और उन्होंने तो उन दोनों को बस मिलवाया। इंद्रप्रस्थ में शादी करने के बाद घटोत्कच और मोरवी जंगल में हिडिंबा के पास गए और उनसे आशीर्वाद लें। हिडंबा अपनी बहू से मिलकर बहुत खुश थी क्योंकि उनका परिवार अब आगे बढ़ रहा था और जहाँ तक परिवार की बात थी, हिडिम्बा ने तो प्रतिज्ञा ली थी कि वो कभी पांडवों की राजधानी में कदम नहीं रखेंगे। लेकिन पांडवों की राजधानी से अभिमन्यु और सुभद्र घटोत्कच के पास आकर क्यों रहने लगे? क्यों घटोत्कच को लड़की का रूप लेने की जरूरत पड़ी? कैसे उन्होंने अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की शादी बलराम की बेटी से करवाई? साथ ही किस तरह घटोत्कच ने द्रौपदी और दूसरे पांडवों की मदद की और क्या कहानी है शतरंज के उस खेल की जिसे घटोत्कच और भीम खेला करते थे? ये और ऐसे कई सारे सवालों के जवाब जानने के लिए सुनते रहिए भारत के असली सुपर हिरोस स्पॉटिफाई ओरिजिनल हर दिन।

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