इस प्रकरण में श्रीमद्भागवतम कथा का सार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन है। कथा की शुरुआत में कार्तिक मास के महत्व और श्रवण की शक्ति पर बल दिया गया है। भगवान कृष्ण अपनी माता यशोदा से विवाह के बारे में पूछते हैं, और एक ज्योतिषी की बात का हवाला देते हुए बताते हैं कि उनकी दुल्हन पड़ोस में ही रहती है, जिससे माता को उनकी बाल सुलभ चेष्टाओं पर हंसी आती है। इसके बाद गणेश पूजा के दौरान कृष्ण और उनके सखा लड्डू खा लेते हैं, और दोष गणेश जी पर मढ़ देते हैं। दीप प्रज्ज्वलित करने की लीला में कृष्ण दीपों को पार लगाने की बात कहते हैं, जिससे यह सीख मिलती है कि भगवान उन्हीं की सहायता करते हैं जो उनकी ओर बढ़ते हैं। मिट्टी खाने की लीला में भगवान अपने मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराते हैं, जिससे माता यशोदा को उनके ऐश्वर्य का पता चलता है, परंतु योगमाया के प्रभाव से वे इसे भूल जाती हैं। अंत में, गर्गाचार्य द्वारा गुप्त रूप से नामकरण संस्कार किया जाता है, जिसमें बलराम जी को 'बलराम', 'संकर्षण' और 'शेष' जैसे नाम दिए जाते हैं, और कृष्ण के बारे में भविष्यवाणी की जाती है कि वे साक्षात नारायण हैं और कलियुग में चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतार लेंगे। इस प्रकार, कथा में भगवान की मधुर और ऐश्वर्यमयी लीलाओं का वर्णन है।
श्रीमत भागवतम कथा पोड़कास्ट में आपका स्वागत हैं गोलोक एक्सप्रेस में आईए दुख दर्द भूल जाईए
एबी सीडी की भक्ती में लीन होके नित्य अनन्द पाईए हरी हरी बोल
हरी हरी बोल एवरीवन जाए श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्य अनन्द श्री अद्वैत गददर श्री वसदी गोवर भक्त वृंद्ध हरी कृष्ण
हरी कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरी हरी राम हरी राम
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम
शरीर से रहिए व्यस्त आत्मा से रहिए मस्त हरी नाम जपते हुए ट्रांसफॉर्म द वर्ल्ड बैट ट्रांसफॉर्मिंग
yourself ना शास्त्र पर ना शास्त्र पर ना धन पर और ना ही किसी युक्ति पर मेरा तो जीवन आश्रित है प्रभु
केवल और केवल आपकी कृपा शक्ति पर गोलोक एक्सप्रेस में आइए तुक दर्द बूल जाए भी सीधी की वक्ति में लीन
होकर नित्य अनंद पा
है नित्य अनंद पाईए जय श्री राधे कृष्ण श्री श्री राधाधा मुद्र की जय कार्टिक मास की जय हरी हरी बोल
है तो हरी बोल एवर वेलकम एवरीवन टू दीविनिंग सशन श्रीमत भागुतम गांटर नंबर टेन हमारा चल रहा है जिसमें
गुवान कृष्ण की सुंदर प्यारी लीलाएं हैं और राधाराणी की भी लीलाएं है जितने भी राधाराणी के विषय में सुनने
को मिलता है वह सारा श्रीमत भागुतम में ही सुनने को मिलते हैं रशिकों ने बड़े-बड़े विस्तार की लीलाओं का
बड़ा-बड़ा विस्तार किया पर जो मूल रूप से लीला है वह श्रीमत भागुतम में ही मिलती है और ऐसा भी बोला
जाता है कि रहस्तम में ग्रंथ है जो व्यक्ति जुड़ा रहेगा अध्यान करता रहेगा तो रहस्ते खुलते रहेंगे खुलते
खुलते रहेंगे काफी डीप है तो हमें बेसिकली श्रवन के लिए जो है वह बोला गया कि हमें श्रवन करना है बाकी
हमने नहीं सोचना है समझ आ रही है नहीं आ रही है कि वह हमने नहीं सुनना सोचना है हमने सिर्फ श्रवन
करना है श्रवन की अपनी महत्वता है एक और कार्टिक मास चल रहा है कार्टिक मास में श्रवन की और भी
अधिक महत्वता है भगवान श्री कृष्ण का जनम प्रकट्टे हमने सुना राधा राणी का प्रकट्टे सुना कित प्रकार
राणी संदर संदर ली लाइन कर रही है वह सुना भगवान कित प्रकार लाइन संदर संदर ली लाइन कर रहे हैं वह सुना
भगवान इश्वदा माता को बहुत अनंद दे रहे हैं इससे अनंद बाबा को भी दे रहे हैं बाकिल को कुलबासीयों को भी
दे रहे हैं �
दे रहे हैं गहियां उनको दे रहे हैं सबको भगवान अनंद दे रहे हैं यह जो गहिया यह गोपी है बेसिकली यह भी
प्राणे जन्मों के रिशिमुनी है उनको भी अनंद मिल रहा है गोर अनंद भगवान को भी विवाह का बड़ा शौक है बहुत
बगवान अपनी मैया को एक्सर पूछते हैं मेरे विवाह कितने होगा किसी होगा मेरा भी बात तब भी बगवान बोलते हैं मुझे
किसी दो योतिशी ने बोला है आज से मैं मुझे मिला था कि तुम्हारा व्याना कहीं आसपास ही होगा मैं यह बोलती है अच्छा
आसपास होगा हां बिल्कुल पड़ोस में होगा मेरा विवाह यहां कहीं होगा अच्छा और क्या बताया मेरी दुलहन गोरी-गोरी
होगी बगवान कृष्ण मां को बोल रहे हैं दुलहन गोरी होगी खुद तो तुकाल है दुलहन गोरी यह कैसे योतिशी ने कहा
है फिर मां कुछ बोले नहीं ऐसी होगी मेरी दुलहन मां बोले फिर उनके घरवाले ना हमारी तरह उनके पस्ताह थोड़ी
होंगी नहीं हमसे ज्यादा गाय होंगी ऐसे बगवान बोल रहते हैं अपनी मां को फिर मां कहती है कि तो उन्होंने लड़ी
नाम भी बता दिया होगा इतना कुछ बता दिया भी ला नाम भी बता दिया होगा तो तू बता दे मुझे मैं करा दूंगी व्याप
है तो भुगवान बोलते हैं नहीं नाम तो नहीं ना बताया मुझे मुझे बोला पड़ोस में पड़ोस में रहती है तो माता बोलती
तो भुगवान बोलते हैं नहीं नाम तो नीना बताया मुझे मुझे बोला पड़ोस में पड़ोस में रहती है तो माता
बोलती है ठीक है पड़ोस में यह गांव है वहां पर लिलता सखी रहती है लिलता से तेरा विवाह कर दें नहीं मां यह
नहीं बोला पंडित ज
नहीं बोला पंडिजी ने पंडिजी ने योतिशी ने बोला कि नहीं किस थोड़ा इस तरफ को रहती है अच्छा उस तरफ उस
तरफ तो विशाखा रहती है विशाखा से विभाग करा दूं नहीं नहीं मां थोड़ा तुम कल सोच रही है इस तरफ को बोला
है इस त
इस तरफ रहती है मतलब इशारा था कि राधर आने के साथ विभाग कर दो और मां को भी पता था बट मां बोल नहीं रही थी
कि इस तरह से बुगवान इतना अनंद देते थे ना अपनी माता को और पिछले सश्चिण में तो हमने यह भी सुना
था कि बुगवान अ�
है कि बगवान अपनी आइडेंटिटी भी बता रहे हैं बलराम जी बता रहे हैं कि मैं जो है वह लक्ष्मन था पिछले
जन्म में यह राम था और यह को लोग जो थे वह यह थे तब माता नहीं बोला था हां सारे अवतार मेरे घर होने थे
और माता ने मजाक में लिय
और माता ने मजाक में लिया तो ब्रह्म अपने तरह तो बिता रहा सा तभी माता जो आप डांट रही थी कहीं से राम निला देखा
है और राम बन जाओ और यहां पर इस तरह से यह लिला कर रहा है इस तरह से मां जो है वह मिश्चा सोचती रहती थी फिर एक
तो नंद बाबा की घर में ताई आई मिलने ताई आई अब मांने बोला कृष्णा को कि ताई के ना पैर पड़ क्यों पड़ू
क्या मिलेगा पैर पड़ने क्यों पड़ तब तो मांने बोल दिया काना के कान में तो पैर पड़ पैर पड़ने से ना बड़ों
पैर पढ़ने से व्याह जल्दी हो जाता है आप जो सुना की व्याह जल्दी हो जाता है फिर तो क्या ही था फिर तो भगवान
ने पूरा लेट कर दंडवत्त प्रणाम किया ताई को दंडवत्त प्रणाम अब जब दंडवत्त प्रणाम हुआ ताई तो बड़ी खु�
पूरा लेट कर दंडवत्त प्रणाम किया ताई को दंडवत्त प्रणाम अब जब दंडवत्त प्रणाम हुआ ताई तो बड़ी
खुश हो गई अरे वाह इतनी खुश हुई ताई ने वह आशिर्वाद दिया तेरे हजारों व्याह हो अब तो कृष्णा और खुश भ
खुश हो गई रिवा इतनी खुश हुई ताई ने वह आशिर्वाद दिया तेरे हजार हो या हूं अब तो पृष्णा और खुश भगवान
और खुश माता ने भी सिर्फ आप मारा माता कहने लगे कि इस इसी के लिए तो पाउं वह छू रहा है दंडवत्त तो
इसलिए हो रही है कि मेरा जल्दी व्याह हो जाए व्याह हो जाए और ताई ने ऐसा शिवा दे दिया तो यह ताइम पीछा ही नहीं
छोड़ेगा मुझे पीछा नहीं छोड़ेगा इस तरह से मिठी-मिठी लिलाएं जो है वह कि है एक बार ज्योतिशी आया तो माने
ज्योतिशी से पूछा कि कितने उत्पात होते रहते हैं कोई ना कोई आए दिन घर आया रहता है तो मेरे लाला पर ना
बड़े कष्ट आ रहे हैं तो कोई उपाय बता दो है तो बोल दिया ज्योतिशी ने बोल दिया कि आप लोग ना गनेश पूजो
कि गनेश पूजा करोगे ना तो विगन हटता है विगन जो है वह हट जाएंगे गनेश पूजो माने का कैसे पूछने मैंने
तो कभी गनेश पूजे नहीं अच्छा है ऐसे करो हजार रूबे ले लो हजार मोदक बना लो लडू टाइप बना लो मोदक यह
बगवान
भगवान को ना गनेश भगवान को मोदक बहुत प्रीय है है अच्छा माने वैसे किया जैसे-जैसे विदी बताई थी
वैसे-वैसे माने जो है वह त्यारी की मोदक बनाएं अब माने मोदक रखे कैसे इतने मोदक थे पहले लडू के मौतना
पूरी थाल भरी होती है फिर उसके ऊपर एक लेयर कम होती है लडू की उसके ऊपर एक लेयर और कम होती है इसे करते-करते
ऊपर एक लडू होता है तो इस तरह की लियर तो माने ना बनाई और कितनी-कितनी सारे जो है वहां पर ना थालियां पड़ी
आप मां लगी गनेश भगवान की पूजा करने और गनेश भगवान का द्राय वहां पर मां ने आंख बंद की और मां लगी ध्यान लगाने गनेश भगवान की पूजा कर रही है
इदर काना ने देखा कि मां जो आंख बंद की हुआ है तो काना ने क्या किया लड्डू
इधर कारण देखा कि मां जो वांख बंद किया हुआ है तो कारण ने क्या किया लड्डू खाने शुरू किए कि उन्होंने अपने
वालवाद और सखाओं को बुलाया वालवाद और सखाएं भी लड्डू खाना शुरू हो गए फिर पेट भर गया तो उन्होंने बं�
पेट बढ़ गया तो उन्हें बंदरों को बुलाए उनको भी लड्डू को आए मोदक खिलाए और इस तरह से सबको खिलाए
सबने पेट भरके मोदक खाए और फिर सबको भी बापिस भेज दिया और मोदक कैसे खाए पूरे एक प्लेट पूरी
खत्म नहीं की थोड़ी एक प्लेट से उठाए और दूसरी प्लेट से एक गोला खत्म कर दिया एक गोला नीचे का एक गोला ऊपर
का ऐसे करते-करते ऊपर का एक लडू रहने दिया ऐसे थोड़ा-थोड़ा सब प्लेटों से खा लिया और सारी प्लेटें वैसे-वैस
मैं ऐसे करते-करते ऊपर का एक लड्डू रहने दिया ऐसे थोड़ा-थोड़ा सब प्लेटों से खा लिया और सारी प्लेटें
वैसे-वैसे सजी रहने दी अब माने जब पूजा कंप्लीट की आंखें खोली देखा पूजा हो गई गनेशी हो गए कुछ महां
ने द
देखा कि लड्डू कुछ कम लग रहे हैं अब मां कह रही है कि गनेशी तो खुश हो गए पर काना मुझे को लड्डू कुछ
कम लगे लड्डू कम है काना होते नहीं इतने ही थाल रखे थे मां कहते कि थाल तो मैंने इतने रखे थे मैंने
सबर के थाल रखे थे यहां तो कुछ कम है अब बगवान क्या कहते हैं बगवान कहते अच्छा कम लग रहे हैं गनेशी की
पूजा कर रहे थे लगता है गनेशी आते खा गए हैं गनेशी मां पूछते गनेशी ने खाए कि तुमने खाए तो बगवान
मैं उससे में कहते हैं देखो गनेशी का पेट कितना मोटा है इन्होंने खाया होंगे लड़ू मेरा पेट देखो इतने
लड़ू मैं कैसे खा सकता हूं मां भी सोचती है कि यह काना चोटा सा कितने लड़ू खा लेगा यहां तो बड़े लड़ू
गाया है तो यह प
है तो यह पक्का गनेशी ने खाए हैं तो सारा गनेशी पर आ गया फिर अब गनेशी लड़ू भोग सवीकार कर लिया तो भुगवान
कहते हैं मामा मां देखो महिया की गनेशी ने भोग सवीकार किया है आप तो यह भोग तो सबको बांट पूजा सफल हो गई
फिर मां ने कहा कि ऐसे तो गनेशी ने खाया भोग प्रकट होकर गनेशी को बोलती है कि एक बार और कि आप भोग ग्राहन करो
तो मां ने फिर गनेशी को बुलाया आर्थियार थे कि गनेशी प्रकट हो गए गनेशी प्रकट हो गए और प्रकट होकर उन्होंने
भोग भी सविकार किया पहला तो उन्होंने सविकार नहीं किया था वह तो आना नहीं खाया था बंदरों को पिलाया था तो
गनेशी खा रहे हैं अब मां और फुश होगी फिर मां ने कहा गनेशी कि मेरे इस लाला पर ना बड़े मतलब कष्ट आ रहे हैं
तो कुछ ऐसा उपाय बता दो कि मेरे लाला पर कष्ट ना है मेरा लाला चोटा सा चोटा सा लाला है मेरा तो गनेश बगवान
देखेंगे तेरे लाला पर कौन से कष्ट आ सकते हैं तेरे लाला तो अब गनेश बगवान सोचे प्रमाई यह महिया को क्या पता
कि तो गनेश फिर कहने लगे कि मैं या कष्ट तेरे लाला पर आएंगे उसको तो मैं रोकी नहीं सकता पर मैं इतना जरूर
बोल सकता हूं कि वह कष्ट तेरे लाला का बिगाड़ेंगे कुछ नहीं राक्षस भी आएंगे पर तेरे लाला का कुछ नहीं
बिगाड़
राक्षस भी रहेगा आप जब ऐसे सुनाना मैं यह तो मैं यह बड़ी खुश होगी बड़ी खुश होगी और इस तरह से गनेश
भी मैं यह ने पूजे इस तरह से भगवान बड़ी सुंदर लिलाएं सुंदर सुंदर लिलाएं करते हैं एक बार क्या हुआ कि मैं
यह जो है वह दीप प्रजोलित करके ना बहारी नदी में कि दीप नदी में बहाया जा रहे थे आप जब दीप नदी में बहाया
जा रहे थे तो क्या हुआ है कि हुआ यह है कि भगवान भी वहां पर लाठी लेकर बैठ गए और पानी को ना अपनी तरफ
कीजिए इस तरफ को इधर ऐसे-ऐसे-ऐसे तो भगवान जो पानी को ऐसे-ऐसे खींच रहे थे ना उस समय क्या हुआ उस
समय कुछ दीप ना पानी जैसे माता उस तरफ को दीप जो है वह बहारी थी पर कुछ दीप भगवान के तरफ इस तरफ को
रहे थे अब जो दीप बगवान के पास आ जाते थे बगवान उनको उठा गया ना बाहर पानी से बाहर निकाल रहते थे और अपने
पास रख लेते थे ऐसे करते हुए बगवान ने बड़े सारे दीप इकट्टे कर लिए अब मैं भी आशोधा देख रही है कि मैं
�
तो दीप बहारी हूं पर जलित दीप यह दीप को इकट्टे करके अपने पास रखी जा रहा है कर क्या रहा है तो पूछा
मैया ने कि काना तो क्या कर रहा है काना ने कहा कि दीपों को पार लगा रहा हूं जो दीप मेरे हाथ में आता है ना
तो मैं पार लगाता हूं पर मैया ने कहा कि थोड़े दीप तेरे तू तेरे हाथ में आ रहे हैं थोड़े दीप तू बाहर रख रहा
है बाकी के दीप तो जाए जा रहे हैं पानी में आधे को बाकी के दीप तो आगे जा रहे हैं तुम तो थोड़े रख रहे हो तब
करता हूं मैं यह बड़ा हुसी मैं यह बोलती अच्छा तो देखो भगवान ने लर्निंग दिए भगवान पार लगा रहे हैं पर
भगवान किन को पार लगा रहे हैं जो उनके हाथ में आ रहे हैं ऐसी भगवान हमारा भी दियान रखते हैं तो किन का
दियान रखते
रखते हैं जो भगवान का भगवान के पास जाते हैं जब भगवान को जो है वह अपना हाथ हम आते हैं ऐसे भगवान किसी
का जो है वह दियान नहीं रखते हैं हमें थोड़ी सी कृपा अपने भी करनी पड़ती है हमें भगवान की तरफ जाना
पड़ता है हम भग�
पड़ता है हम भगवान की तरफ जाएंगे फिर जाकर भगवान जो हमारा ध्यान रखेंगे इस तरह से बड़े खुश हैं भगवान
देखिए 2.5 वर्ष की वस्ता तक भगवान गोकपुल में रहे हैं उसके बाद वरिंदावन चले 2.5 से 11 साल की वस्ता में
जिंदा बन रहे हैं पांच वर्ष की वस्ता में भगवान ने जो है वह बच्चड़ों को चराना शुरू किया है छह वर्ष
की वस्ता ने भगवान ने वह बहुत चारण जो है वह स्टार्ट किया है भगवान को चरा रहे हैं इस तरह से भगवान
सुंदर सुंदर स
सुंदर सुंदर सुंदर सुंदर लीलाइन जो है वह कर रहे हैं एक बार शुद्ध माता स्नान के लिए भगवान को ले
गई और भगवान को उन्होंने बिठाया और खुद माता स्नान करने जमुनाजी में चली गई भगवान जो है वहां पर
मिट्टी खाना शुरू हो गया था तो आपने पहले भी सुनी होगी देखिए जो लिला नहीं ब्रमांड घाट पर हुई थी आज
भी विरिंदावन में वहां वह स्थान है यह लिला हुई तो ब्रमांड घाट बोलते हैं और वहां पर दिया भी जलाते हैं
जाकर तो
कर तो भगवान ने मीटी खाना शुरू कर दिया आप सबने मैया को बोलना शुरू किया कि मैया देखो तुम्हारा लाला
जो मिट्टी खा रहा है मैया वैसे स्नान कर रही थी पर मैया को पता चला कि लाला जो है वह मिट्टी खा रहा
तो मैया गई लाला मूदी का ल
महीया गई, लाला मुझे दिखा, लाला बोले मैं मिट्टी नहीं खाई, महीया बोलते तुने खाई है मुझे सब बोल रहे, लाला कहता है कि मैं जो बोल रहा हूँ मैंने मिट्टी नहीं खाई, महीया बोलते नहीं सब बोल रहे, तुने मिट्टी ज़रूर खाई होगी,
टूजेट अंतरिक्ष व्यान भी नहीं किया जा सकता सारी स्रिष्टि दिखी और उस स्रिष्टि में मैं आपको अपने भी
दर्शन हो गई अपने भी दर्शन हो गई अब तो भगवान ने ऐश्वर्य प्रकट कर दिया ना देखिए मुंह में अगर ब्रह्मान
दि�
दिखा मतलब ऐश्वर्य प्रकट कर दिया मतलब यह कि मैं भगवान हूं तो मैं यह सोचना पड़ी कि यह मेरा लाला तो भगवान
है आई राम यह मेरे घर भगवान अच्छे अब काना भी डरेगी मैं आपको पता चल गया अगर विश्वास हो गया कि मैं भगवान
है तो मैं यह मुझे मंदिर में रख देगी और मेरा दूप टिक्का करेगी में लीला का क्या होगा तो भगवान भी डरें
तो मैं यह ने क्या किया जाकर बाबा को बताया कि ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे मैंने देखा है बाबा ने क्या बोला बाबा
बोला कि तू बुड़ी हो गई है तेरी उमर हो गई है इसलिए ऐसी बातें करती है उमर हो गया तो इसलिए ऐसे बातें
कर रही है और भुगवान ने योग माया को देशते की कुछ करो मैं मंदिर में स्थापित होना नहीं चाहता मैं
तो लीला करने आया हूं मैं ली
लिला करने आया हूं मैं लिला प्रशोत्तम हूं ऐसे मंदिर में नहीं सजूंगा और जनन्द भाव ने ऐसे बोला तो यूशोदा
मैया को लगा कि ठीक है बुड़ापे में तो लाला हुआ है हो सकता है मेरी बुद्धी चक्र आ गई हो योग माया कैसा प्रभाव
की
की माता ने उस बात को लिया ही नहीं माता जो है वह बूल गई उन सब बातों को और फिर से जो है वह घर की कामों
में लग गई और लाला का पालन पोषण जो है माता को कर रही है देखिए अब वह भगवान जो है वह वैश्य कुल में
वसुदेव जी तो शत्री है और नंदबाबा वैश्य है अब शत्री में और वैश्य में कोई फर्क होगा तो अपने बच्चों कैसे
प्रिपेर करते हैं लड़ाई करनी है पढ़ाई करानी है साबस्थिति कर रहते हैं पर वैश्य वैश्य क्या अपने बच्चों
पढ़ाई लिखाई कराते नहीं उन्होंने तो कृषि करनी है उन्होंने तो गाय चलानी है तो जब गाय भी चलानी है
तो फिर पढ़ाई लिखाई की क्या तरूरत है तो संस्कार नहीं हुआ बगवान का नामकरण संस्कार नहीं हुआ कभी बगवान
और बल्दी र
राम जी स्कूल नहीं गए तो तो उसी तरफ वसुदेव जी सोच रहे हैं कि कुछ ना नियम होते हैं कि इतनी एज के बीटर
ही नामकरण संस्कार हो सकता है नहीं तो 10 साल के बाद होगा एक साल के बाद होगा या फिर पहले कुछ दिनों
होगा तो इस तरह की रीति होती है तो वसुदेव जी ने सोचा कि बगवान का टाइम आ गया मतलब उनके पुत्र का समय
आ गया नामकरण का और नंद बावा ने नामकरण कराया नहीं अभी तो फिर क्या किया वसुदेव जी ने वसुदेव जी
गर्गाचारे जी को बुलाया और कहा कि आप चाहिए वहां पर पुरिंदावन में ब्रज में गोकुल में और वहां जाकर
पुत्रों का नामकरण संस्कार कीजिए नामकरण कीजिए गर्गाचारे ने सोचा कि ठीक ही बोल रहे हैं मुझे नामकरण
संस्कार करना चाहिए क्योंकि वह तो वसुदेव जी के पुत्र है और गुरु से क्या छुपा है गर्गाचारे को सब पता
है गर्गाचारे जो है नारायन से जो है वह आशिर्वाद प्राप्त किया था इनको भूत बर्तमान पविष्य सब पता है
कि जो तिशाचारे है ना ऐसा जो तीन ऐसा मतलब देखते हैं कि सब पत्ते चल जाता है इनको तुमसे कोई बात छुपी
नहीं प्लस यह जो पुरोहित होते हैं पुरोहित मतलब पूर्व का मतलब होता है कि जो दूसरों को ना आगे रखे
मैं पुरोहित हित कल्यान दूसरों के कल्यान को जो आगे रखे वह पुरोहित होता है तो गर्गाचारे जी तो बड़े
कि महान थे और जो बड़े-बड़े पुरोहित होते हैं तो पुरोहित आई सविकार इसलिए करते हैं वह शिष्ट जी
ने भुआन राम के वंश का सूर्यवंश की प्रोहित ताई सविकार इसलिए की थी कि उनको भुआन के नामकरण का मौका
मिलेगा भुआन के दर्शनों का मौका मिलेगा ऐसे गर्गाचारे ने भी किया भुआन का नामकरण करने के लिए तो बैठे
इंतजार कर रहे
इंतजार कर रहे हैं वास्तवदेव जी ने बोला तो कहेंगे क्यों नहीं तो यह गए बोकल में नंद बाबा ने जब देख सुना
कि गर्गाचारे जी आया है मिलने आए बड़े नमस्कार किया चरण स्पर्श किए चरण दोए आसन दिया और उनका खूब सत्कार किय
कि गर्गाचारे जी आए हैं मिलने आए बड़े नमस्कार किया चरण स्पर्श किये चरण दोए आसन दिया और उनका
खूब सत्कार किया खूब इतना सत्कार किया ना वास्तवदेव जी का हाल पूछा वह सब बातें तो होती जाती लेकिन
परनंद बाबा नहीं जानते हैं कि यह मेरा पुत्तर नहीं है परनंद बाबा यह तो पता कि बलराम जी जो हैं वह वसुदेव जी के
पुत्तर है यह तो पता है नाम करना वसुदेव जी की कुल प्रोहित आए हैं तो उनको नामकरण करवा लेना चाहिए
खाला कि व
हालांकि बेजा वसुदेव जी ने इसलिए है पर नंद बाबा ने खुद बोला कि आप मेरे पुतर का नाम करें तो इसका भी कर
दीजिए खुद बोला अब गर्गाचारे जी तो योतिशाच आ रहे हैं और बगवान की कुंडली तो किसी से चुपी नहीं है
रोज �
रोज नाश्ते से पहले एक असुर का वद्ध करते हैं रोज कुछ असुरों का वर्णन हम करते हैं कुछ कर नहीं भी
करते हैं पर भुगवान इतने प्रति असुरों का वद्ध करते हैं तो गर्गाचारे जी कह रहे हैं कि आधे कम मुसीबते हैं
तो गर्गाचारे �
तो गर्गाचारे नंद बाबा को बोला कि देखिए कि यहां ना आठ में संतान पैदा हुई वह कन्या थी क्योंकि उनको
पता नंद बाबा को नहीं पता कि उनका पुत्तनिया है जब कंस उसको मारने लगा तो कन्या काश में उड़ गई और उस
कन्या ने विविश्यबानी की की क्या की कंस को कहा कि तुझे मारने वाला कहीं और पैदा हो चुका है वह तुझे
मार देगा तब कंस तब से बड़ा डर गया है
अब मैं यहां आया हूं और मैं अगर तुम्हारे पुत्र का नामकरण संस्कार कर देता हूं तो दोनों चीजें जुड़ जाती हैं
तंस को लगेगा कि वह जो माता ने बोला था वह जो देवी ने बोला था कि आठमा पुत्र जीवित है वह तुम्हारे पुत्र
को ह
वही वस्त देव जी का पुत्र जो है वह समझ लेगा देव की का पुत्र समझ लेगा और उसकी जान पर खतरा है खतरा आ जाएगा
वह तो उसी समय अश्लील बेगी देगा इसको मारने के लिए तो इसलिए नामकरण संस्कार जो है वह नहीं होना चाहिए इस
से अब नंद बाबा पहले से सोचने लग पड़ेगी मेरे बेटे का नामगरण संस्कार मैं सोच रहा हूं धाम से करूंगा सब
लोगों को बुलाऊंगा इतना बड़ा उस सब होगा आप क्या होगा तब नंद बाबा ने ओफर किया कि आप ऐसा कीजिए आप मेरे
गुप्तर का नामगरण संस्कार कर दीजिए हम उस सब नहीं करेंगे किसी को पता भी नहीं चल लेंगे चोर चोर कर लेते
हैं तो आप ऐसा कीजिए आप वह शाल में पढ़ा रही हैं मैं दोनों बच्चों को लेकर गोशाला में आ जाऊंगा गुप्त रास्ते
के लिए आप पहले से होंगे तो बच्चों का नामगरण संस्कार कर देना गर्गाचारी जी तो आई इसलिए वह मान गए और ऐसा
ही किया गया किया गया गुप्त रीति से भगवान का नामगरण संस्कार हुआ गुप्त रीति से है तो पहुंचे हैं भगवान
सर प्रथम जो है वह नामगरण संस्कार हुआ बलराम जी का बड़े बेटे का नामगरण संस्कार करती चाहिए तो बताया उन्होंने
कि यह सुदेश जी का पुत्र है इसका एक नाम होगा राम वेसिकली राम मतलब सबको अनंद देने वाला सुख प्रदान करने
तो गर्गाचारी जी कह रहा है कि यह बालक है ना यह पुत्र है यह सबको सुख प्रदान करेगा सबको अनंद देगा इसके
लिए इसका नाम उन्होंने बलराम रख दिया राम रख दिया राम इसलिए मैं इसका नाम रखता हूं राम दूसरा यह बालक बड़ा
बलचाली होगा बहुत बलचाली तो उसका नाम एक बल भी होगा बल इसका एक नाम संकर्शन भी होगा क्योंकि यह जोड़ेगा
किसको तुम्हारे परिवार को और वसुदेव जी के परवार को एक साथ जोड़ेगा इसलिए इसका एक नाम संकर्शन भी होगा इसका
एक नाम शेष भी होगा शेष मींस जब सब कुछ खत्म हो जाता है सृष्टि में तो यह शेष बच जाते हैं तो इसका एक
नाम शेष भी होगा तो इस तरह से बहुत सुन्दर नामकरण संस्कार किया बलराम जी और संकर्शन शेष इतना के नाम दिए
सब बड़े अनंदित हो गए फिर भगवान की बारी आई और जब भगवान की बारी आई नामकरण संस्कार करवाने की तो तो रोन लग
पड़े घरकाचारे जी भाव भी बोर हो गए और कहा यह तुम्हारा लाला यह तो युग युग में जन्म लेता है कभी यह
रंग का होता है कभी यह लाल रंग का होता है और आने वाले कल युग में कभी यह शाम रंग का होता है और आने
वाले कल युग में यह गोरे रंग का जन्म लेगा मतलब यह कि शिर्मत भागवतं में विश्वानी है कि कल युग में भगवान
गोरे रंग में आएंगे और वह चितन्ने महाप्रभु है जगह जगह पर चिकर मिलता है कि कल युग में बगवान आएंगे बगवान
आए भी चितन्ने महाप्रभु के रूप में और गोरे रंग के थे राधा राणिंग की अंग कांति रहन करके आए थे तो गर्गा
महाप्रभु के रूप में और गोरे रंग के थे राधा राणिंग की अंग कांति रहन करके आए थे तो गर्गाय चारे जी
विश्वानी कर रहे हैं पूरा तो पूरा ऐश्वरे खोल दिया है वह सोच रहे हैं कि मैं तो बच रहा था यह गर्गाय
चारे जी ने तो �
चारे जी ने तो पैसे भांडा पोड़ दिया बहुत कुछ बोला है तुम्हारा पूत्र जो है यह बहुत महान है इतना इसका
ऐश्वरे है नंद हेरान यश्वदा हेरान यह तो भगवान है भगवान है और यह वसुदेव जी का पूत्र है वसुदेव जी का
पूत्र नंद बाबा हेरान तो सुधी आई जब करगाचारे जी को ना अच्छी भगवान ने आंखें दिखाई गर्गाचारे जी को क्योंकि
करके रहे हो मैंने इतना प्लैन बनाया इतना कुछ किया यहां आया लीला करनी है तो तो सारा प्लैन ही चौपट
रहे हो जब देखा ना भगवान ने आंखें दिखाई छोटे से अंखें पुली अब होश आया आप क्या करूं देखिए साधु महात्माओं को
ना बात बलट में ज्यादा समय नहीं लगता है बिल्कुल समय नहीं लगता है क्या कह रहे हैं कार्य है कि तुम्हारा
पुत्र नरायन है ऐसे मुझे मुझे निकल गया तुम्हारा पुत्र साक्षात नरायन है अब बोलें हां तुम्हारे पुत्र में
नरायन के से गुण है नरायन के से गुण वाला है और क्या बोलें तुम्हारा पुत्र पिछले जन्म का पुत्र था इसलिए
एक नाम वास्तव देव तो वह भी बोल दिया जन्म वास्तव देव के पूत्र है पिछले जन्म में थे नरायन कैसे गुन है
इसलिए ना इसको संभाल कर रखो इसके पूरी केर करना यह कहीं जाए ना इदर उदर यह बहुत प्रीशेस अनमोल बालक
है पूरा ध्या
है पूरा ध्यान रखना पूरी इंस्ट्रक्शन से रहे हैं तष्ट बड़े आएंगे राक्षस आएंगे पर ध्यान रखना तुम लोगों
ने एक बच्चे का यह बड़े हो के गिरी राज को भी उठाएगा गिरी गिरी धारी इसका नाम होगा इस छत्रू इसको कभी
एक बच्चे का यह बड़े होकर गिरी राज को भी उठाएगा गिरी गिरी धारी इसका नाम होगा इस छत्रू इसको कभी से ताने
सकेंगे इस तरह से गर्गाचारी जी बोला इसका एक नाम क्रिशन भी होगा क्रिशन मतलब सरवकर्षन जी सबको कर्षित करने
हो गया है तो गर्गाचारी ने बड़ा सुधर क्रिशन नाम दिया बाकी भी नाम दिए फिर मेन होता ना मेन नाम क्रिशन आज
मतलब आप तोचिए धरती पर यह नाम हम तो अभी ले लेते हैं वह ग्वान श्री कृष्ण पर उससे पहले इंटरव्यू इतना
हुपनली जो है वह बोला नहीं जाता था मंत्र गुप्त होते थे कान-कान में दिए जाते थे और कान-कान में लोग
मौन होकर मतलब उसे निकालते ऐसे जप लेते थे पता नहीं होता था ज़्यादा नामों का आज क्रिशन नाम भी गुंजा
पता बनने में बहुत ही अस्पिशियस पृष्ण बोला ना सब बड़े खुश हो गए अब नामकरण संस्कार भी हो गया नामकरण
संस्कार हो गया तो बाहर आए जैसे बाहर आए ना नंद बाबा तो फिर आगे निकल गए मैं यह शोधा ने भगवान को पकड़ा
रोहिनी माता ने बलराम जी को पकड़ा हुआ आपस में बातें कर रही हैं गुरुजी ने नाम क्या बताया मुझे मैंने
तो सुना ही नहीं आपको पता होगा क्या नाम बताया मैं तो सुनते ही बूल गई मुझे याद ही नहीं है क्या नाम बताया
तो गुरुजी न
तो गुरुजी ने नाम करने संस्कार कर दिया पूरे दुनिया को नाम पता चल गया वह माताओं को नाम नहीं आता पता ही
नहीं तो फिर क्या बोलती माता है कोई जो मरजी नाम रख ले मैं तो इनको कनुआ बोलूंगी रोहिनी मातें बोलती मैं भी
तो बलूआ बोलूंगी तो सारी जिंदगी बार मानी कभी कृषियन नहीं बोला तो भी कारणा गब्ज़ कनुआ कभी बलूआ यह जो
पाल बाल है उन्होंने भी कभी ऐसा चुनको जो है वह आज चली नामों से नहीं बुका रहा कोई दाऊ बोल रहा है दाऊ कोई
बार ना कोई कुछ अपने नाम रखे सबने छोटे-छोटे जिसको जो कंवीनेंट लगता है वैसे नाम रखे और कभी भी सही नामों
से नहीं बुलाया उनको तो याद भी नहीं था सही नाम तो वह थोड़े और बड़े हुए माता ने पांव में जो है वह पाइल
सब्सक्राइब करें और जब वहां राधा राणी के दर्शन करने पहुंचे ना मृष्वानों जी के घर में तो मृष्वानों
ने कह दिया कि गर्गाचारी बोला लाली के दर्शन करो लाली हुई अधर्शन कराओ आज से सोच रहे हैं मृष्वानों
जी ने कहा कि आपने मतलब हमारे बच्चों का भी नामकरण संस्कार कर दीजिए देखिए नामकरण हुआ गुपतरीति से
तो परिकर के लिए कुछ नहीं चुपा हुआ है उनको पता होता है तो गर्गाचारी ने वह उनका भी नामकरण संस्कार किया
सरप्रत्म तो श्रीदामा जी का नामकरण संस्कार किया है राधाराणी के बड़े भाई और फिर राधाराणी का और जो
आली देखी है ना भाव भी बोर गर्गाचारी जी इतना भाव भी बोर तो वह कृष्णा को देखकर नहीं हो इतना लाली को
देखकर हुए मन के भाव उनके आप तो कृष्णा जी तो पहले ही कहती थी कि तुम्हारा क्या जन्म हुआ मुझे
दिव्य दिव्य लोगों के दिव्य दिव्य दर्शन हो रहे हैं और आप वह भी समझ गए गर्गाचारी जी भावा भी बोर हो रहे
हैं नॉर्मली महात्मा लोग जो इतने बहाबुक नहीं होते हैं पर भुगवान सामने आ जाए तो कोई क्या करें तो उनका
भी ना
नामकरण संस्कार करके फिर वह निकल गए हैं क्योंकि कंस ने तो गुप्तचर छोड़ रखे थे ना जास देर एक समय पर उपभी
नहीं सकते एक जगह पर कंस के गुप्तचर कि गर्गा जारे जी कहां गए कंस कपड़ा उसमें टेरर था तो इस तरह से बचते
चाहते जो है वह बुगवान का नामकरण हो गया दरानी का नामकरण हो गया देखिए कंस्टर इतनी चौक से रखी हुई
थी ना इतना कुछ कर रखा था बुगवान की लीला में क्या विगंड डालेगा कंस वह ऐसी चल रही है आज भी गाई जा रही
है लीला तो न
लीला तो नित्य है आज भी हो रही है तो कभी एक कोई प्रकट हुआ होगा भगवान के लिए तो नित्य प्रकट है तो इस
तरह से भगवान का नामकरण संस्कार भी हुआ और भगवान थोड़े और बड़े हुए और लीलाएं कर रहे हैं और भगवान ने
कौन सी लीलाएं की इसका वर्णन अब हम कल के सदसंग में सुनेंगे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण
हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरी हरी पूल हरी हरी पूल तो चलिए अब हम चलते हैं आज के
रीवी सेक्शन की तरफ सर प्रथम हमा
सब्सक्राइब करते की सब्सक्राइब सब्सक्राइब करते की सब्सक्राइब करते की सब्सक्राइब करते हैं
कि व्यास पीठ को शत शत नमन आज मुझे लर्निंग्स के लिए
कहा गया है लेकिन मैं इतना भाव विभोड था भगवान की लीलाएं सुनने में एक के बाद एक के बाद एक के इतना
अनंद आ रहा था इतना अनंद आ रहा था यह टेंट कैंटो जो है भगवान की लीलाओं का स्कंद है राधा राणी
की लीलाओं का स्कंद है जैसा मैंने कहा कार्तिक मास चल रहा है कार्तिक मास में इन लीलाओं के श्रवण
का अपना ही महत्व भगवान बहुत छोटे हैं अपनी तोतली तोतली बातों से मां को अनंदित करते हैं और बार-बार
पूछते हैं कि मेरा विवाग नहां होगा और मां को खुश करने के लिए कहते हैं कि जोड़ी ने मुझे बताया है कि
पड़ोस में होगा दुलहन गोरी होगी तो मां मजाक में कहती है तो तुम्हें तो नाम भी बता दिया होगा नहीं
मां नाम नहीं बताया अब यश्योदा मिर्या भी लला की मां है कभी वह ललिता की तरफ कभी विशाखा की तरफ
इशारा करती है लेकिन भगवान भी भगवान है वह तो इशारा राधारानी की तरफ करते हैं आपने जो ताई के
आने का वृत्तानत्य सुनाया और किस तरह जब यश्योदा मां पहले भगवान पाउं नहीं पढ़ते हैं लेकिन जब कान में
कहती है कि ताई के पाउं पढ़ोगे तो शादी जल्दी हो जाएगी किस तरह वह दंडवत्त प्रणाम करते हैं बहुत अनंद आया
इतनी मीठी-मीठी लीलाएं हैं फिर जो आपने गनेश भगवान की पूजा कि किस तरह से विग्न हर्ता की पूजा करिए
मां तो मां है मां को चिंता रहती है कि मेरे लाला के ऊपर अनेकों कष्ट आ रहे हैं तो जब उसे कहा जाता है
कि आप विग्न हर्ता गनेश जी की पूजा करिए तो वह मोदक बनाती है और जो मोदक वाली कहानी कितने ठाल बनते हैं
कितनी लेयर्स बनती हैं ऊपर एक लड्डू होता है भगवान तो भगवान है सभी को संतुष्ट करते हैं और यह सभी लोग
भगवान को भगवान लाए ही इसी लिए है कि जिन जिन लोगों ने उनका नाम जपा है उनके ऊपर उपकार किए हैं उन
सभी को कृतार्थ करना है सभी का पेट भर देते हैं मोदकों से और मां जब पूजा के बाद आंखें खोलती है उसे
जाता है कि मोदक कम है तो भगवान तो भगवान है वह बातों में ठाल जाते हैं मैंने थोड़ा खाए हैं गनेश
जी का पेट देखो यह सारे मोदक तो उसी पेट में चले गए हैं मां फिर गनेश जी की पूजा करती है और यह कहती
है मेरे लाला पर कभी कष्ट ना आए और गनेश जी भी प्रकट होकर कहते हैं कि तेरे लाला पर कोई कुछ नहीं
बिगाड़ सकता मैया खुश हो जाती है दीपदान की जो आपने कथा सुनाई और जो उससे लर्निंग मिली वह इतनी
अंदर है भवान पानी को अपनी तरफ खीसते हैं दीप उदर आ जाते हैं जलते हुए दीपों को उठाकर बाहर रख देते
हैं मैया कहती है कि यह क्या कर रहे हो और उनका उत्तर तोतली जबान में कि मैं इन दीपों को पार लगा रहा हूं
और मैया का यह कहना कि जो बाकी अंदर चले गए हैं और उनका यह कहना कि मैंने इनका सभी का ठेका छोड़ा ले
रखा है जो मेरे पास आता है मैं उसी का कल्यान करता हूं भगवान यहां एक मैसेज देते हैं कि मेरे साथ
जुड़ो मानव जीवन तो आपको मिला ही हुआ है अगर मेरे साथ जुड़ोगे तो मैं भी आपका ख्याल रखूंगा एक
कदम चलिए मेरी तरफ 10 कदम मैं चलकर आऊंगा गुर्बानी में बहुत सुंदर कहा गया है उठत बैठत सोवत जागत
है जो प्राणी उठते बैठते सोते जाते प्रभु से जुड़ा हुआ है प्रभु का नाम लेता है उसका बेड़ा पार होता
है इसके बाद आपने ब्रह्मांद्र घाट की लीला जहां भवान मिट्टी खाते हैं मूँ नहीं खोलते और जब मूँ
बोलते हैं तो यश्वदा मैया सारे नक्षत्र तारे पूरा अंतरिक्ष वायु मंडल यहां तक के अपने दर्शन भी कर
लेती है और उसे लगभग यकीन हो जाता है कि यह तो भगवान है और भगवान तो भी युक्ति पूर्वक तरीके से योग
मैया को कहते हैं तो नंद बाबा के पास जाती है नंद बाबा भी टाल देते हैं कि अरे भाई आप सख्या गई हो यह
लेट एज में लाला पैदा हुआ है ना तो इसलिए आपको यह सारी चीजें महसूस हो रही है नामकरण किस जो कथा
है वह और भी बढ़िया गर्गाचार्य पुरोहित है ज्योतिशाचार्य है इतने खुश है जब उनको यह कहा जाता है
कि लाला का नामकरण करके आइए उनको सब कुछ पता है पुरोहित का मतलब आपने बहुत सुंदर बताया पुरोहित जो
दूसरों के हित को पहले रखे नंत बाबा भी नामकरण के लिए कहते हैं लेकिन जब गर्गाचार्य कह उनको यह
सुनाते हैं कि भाई कंस से बचकर रहना पड़ेगा क्योंकि आठवां पुत्र जीवित देवतार देवकी का जो है वही
कंस का संघार करेगा कंस ने चारों तरफ गुपचर छोड़े हैं तो एक तरकीब बताई जाती है कि घोषाला में चलिए
चुपके से बिना किसी उत्सव के चोरी-चोरी नामकरण सीक्रेटली गुप्त रूप में होगा बलराम जी बड़े भाई हैं
पहले उनका नामकरण होता है और नाम राम जो सबको अनंद देगा संकर्षन जो दो परिवारों को जोड़ेगा शेष तो
है ही शेषनाग भगवान के साथ रहते हैं अब आती है लाला की बारी गर्गाचारी इतने भाव विभोर है कि
ऐसे जीवन में सफल हो गए और फिर वह धीरे से नंद बाबा को कहते हैं कि यह तो विभिन्न रूपों में हर युग
में आते हैं कभी गोरे कभी काले लेकिन कल युग में यह गोरे रंग में आएंगे चैतन्य महाप्रभु के रूप में
पर पठोंगे यह बातें सुनकर लाला कहते हैं कि यह तो सारा भड़ा भोड़ रहा है आंखें तरहते हैं उसकी तरफ
और गर्गाचारे भी बात को पलट जाते हैं पहले कह रहे थे कि आपका बेटा तो साक्षात नारायन ही है फिर कहते
हैं इसमें साक्षात नारायन के गुन है पिछले जनम में यह वासुदेव के पुत्र थे तेरे नाम रखते हैं कृष्ण
गिरीराज उठाने वाले गोवर्धन को उठाने वाले बात यह है कितने सुन्दर तरीके से आपने बताया कि जब
नामकरण संस्कार होता है रोहिनी और यश्वदा आपस में बातें करती हैं कि भी क्या नाम रखा दोनों मां
को नाम ही नहीं पता है वह कहती मैं तो इसे कनुआ बोलूंगी बलराम को दाऊ बोलूंगी देखिए उनका भोलापन
और भगवान की लीलाएं हैं लीलाओं को सुनकर आपके श्रीमुख से हम लोग सराबार होते हैं राधा जी के दर्शिन
करने के लिए भी गर्गाचारे जाए उनका जीवन कैसे सफल होगा लाली के दर्शिनों के बिना वृषभान जी भी
करते हैं इनका भी नामक संसकार करें पहले राधा जी के बड़े भाई श्रीदामा जी का संसकार होता है फिर लाली
का संसकार होता है और जो गर्गाचारे हैं वह यह नामकरण संसकार करने के बाद छुक्के से निकल जाते हैं
प्रभु की लीलाएं नित्य निरंतर सुख देने वाली भाव विभोर करने वाली इतनी सुंदर लीलाएं हैं कि आदमी
सुन सुनके श्रवण करके ही अपने आपको क्रितार्थ समझता है और वही हम सभी लोग जो आपके मुखारवंद से
इन लीलाओं को सुनते हैं और जिस तरह से आप सुनाते हैं प्रेती जी आपको शत शत नमन शत शत हरी हरी बोल
कि हरी हरी बोल हरी हरी बोल जी हमेशा की तरह बहुत ही ब्यूटिफुल जो है वह अपने रिव्यू दिया है
सब्सक्राइब करें और इसी तरह से सभी को जो है वह समरी से सचन की समरी से अनंतित जो है वह करते रहे हैं
हरी हरी बोल हरी बोल थैंक यू वेरी मच विदेजी हरी हरी बोल हरी हरी बोल आगे बढ़ते हैं मेरे साथ अनीता टफारा
जी है हरी हरी बोल अनिता जी हरी हरी बोल जैसे कृष्णा एवरीबन कार्तिक मास की आप सबको शुक्का मनाएं और सच
में आज बहुत ब्लेस्ट फील कर रही हूं मैं कि कार्तिक मास में हमें जो है भगवान की कथाएं सुनने को मिल रही है भगवान
की राजाराणी के बारे में हमें सुनने को हमें जानने को मिल रहा है बहुत आशी कथाओं में बहुत ऐसी चीजें आती हैं जिनके
बारे में शायद कुछ चीजों के बारे में हम जानते हैं और कुछ के बारे में जानते भी नहीं है और थैंक यू प्रिपरी आपके
सब्सक्राइब करते हैं कि यह सब चीजें जो है वह हमारे आंखों के सामने हो रही है और हम सब उसमें ऐसे पार्ट बनकर यह सब चीजें देख पा रहे हैं तो आज की कथा हर बार की तरह ही बहुत बढ़ी
किया रही बड़ा अनंद आया भगवान की लीला सुनते-सुनते बिल्कुल जैसे भी जी ने अंकर ले भी बोला कि हम
खो जाते हैं बिल्कुल खोई जाते हैं और लास्ट में हमें समझ में आता है कि भी तो सब उसका जोष के साथ
अनंद लेते हैं और बड़ा इंज
अनंद लेते हैं और बड़ा इंजॉय करते हैं और आज के ससंग से भी मैंने यही सीखा कि भगवान जो है वह क्रेडिट
जो अपने भक्तों को देते हैं बड़ी सारी चीज़ों जैसे जो गर्गाचारे जी ने भगवान का नामकरण किया मैया का
नामकरण किया देखो भगवान भगवान जी का नामकरण उनके हाथ उनके मतलब श्रीमुक्त से हो रहा है और कितने सालों
बाद हजारों सालों बाद भी आज हम सब उनका नाम धोरा रहे हैं हम सब उनके बारे में बात करें कि भगवान जी का
नामकरण उन्होंने किया राधाराणी का नामकरण बल राम जी का और राधाराण जी के बड़े ब्रदर का उनका भी नामकरण
यह सब जो है वह हम सब कथा में सुन रहे हैं क्योंकि भगवान ने उनको क्रेडिट दिया तो भगवान जो है अपने
शक्तों को हमेशा क्रेडिट देते हैं सब कुछ होते हुए भी जैसे भगवान श्रीमुख से जब उनकी मैया जो है वह उनका
श्रीमुख कोल कर देखती है कि माटी तो नहीं खाई है तो सब कुछ देखो भगवान के अंदर है मैया खुद को भी अंदर
फील कर उनको खुद को भी वह देख पा रही है अपने अंदर पूरा ब्रह्मण देख पा रही है सब कुछ होते हुए भी
भगवान ऐसे अंजान बन जाते हैं ऐसे अपने मनोहा रूप में सब कुछ जो है वह बुला देते हैं अपने भक्तों को
और इस प्रकार से नैचुरल फील कराते हैं कि मैं कुछ नहीं हूं जबकि वही सब कुछ है और अपने भक्तों को
क्रेडिट देते हैं चाहिए वह किसी वेड़ वार्डेज के लिए हो अपने भक्तों की की हुई भक्ति को वह कभी भी
विश्वल नहीं जाने देते वह उसमें जो है उनको उनका फल जरूर देते हैं और सेकंड मेरी जो लर्निंग रही जो दियों
वाली आपने एक्जांपल बताई उसमें भी बड़ा अच्छा लगा कि जो भगवान की तरफ चलता है तो भगवान उसको अपनी तरफ
लेते हैं और जो भगवान की तरफ जाना ही नहीं चाहता तो भगवान उसको अपनी तरफ कैसे लेकर जाना तो हम सबको उन्हीं
के पास है लेकिन वही है कि रास्ता घूम-घूमा के हम हमारी हजारों करोड़ों सालों की यात्रा हो जाएगी अगर हम
सीधे रास्ते से उनके साथ नहीं चुड़ेंगे तो कहीं ना कहीं यह कथा हमें यही कहकर जाती है कि हमें जो है
हम सबको अपने ऊपर आत्म कृपा की जरूरत है अगर हम चाहते हैं श्री हरी की कृपा हम पर तो हम सब मिल जुलकर
जोश के साथ जो है वह श्री हरी का नाम ले उन्हें को याद करें और इसके कार्टिक मास एक ऑपरचुनिटी है हम सब
के लिए और भगवान के साथ और अधिक जो है अपनी प्रेमा भक्ति को बढ़ाने के लिए तो सच में बड़ा नंदाया हरी
हरी बोल निता जी हरी हरी बोल बहुत ब्यूटिफुल रिव्यू आपने दिया है बिल्कुल कार्टिक मास की महीमा तो
है इस मंच में अगर हम भगवान कता का श्रवन करते हैं पूरे दिल से जोर शोर से डिवोशन करते हैं तो डिवोशन
प्राफ जो है काफी आके तक जो है वह जाता है और भगवान ने देखिए करुणा करके यह ऐसा बनाया है कि हमेशा जो
है हम लोग मूर्ख व्यक्ति हमेशा भगवान की सेवा पूजा उतने अनंत से उतने उसासन नहीं कर पाते इसलिए भगवान
ने हमारे लिए कुछ समय बना दिया कि इस समय में आप कर दो भगवान की पूजा अनंत पुनाफल जो है वह हमें मिल
जाएगा तो और लीला के बारे में आपने बताया लीला जो है वह तो भगवान की हो ही रही है देखिए हम लोग मूवी
जाते ना कौन सी मूवी हिट होती है इसमें इरो इरोइन संदर देखते हैं बड़ी अच्छी एक्टिंग ही है और मूवी
सुपर डूपर हिट हो जाती है कि इसमें बड़ी अच्छी एक्टिंग हम एक्टिंग देखने जाते हैं और देखते हैं कि
इरोइन संदर ल
इसमें बड़ी अच्छी एक्टिंग ही है और मूवी सुपर डूपर ही है कि इसमें बड़ी अच्छी ही है कि
इसमें बड़ी अच्छी ही है कि
देखेगा लाइव यूट्यूब पर हरी हरी बोल हरी हरी बोल तो आज के सस्तम को हम यहीं कंक्रूट करते हैं प्रेयर्स के साथ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम र
द्वारा संपर्क कर सकते हैं या हमारे वाट्सएप या टेलिग्राम नंबर 701802 6821 से भी जुड़ सकते हैं
आप हमसे फेस्पुक पेज और यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं
हरी हरी वोल
करते हैं
Podcast Summary
Key Points:
श्रीमद्भागवतम कथा के इस प्रकरण में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन है, जिसमें माता यशोदा के साथ उनकी मधुर बातचीत और विवाह की जिज्ञासा शामिल है।
कार्तिक मास के महत्व और श्रवण की विशेषता पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें कहा गया है कि श्रवण से ही भक्ति और आनंद की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा माता यशोदा के साथ विवाह, ज्योतिषी, गणेश पूजा, और दीप प्रज्ज्वलित करने जैसे प्रसंगों का वर्णन है, जो उनकी बाल सुलभ चेष्टाओं को दर्शाते हैं।
मिट्टी खाने की लीला में भगवान ने अपने मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराया, जिससे माता यशोदा को उनके ऐश्वर्य का पता चला, परंतु योगमाया के प्रभाव से वे इसे भूल गईं।
नंदबाबा के अनुरोध पर गर्गाचार्य ने गुप्त रूप से बलराम और कृष्ण का नामकरण संस्कार किया, जिसमें उन्होंने कृष्ण के भविष्य और कलियुग में चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतार की भविष्यवाणी की।
Summary:
इस प्रकरण में श्रीमद्भागवतम कथा का सार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन है। कथा की शुरुआत में कार्तिक मास के महत्व और श्रवण की शक्ति पर बल दिया गया है। भगवान कृष्ण अपनी माता यशोदा से विवाह के बारे में पूछते हैं, और एक ज्योतिषी की बात का हवाला देते हुए बताते हैं कि उनकी दुल्हन पड़ोस में ही रहती है, जिससे माता को उनकी बाल सुलभ चेष्टाओं पर हंसी आती है। इसके बाद गणेश पूजा के दौरान कृष्ण और उनके सखा लड्डू खा लेते हैं, और दोष गणेश जी पर मढ़ देते हैं। दीप प्रज्ज्वलित करने की लीला में कृष्ण दीपों को पार लगाने की बात कहते हैं, जिससे यह सीख मिलती है कि भगवान उन्हीं की सहायता करते हैं जो उनकी ओर बढ़ते हैं। मिट्टी खाने की लीला में भगवान अपने मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराते हैं, जिससे माता यशोदा को उनके ऐश्वर्य का पता चलता है, परंतु योगमाया के प्रभाव से वे इसे भूल जाती हैं। अंत में, गर्गाचार्य द्वारा गुप्त रूप से नामकरण संस्कार किया जाता है, जिसमें बलराम जी को 'बलराम', 'संकर्षण' और 'शेष' जैसे नाम दिए जाते हैं, और कृष्ण के बारे में भविष्यवाणी की जाती है कि वे साक्षात नारायण हैं और कलियुग में चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतार लेंगे। इस प्रकार, कथा में भगवान की मधुर और ऐश्वर्यमयी लीलाओं का वर्णन है।
FAQs
श्रीमद भागवतम कथा में भगवान श्री कृष्ण और राधारानी की सुंदर लीलाओं का वर्णन है। यह ग्रंथ भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सुनने से जीवन में आनंद और शांति मिलती है।
कार्तिक मास में श्रवण का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण और राधारानी की लीलाओं को सुनने से अधिक पुण्य और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
भगवान कृष्ण ने माता यशोदा को बताया कि एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की है कि उनका विवाह पड़ोस में होगा और उनकी दुल्हन गोरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ससुराल वालों के पास उनसे ज्यादा गायें होंगी।
जब माता यशोदा गणेश पूजा कर रही थीं, तब कृष्ण ने अपने मित्रों के साथ मिलकर मोदक (लड्डू) खा लिए। उन्होंने सभी प्लेटों से थोड़े-थोड़े मोदक लेकर सारी प्लेटें वैसी ही दिखने दीं और आरोप गणेश जी पर लगा दिया।
इस लीला से भगवान ने सिखाया कि जो लोग भगवान की तरफ आते हैं, भगवान उनका ध्यान रखते हैं। हमें भी भगवान की तरफ जाना पड़ता है, तभी भगवान हमारी सहायता करते हैं।
जब कृष्ण ने मिट्टी खाई, तो माता यशोदा ने उनके मुंह में पूरा ब्रह्मांड देखा। इससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि उनका लाला स्वयं भगवान हैं, लेकिन योगमाया के प्रभाव से वे इस बात को भूल गईं।
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