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Barbareek/ Khatu Shyam - Part 1 - Bharat Ke Aslee Superheroes (Hindi Mythology Podcast)

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Barbareek/ Khatu Shyam - Part 1 - Bharat Ke Aslee Superheroes (Hindi Mythology Podcast)

यह कथा महाभारत के पांडवों के जंगल में छिपने और भीम के राक्षसी हिडिंबा से विवाह से शुरू होती है, जिससे घटोत्कच का जन्म होता है। बाद में, घटोत्कच का विवाह मोरवी से होता है और उनके पुत्र बर्बरीक का जन्म होता है, जो असल में यक्षराज सूर्यवर्चा के अवतार हैं। देवताओं की सभा में अहंकार दिखाने के कारण ब्रह्मा के शाप के फलस्वरूप सूर्यवर्चा को धरती पर जन्म लेना पड़ा, लेकिन विष्णु के वरदान से उनकी यक्ष शक्तियाँ बनी रहीं। बर्बरीक में जन्म से ही अद्भुत शक्तियाँ थीं, जिससे चिंतित घटोत्कच उन्हें श्रीकृष्ण के पास ले गए। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली और उन्हें गुप्त क्षेत्र में तपस्या करने का निर्देश दिया, ताकि वे अपनी शक्तियों को नियंत्रित कर सकें। इस तपस्या के माध्यम से बर्बरीक के भविष्य के महत्वपूर्ण रूप और उनकी भूमिका की ओर संकेत किया गया है, जो आगे की कथा में विकसित होता है।

Transcription

2101 Words, 9955 Characters

Hindi
जो अपनी शक्ति से बड़े से बड़े युद्ध को पलभर में खत्म कर दें, जिनके सामने ना कोई अस्त्र और ना ही कोई शस्त्र काम करे जिनके अंदर जन्म से ही बहुत शक्तियां हों और जिनका जन्म किसी बहुत बड़े उद्देश्य यानी पर्पस के लिए हुआ वही होते हैं। असली सुपर हीरो और ये कहानी हैं एक ऐसे ही सुपर हीरो खाटू श्याम यानी फरवरी की भारत स्पॉटिफाइ अरेंजमेंट प्रोड्यूस बीएनके प्रोडक्शन्स महाभारत में जब दुर्योधन ने पांडवों को लाक्षागृह यानी की लाख से बने महल में जलाने की साजिश या कहें कॉन्स्पिरेसी की तो पांडव एक सुरंग के रास्ते वहाँ से निकल गए। वो लाक्षागृह की आग से तो बच निकले थे लेकिन उन्हें दुर्योधन के अंदर जल रही जलन वाली आग से भी बचना था और इसीलिए उन सब ने सोचा कि हस्तिनापुर वापस जाने से अच्छा है कि जंगलों में छिपकर रहा जाए, जिससे दुर्योधन को भी लगेगा कि पांडव मर चूके और वो पांडवों को ढूँढना बंद कर देगा और इसी दौरान पांडव अपनी ताकत बढ़ा सकते हैं। इस तरह पाण्डव एक के बाद एक जंगल पार करते हुए आगे बढ़ते रहें। फिर उन सबने एक जंगल में आराम करने की सोंची। लेकिन वहाँ हिडिंबा नाम की एक बहुत शक्तिशाली राक्षसी आ गई। आई तो वो थी पांडवों को मारने के लिए, लेकिन भीम को देखते ही वो उनके प्यार में पड़ गई और फिर वो भीम से शादी करने की जिद करने लगी। पर भीम ने इस शादी के लिए मना कर दिया लेकिन अपनी माँ यानी कुन्ती के समझाने पर वो मान गए और भीम और हिडिम्बा की शादी हो गई। इस शादी की शर्त ये थी कि भीम और हिडिम्बा की संतान के जन्म के बाद पांडव वहाँ से चले जाएंगे। हिट अंबानी शर्त भी मान ली। पांडव और कुन्ती 1 साल तक वहीं रहे, लेकिन फिर जब हिडिम्बा ने एक बहुत ही ताकतवर बेटे को जन्म दिया जिसका नाम घटोत्कच रखा गया तो शर्त के हिसाब से पांडव वहाँ से जाने की तैयारियां करने लगे। भीम भी दुखी मन से पांडवों के साथ चल पड़े और उनकी पत्नी हिडिंबा और उनका बेटा घटोत्कच वहीं जंगल में रहे। फिर बाद में द्रौपदी के स्वयंवर के बाद भीष्म ने हस्तिनापुर में से पांडवों को कुछ हिस्सा दे दिया। और इस तरह पांडवों ने एक अलग राज्य यानी इंद्रप्रस्थ बस आया। पांडव खुशी के साथ अपना जीवन जी रहे थे लेकिन जब भी भीम को अपनी पत्नी हिडिंबा और बेटे घटोत्कच की याद आती थी तो वो दुखी हो जाते थे। वहीं दूसरी तरफ घटोत्कच भी बड़े हो चूके थे और जंगल के राजा बन चूके थे। एक बार जब भीम उस जंगल से गुजरे और उनकी मुलाकात अपनी पत्नी हिडिंबा और घटोत्कच से हुई तो उन्होंने घटोत्कच को इंद्रप्रस्थ आने के लिए कहा। और इस तरह सालों बाद पिता और बेटा आपस में मिलने जुलने लगे थे। घटोत्कच को इंद्रप्रस्थ जाना अच्छा लगता था। उन्होंने युधिष्ठिर से राजधर्म और भीम से युद्ध कला सीखी। ऐसे ही एक बार जब घटोत्कच्छ इंद्रप्रस्थ पहुंचे तो श्रीकृष्ण भी वही थे। उन्हें घटोत्कच का मज़ाकिया स्वभाव बहुत पसंद आया और फिर एक बार जब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि वो घटोत्कच की शादी के लिए कोई एक अच्छी लड़की बताये तो श्रीकृष्ण ने कुछ देर सोचने के बाद कहा कि उनकी नजर में एक लड़की है जिसकी जोड़ी घटोत्कच के साथ सबसे सही रहे गी। वो लड़की थी प्रागज्योतिषपुर राज्य के राजा भाग दत्त की बहन मोरवी श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि मोरवी से शादी करना कोई आसान काम नहीं, क्योंकि मोरवी ने अपनी शादी के लिए दो शर्तें रखी। मोरवी सिर्फ उसी से शादी करेंगी, जो ताकत और अक्ल दोनों में उन्हें हरा सके। श्रीकृष्ण को भरोसा था कि घटोत्कच है, जो बुद्धि और बल दोनों में मोरवी को हराकर उनसे शादी कर सकते। घटोत्कच श्रीकृष्ण की बात मानकर प्रागज्योतिषपुर मोरवी से शादी करने पहुँच गए। जब मोरवी उनके सामने आयी तो उन्हें देखते ही घटोत्कच को पुन से प्यार हो गया और मोरवी को भी घटोत्कच अच्छे लगे लेकिन उन्हें शादी की शर्तें पूरी करनी थी। इसीलिए पहली शर्त थी कि घटोत्कच मोर्वी को कोई ऐसी कहानी सुनाएं जिसे सुनकर वो उलझन में पड़ जाए और अगर घटोत्कच ऐसा नहीं कर पाए तो मोर भी उन्हें खत्म कर देंगी। घटोत्कच ने कहानी सुनाना शुरू किया। वो बोलेंगे की एक शहर में एक पति पत्नी अपनी एक बेटी के साथ रहते थे। कुछ सालों बाद पत्नी की मृत्यु हो गई और फिर उसके पति ने उस बच्ची को अकेले ही पाल कर बड़ा किया और जब वो बड़ी हो गयी तो उसके पिता ने उससे कहा कि वो उसकी असली बेटी नहीं। उसने तो उसे बस पाला और इस तरह झूठ बोलकर उस आदमी ने अपनी ही बेटी से शादी कर ली। कुछ समय बाद उसकी बेटी को भी एक बेटी होगी। इतना कहकर घटोत्कच्छ चुप हो गए। और उन्होंने मोरवी से पूछा की पैदा हुई लड़की उस आदमी की बेटी हुई या नातिन यानी ग्रैंडडॉटर? मोरबी काफी देर तक सोचती रही, लेकिन उन्हें इस सवाल का जवाब नहीं मिला और इस तरह घटोत्कच ने पहली शर्त पूरी कर दी थी। इसके बाद बारी थी ताकत की। घटोत्कच ने पलभर में ही मोरवी की सेना और मोरवी को हरा दिया और इस तरह दोनों शर्तों को पूरा करने के बाद उनकी और मोरवी की शादी हुई। शादी के कुछ सालों बाद मुरली ने एक बहुत ही शक्तिशाली बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा गया बरबरी। जितनी अलग घटोत्कच की शादी थी, उतना ही अनोखा था बर्बरीक, आंजन, काले बादलों से खूबसूरत रंग और मटके जैसे गोल चेहरे पर बड़ी बड़ी सुन्दर आँखें और उनके घुंघराले बाल देखकर ही घटोत्कच ने उन्हें बर्बरीक नाम दिया। फरवरी का मतलब होता है घुंघराले बाल। अनोखी बात ये थी की बराबरी पैदा होते ही तेजी से बड़े होने लगे। जन्म के कुछ ही दिनों बाद वो खड़े हो गए और चलने लगे और फिर कुछ ही महीनों में वह अपने पिता घटोत्कच की तरह उड़ने भी लगे। घटोत्कच जो खुद इतने ताकतवर थे, वो इतनी छोटी उम्र में बराबरी की ऐसी शक्ति देखकर खुश तो थे लेकिन वो कही ना कही परेशान भी थे। घटोत्कच और मोरवी के बेटे को ताकतवर तो होना ही था लेकिन इस असीमित यानी कि लिमिटलेस ताकत के पीछे बरबरी के जन्म से पहले की कहानी जुड़ी हुई। धरती पर जब पाप बढ़ने लगा तो सभी देवता विष्णु जी के पास मदद मांगने गए। ब्रह्मा जी भी वहीं मौजूद थे और उन्होंने विष्णु जी से कहा कि अब उन्हें ही धरती पर अवतार लेकर वहाँ से अधर्म को खत्म करना पड़ेगा। विष्णु जी मान गए और उन्होंने कहा कि वो जल्द ही श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर जाएंगे। फिर विष्णु जी ने सभी देवी देवताओं से कहा कि वो इस धर्मयुद्ध में उनका साथ दे। सभी देवी देवता इसके लिए तैयार हो गए। उस समय यक्षों के राजा सूर्य वर्चा भी वही थे। यक्ष देव लोक में देवताओं के साथ रहते थे और बहुत शक्तिशाली होते थे। या शब्द का मतलब होता है जादू की शक्ति? इसीलिए यक्षों के पास जादुई शक्तियां भी बहुत होती थी। मतलब सूर्य वर्चा भी बहुत शक्तिशाली थी। जब उन्होंने विष्णु जी की बात सुनी तो वह मुस्कुराते हुए बोले की जब खुद सूर्य वर्चा सबकी सेवा में हैं तो किसी और को धरती पर जाने की तकलीफ नहीं उठानी चाहिए। वो अकेले ही धरती पर जाकर वहाँ से अधर्म को खत्म कर देंगे। ब्रह्मा जी को सूर्य वर्चा की बात सुनकर गुस्सा आ गए और वो सूर्य वर्चा से बोले कि उन्हें अपनी ताकत का घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि जीस काम को देवताओं के साथ मिलकर करने की बात हो रही है। वो उसे अकेले ही कर देने की बात कहकर सभी देवताओं का एक तरह से अपमान कर रहे हैं और फिर ब्रह्मा जी ने उन्हें श्राप दे दिया कि जीस अधर्म को खत्म करने का अहंकार सूर्य वर्चा दिखा रहे हैं। उसी अधर्म के खिलाफ़ जब धरती पर महायुद्ध होगा, तब सूर्य वर्चा उसमें हिस्सा लेने से पहले ही मारे जाएंगे और क्योंकि सूर्य वर्चा ने विष्णु जी के सामने ऐसी बातें कही हैं तो विष्णु जी के अवतार ही उनकी मौत का कारण बनेंगे। सूर्य वर्चा को अपनी गलती का एहसास हो गया था। उन्होंने माफी भी मांगी, लेकिन वो ये भी बोले कि उन्हें धरती पर विष्णु जी के अवतार के हाथों ही मरना क्योंकि उनके हाथों मरने का मतलब था मुक्ति यानी की मोक्ष। ब्रह्मा जी के श्राप और सूर्य वर्चा की ये बात सुनने के बाद विष्णु जी ने कहा की धरती पर जब सूर्य वर्चा जनम लेंगे तो उनकी यक्ष शक्तियां वैसी की वैसी ही रहेंगी और आने वाली सदियों तक उनकी पूजा की जाएगी और इस तरह सूर्य वर्चा ने बरबरी के रूप में धरती पर जन्म लिया। और विष्णु जी के वरदान की वजह से उनमें उनकी यक्ष वाली शक्तियां मौजूद रहीं। लेकिन उनकी शक्तियां उनके पिता घटोत्कच के लिए मुश्किलें बन गयी थी। क्योंकि उन्हें लगा की या तो उनके बेटे के पास अद्भुत शक्तियां हैं या फिर उसके ऊपर कोई बड़ी मुश्किल आने वाली है। ये सब सोचकर बराबरी के भविष्य के बारे में चिंता करने लगे। और उनके मन में इस सबको लेकर कई तरह के सवाल आने लगे। फिर उन्होंने सोचा कि हर सवाल, हर परेशानी, हर चिंता का हल तो सिर्फ श्रीकृष्ण के पास ही मिल सकता है। इसीलिए बराबरी को अपने साथ लेकर घटोत्कच द्वारका की तरफ उड़ने लगे। जब वो द्वारका के ऊपर पहुंचे तो सब उन्हें देखकर परेशान हो गए। सबको लगा कि द्वारका पर कोई हमला करने आया है। लेकिन फिर श्रीकृष्ण ने सबको समझाया की वो हमला करने नहीं बल्कि उनसे मिलने आए। श्री कृष्ण घटोत्कच को तो पसंद करते ही थे, बर्बरीक से मिलकर भी उन्हें बहुत खुशी हुई। उन्होंने बरबरी को समझाया कि उनके पास इतनी शक्तियां हैं तो उनको उन शक्तियां का सही इस्तेमाल करना चाहिए और अपने साथ साथ अपने आसपास के लोगों के जीवन को भी अच्छा बनाना चाहिए। श्रीकृष्ण की बातें सुनकर बर्बरीक उनसे बोले की वो उन्हें अपना शिष्य बना ले। श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले की अगर बर्बरीक उनका शिष्य बनना है तो पहले उन्हें श्रीकृष्ण के तीन सवालों के जवाब देने होंगे। यह सुनकर फरवरी को उनके सवालों के जवाब देने को तैयार हो गए। श्री कृष्ण ने पहला सवाल पूछा कि गुरु और भगवान में बड़ा कौन है? बर्बरीक का जवाब था गुरु क्योंकि भगवान तक पहुंचने का रास्ता गुरु ही बताते। फिर श्रीकृष्ण ने अगला सवाल पूछा की सबसे तेज क्या चलता है? तो बर्बरीक ने जवाब दिया हमारा मन वो ही सबसे तेज चलता है फिर श्रीकृष्ण ने आखरी सवाल पूछा कि वो क्या है जो जाकर आता नहीं और आकर जाता नहीं। बरबरी कुछ देर सोच में पड़ गए और फिर वो बोले जवानी और बुढ़ापा जवानी जाकर आती नहीं और बुढ़ापा आकर जाता नहीं। बर्बरीक के ये जवाब सुनकर श्रीकृष्ण बहुत खुश हुए। उन्होंने बर्बरीक से कहा की उनकी शक्ति को धैर्य यानी पेशेंट्स, एकाग्रता यानी कॉन्सन्ट्रेशन और संयम यानी की की जरूरत है और इन सब को पाने के लिए उन्हें पहले गुरु की नहीं बल्कि तपस्या की जरूरत है। इसीलिए बरबरी को महिसागर के किनारे गुप्त क्षेत्र में जाकर तपस्या करनी चाहिए। ऐसा भी माना जाता है कि गुप्त क्षेत्र वो जगह है जहाँ नारदमुनि चारों दिशाओं की देवियो और नव दुर्गा की नौ देवीयों को एक साथ लाए थे। और इसीलिए गुप्त क्षेत्र की शक्तियां इतनी ज्यादा होती है कि साधारण इंसानों का वहाँ रुकना संभव ही नहीं। जैसा कि नाम से पता चलता है, गुप्त क्षेत्र एक गुप्त यानी की सीक्रेट जगह है जहाँ पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं। माना ये भी जाता है कि मध्य प्रदेश में धार नाम की जगह से निकली माही नदी का संगम जहाँ पश्चिम सागर से होता है, वहीं कहीं पर गुप्त क्षेत्र है। श्रीकृष्ण को पता था कि बर्बरीक में वो शक्तियां हैं जो गुप्त क्षेत्र जैसी जगह पहुंचने और वहाँ रुकने के लिए जरूरी है। इसीलिए उन्होंने घटोत्कच से कहा कि वो अपने बेटे बरबरी की चिंता ना करें क्योंकि उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। श्रीकृष्ण ने ही बराबरी का साफ दिल देखकर उनको एक और नाम दिया जो कि था सूर्योदय यानी अच्छे दिलवाला। घटोत्कच ये सब सुनकर बहुत खुश हुए और वो वापस कामिका के जंगलों में लौट गए। गुप्त क्षेत्र में कड़ी तपस्या करने से बराबरी को क्या वरदान मिला? कैसे नवदुर्गा के नौ रूप बरबरी के सामने आए। कौन थे बर्बरीक के गुरु और कैसे बर्बरीक में उनकी रक्षा की? साथ ही उन्होंने अपनी दादी यानी हिडिंबा से क्या क्या सीखा ये और ऐसे कई सारे सवालों के जवाब जानने के लिए सुनते रहिये भारत के असली सुपर हिरोस स्पॉटिफाइ ओरिजिनल हर दिन।

Podcast Summary

Key Points:

  1. महाभारत के पांडवों की कहानी से शुरुआत करते हुए भीम और राक्षसी हिडिंबा के विवाह तथा उनके पुत्र घटोत्कच के जन्म का वर्णन।
  2. घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक (खाटू श्याम) के अद्भुत जन्म और दिव्य शक्तियों की उत्पत्ति, जो यक्षराज सूर्यवर्चा के अवतार हैं।
  3. बर्बरीक की शिक्षा, श्रीकृष्ण से मुलाकात, और गुप्त क्षेत्र में तपस्या के लिए प्रस्थान, जो उनके भविष्य के महत्वपूर्ण योगदान की ओर संकेत करता है।

Summary:

यह कथा महाभारत के पांडवों के जंगल में छिपने और भीम के राक्षसी हिडिंबा से विवाह से शुरू होती है, जिससे घटोत्कच का जन्म होता है। बाद में, घटोत्कच का विवाह मोरवी से होता है और उनके पुत्र बर्बरीक का जन्म होता है, जो असल में यक्षराज सूर्यवर्चा के अवतार हैं। देवताओं की सभा में अहंकार दिखाने के कारण ब्रह्मा के शाप के फलस्वरूप सूर्यवर्चा को धरती पर जन्म लेना पड़ा, लेकिन विष्णु के वरदान से उनकी यक्ष शक्तियाँ बनी रहीं। बर्बरीक में जन्म से ही अद्भुत शक्तियाँ थीं, जिससे चिंतित घटोत्कच उन्हें श्रीकृष्ण के पास ले गए। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली और उन्हें गुप्त क्षेत्र में तपस्या करने का निर्देश दिया, ताकि वे अपनी शक्तियों को नियंत्रित कर सकें। इस तपस्या के माध्यम से बर्बरीक के भविष्य के महत्वपूर्ण रूप और उनकी भूमिका की ओर संकेत किया गया है, जो आगे की कथा में विकसित होता है।

FAQs

खाटू श्याम, जिनका वास्तविक नाम बर्बरीक है, एक महान योद्धा थे जिनमें जन्मजात अद्भुत शक्तियाँ थीं। उन्हें असली सुपरहीरो इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपनी शक्ति से बड़े-से-बड़े युद्ध को पलभर में समाप्त कर सकते थे और उनके सामने कोई अस्त्र-शस्त्र काम नहीं करता था।

घटोत्कच भीम और राक्षसी हिडिंबा के पुत्र थे। उनका जन्म तब हुआ जब पांडव लाक्षागृह से बचकर जंगल में छिपे हुए थे और हिडिंबा ने भीम से विवाह किया था।

बर्बरीक वास्तव में यक्षराज सूर्यवर्चा के अवतार थे, जिन्हें विष्णु जी के वरदान के कारण अपनी यक्ष शक्तियाँ धरती पर भी प्राप्त थीं। इसी कारण उनमें जन्म से ही अद्भुत और असीमित शक्तियाँ थीं।

बर्बरीक ने मोरवी की दो शर्तें पूरी करके उनसे विवाह किया। पहली शर्त में उन्होंने एक पेचीदा कहानी सुनाकर मोरवी को उलझन में डाला और दूसरी शर्त में ताकत दिखाकर उनकी सेना को हराया।

श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को बताया कि उनकी शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए धैर्य, एकाग्रता और संयम की आवश्यकता है, जो तपस्या से प्राप्त होते हैं। इसीलिए उन्हें महिसागर के किनारे स्थित गुप्त क्षेत्र में तपस्या करने के लिए भेजा गया।

गुप्त क्षेत्र एक गुप्त और अत्यंत शक्तिशाली स्थान है, जहाँ नवदुर्गा की नौ देवियाँ विराजमान हैं। माना जाता है कि यह मध्य प्रदेश की माही नदी और पश्चिम सागर के संगम के पास स्थित है।

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